जयशंकर ने अरब लीग के राजनयिकों से मुलाकात, वैश्विक संघर्ष और तकनीक की भूमिका पर हुई चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अरब लीग (लीग ऑफ अरब स्टेट्स) के राजनयिकों के एक प्रतिनिधि समूह से भेंट की। इस बैठक में वर्तमान वैश्विक संघर्षों के दूरगामी प्रभावों और आधुनिक दुनिया को नया आकार देने में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में क्या हुई चर्चा
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में बताया कि भारत में प्रशिक्षण ले रहे अरब लीग के राजनयिकों से मुलाकात करना उनके लिए प्रसन्नता की बात रही। उन्होंने कहा कि चर्चा में मौजूदा वैश्विक संघर्षों के व्यापक प्रभावों और तकनीकी बदलावों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
विदेश मंत्री ने राजनयिकों को यह भी प्रेरणा दी कि वे भारत में अपने प्रशिक्षण काल का भरपूर सदुपयोग करें — न केवल कूटनीतिक पाठ्यक्रम के लिए, बल्कि देश की संस्कृति और यहाँ के लोगों को गहराई से समझने के लिए भी। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को इस अनुभव को यादगार और उपयोगी बनाने की शुभकामनाएँ दीं।
भारत-अरब संबंधों का महत्त्व
जयशंकर ने इस अवसर पर रेखांकित किया कि भारत और अरब देश न केवल भौगोलिक पड़ोसी हैं, बल्कि ग्लोबल साउथ के साझेदार भी हैं। उन्होंने जोर दिया कि आर्थिक सहयोग को और प्रगाढ़ करना आवश्यक है, जिससे व्यापार एवं विकास में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके और किसी भी प्रकार के अनुचित बाहरी दबाव का सामूहिक रूप से सामना किया जा सके।
गौरतलब है कि मिस्र में भारतीय दूतावास के अनुसार, अरब लीग के देशों को भारत के विस्तारित पड़ोस का हिस्सा माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान दृष्टिकोण और ऐतिहासिक व्यापारिक-आर्थिक रिश्ते इस साझेदारी की मज़बूत नींव हैं।
पृष्ठभूमि: अगस्त की बैठक और कार्यकारी कार्यक्रम
इस बैठक से पूर्व, अगस्त 2026 में विदेश मंत्रालय में कांसुलर, पासपोर्ट, वीजा और प्रवासी भारतीय मामलों की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने अरब लीग के सहायक महासचिव खालिद मंजलावी से मुलाकात की थी। उस बैठक में मुख्य रूप से भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में स्वीकृत 2026-28 कार्यकारी कार्यक्रम को क्रियान्वित करने की रूपरेखा पर चर्चा हुई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत ग्लोबल साउथ के नेतृत्वकर्ता की भूमिका में अपनी कूटनीतिक पहुँच को व्यापक बना रहा है और अरब जगत के साथ संस्थागत जुड़ाव को नई ऊँचाई देने की कोशिश कर रहा है।
अरब लीग: एक संक्षिप्त परिचय
अरब लीग की स्थापना 1945 में काहिरा में हुई थी। उस समय इसके केवल सात सदस्य देश थे और इसका मूल उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों के साझा हितों को आगे बढ़ाना था। आज इस संगठन में उत्तर अफ्रीका और पश्चिम एशिया के 22 अरब देश शामिल हैं।
आगे की राह
विदेश मंत्री जयशंकर की यह पहल दर्शाती है कि भारत कूटनीतिक प्रशिक्षण और संस्थागत संवाद के माध्यम से अरब जगत के साथ अपने संबंधों को नई गहराई देने के लिए प्रतिबद्ध है। 2026-28 कार्यकारी कार्यक्रम के क्रियान्वयन के साथ, भारत-अरब सहयोग के अगले दो वर्ष कूटनीतिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण रहेंगे।