7 अक्टूबर 2026
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जयशंकर की घाना यात्रा: विदेश मंत्री अबलाकवा से मुलाकात, व्यापार रक्षा टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर बड़ी चर्चा

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जयशंकर की घाना यात्रा: विदेश मंत्री अबलाकवा से मुलाकात, व्यापार रक्षा टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर बड़ी चर्चा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की घाना यात्रा महज़ एक शिष्टाचार भेंट नहीं — यह भारत की 'ग्लोबल साउथ' कूटनीति की ज़मीनी पड़ताल है। व्यापार, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और ECOWAS तक जुड़ाव की बात करते हुए भारत अफ्रीका में अपनी रणनीतिक जड़ें और गहरी कर रहा है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 7 अक्टूबर 2026 को अकरा, घाना में घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा से मुलाकात की।
बैठक में व्यापार, निवेश, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, टेक्नोलॉजी और क्षमता निर्माण पर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों ने 'ग्लोबल साउथ' साझेदारी के तहत अफ्रीकी संघ व ECOWAS के साथ भारत के जुड़ाव को गहरा करने पर चर्चा की।
घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा की 'अकरा रीसेट' नीति के तहत कृषि मशीनीकरण, आईटी पार्टनरशिप और स्कॉलरशिप विस्तार पर भी बात हुई।
जयशंकर घाना के बाद कोटे डी आइवर और इथियोपिया की यात्रा करेंगे — यह उनकी पाँच दिवसीय तीन देशीय अफ्रीका यात्रा है।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 7 अक्टूबर 2026 को घाना की राजधानी अकरा में अपने घाना के समकक्ष सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा से औपचारिक मुलाकात की। इस द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, निवेश, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और टेक्नोलॉजी समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊँचाई देने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह यात्रा भारत की तीन अफ्रीकी देशों की पाँच दिवसीय आधिकारिक यात्रा का हिस्सा है।

बैठक का मुख्य एजेंडा

दोनों नेताओं ने 'ग्लोबल साउथ' के साझेदारों के रूप में अपनी ऐतिहासिक एकजुटता और विकास की साझा आकांक्षाओं पर केंद्रित चर्चा की। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "'ग्लोबल साउथ' के साझेदारों के तौर पर भारत और घाना दोनों विकास संबंधी समान आकांक्षाओं और ऐतिहासिक एकजुटता को साझा करते हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय सहयोग और अफ्रीकी संघ व पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) के साथ भारत के जुड़ाव को और गहरा करने पर भी सहमति जताई।

किन क्षेत्रों में होगा सहयोग

घाना के विदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इस यात्रा के दौरान फार्मास्युटिकल विकास, कृषि मशीनीकरण और वैल्यू एडिशन में सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर रहेगा। इसके अलावा, स्कॉलरशिप और आईटी पार्टनरशिप को विस्तारित करने तथा रोज़गार सृजन और औद्योगीकरण के एजेंडे को समर्थन देने की बात भी सामने आई। गौरतलब है कि घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा की 'अकरा रीसेट' नीति के तहत ये सभी प्राथमिकताएँ निर्धारित हैं।

यात्रा की पृष्ठभूमि और महत्त्व

जयशंकर मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को अकरा पहुँचे थे, जहाँ विदेश मंत्री अबलाकवा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। घाना के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों को एकजुटता और साझा मूल्यों के अपने अटूट बंधन को फिर से मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अफ्रीका के साथ अपनी कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को व्यवस्थित रूप से सुदृढ़ कर रहा है।

आगे की यात्रा: कोटे डी आइवर और इथियोपिया

घाना के बाद विदेश मंत्री जयशंकर कोटे डी आइवर और फिर इथियोपिया की यात्रा करेंगे। इन तीनों देशों की यात्रा का समग्र उद्देश्य अफ्रीका महाद्वीप में भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा और गति देना है। विश्लेषकों के अनुसार यह दौरा भारत की 'अफ्रीका प्रथम' कूटनीति को ज़मीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बराबरी का भागीदार माना जा रहा है — और 'ग्लोबल साउथ' का नारा इसी विचार की कूटनीतिक अभिव्यक्ति है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि भारत अफ्रीका संबंध अभी भी वादों और घोषणाओं के स्तर पर अधिक और ठोस निवेश व परियोजनाओं पर कम हैं। घाना के राष्ट्रपति महामा की 'अकरा रीसेट' नीति एक नई खिड़की जरूर खोलती है, लेकिन फार्मास्यूटिकल्स और कृषि प्रौद्योगिकी में वास्तविक परिणाम तभी आएंगे जब सरकार से सरकार संवाद निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी में बदले।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस. जयशंकर की घाना यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जयशंकर की घाना यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और घाना के बीच व्यापार, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्नोलॉजी में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना था। इस यात्रा में 'ग्लोबल साउथ' साझेदारी के तहत ECOWAS और अफ्रीकी संघ के साथ भारत के जुड़ाव को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
घाना के विदेश मंत्री कौन हैं जिनसे जयशंकर मिले?
घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा हैं, जिन्होंने जयशंकर को आधिकारिक यात्रा पर आमंत्रित किया था। दोनों ने 7 अक्टूबर 2026 को अकरा में विस्तृत बातचीत की।
'अकरा रीसेट' नीति क्या है और इसका भारत से क्या संबंध है?
'अकरा रीसेट' घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा की नीति है जो औद्योगीकरण, रोज़गार सृजन और कृषि मूल्य संवर्द्धन को प्राथमिकता देती है। भारत इस नीति के तहत फार्मास्युटिकल विकास, आईटी पार्टनरशिप और स्कॉलरशिप विस्तार में साझेदार के रूप में उभर सकता है।
जयशंकर घाना के बाद किन देशों की यात्रा करेंगे?
घाना के बाद विदेश मंत्री जयशंकर कोटे डी आइवर और इथियोपिया की यात्रा करेंगे। यह पाँच दिवसीय तीन देशीय अफ्रीका दौरा भारत की अफ्रीकी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिए है।
भारत घाना संबंधों में 'ग्लोबल साउथ' का क्या महत्त्व है?
'ग्लोबल साउथ' की अवधारणा विकासशील देशों की साझा आकांक्षाओं और चुनौतियों को एक साझा मंच पर लाती है। भारत और घाना दोनों इस ढाँचे के भीतर बहुपक्षीय मंचों पर एक दूसरे का समर्थन करते हैं, और यही एकजुटता उनके द्विपक्षीय संबंधों की नींव है।
राष्ट्र प्रेस
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