जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार: मंगलवार सुबह 10:30 बजे लोक भवन में शपथ ग्रहण, उमर ने विधायकों को लॉबिंग से रोका
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में मंगलवार, 28 अक्टूबर 2026 की सुबह 10:30 बजे श्रीनगर के लोक भवन में कैबिनेट विस्तार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद निमंत्रण जारी कर दिए हैं, जिसके बाद पूरे केंद्रशासित प्रदेश में नई कैबिनेट की संभावित संरचना को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है।
उमर का विधायकों को कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ सलाह-मशविरा कर पहले ही तय की जा चुकी है। उन्होंने पार्टी विधायकों से कहा कि वे मंत्री पद के लिए लॉबिंग न करें।
उमर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'कृपया मुझे वॉट्सऐप मैसेज न भेजें। मुझे लंबे-लंबे वॉट्सऐप मैसेज मिल रहे हैं, जिनमें बायो-डेटा और लंबी-लंबी कहानियाँ होती हैं, जैसे कि मैं उन्हें जानता ही नहीं। कृपया शपथ ग्रहण समारोह तक धैर्य रखें। सबको पता चल जाएगा कि उनकी किस्मत में क्या है।'
संवैधानिक सीमा और कैबिनेट का आकार
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। 'पुनर्गठन अधिनियम 2019' के प्रावधानों के अनुसार, मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट में विधानसभा की कुल संख्या के केवल 10 प्रतिशत सदस्य ही शामिल हो सकते हैं — यानी अधिकतम 9 मंत्री।
वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट में 6 सदस्य हैं। इस गणित के अनुसार उमर अब्दुल्ला अधिकतम 3 और मंत्री शामिल कर सकते हैं — बशर्ते वे नए चेहरों के लिए किसी मौजूदा मंत्री को हटाने का रास्ता न चुनें।
रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी आलाकमान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पहली बार विधायक बने नेताओं को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिलेगी। इससे अधिकांश नए विधायकों की मंत्री बनने की संभावना इस दौर में व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गई है।
कांग्रेस का रुख: समर्थन, लेकिन कैबिनेट से बाहर
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 6 विधायकों वाली कांग्रेस एनसी के नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है। मुख्यमंत्री उमर के कैबिनेट में शामिल होने के प्रस्ताव के बावजूद जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JKPCC) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने दोहराया कि उनकी पार्टी फिलहाल सरकार में शामिल नहीं होगी।
कांग्रेस का रुख स्पष्ट है — जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिलता, पार्टी कैबिनेट से बाहर ही रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने अभी तक राज्य का दर्जा बहाल करने की कोई ठोस समयसीमा नहीं दी है।
जनता की नाराजगी और एनसी की राजनीतिक चुनौती
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा न कर पाने के कारण जनता में बेचैनी बढ़ती दिख रही है। उमर अब्दुल्ला का यह तर्क कि केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा रहने से सरकार की शक्तियाँ सीमित हैं, आलोचकों को बहुत रास नहीं आ रहा।
उमर ने अपने विधायकों में किसी भी 'बगावत' की आशंका को खारिज किया है। अतीत में नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने वालों के राजनीतिक अनुभवों को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी के किसी विधायक के विद्रोह की संभावना कथित तौर पर न्यूनतम है।
आगे क्या
यदि मंगलवार का यह कैबिनेट फेरबदल/विस्तार अपेक्षाओं के अनुरूप होता है, तो संभावना है कि यह 2029 तक का आखिरी बड़ा फेरबदल होगा, जब जम्मू-कश्मीर में अगले विधानसभा चुनाव होने हैं। पहली बार विधायक बने नेताओं की उम्मीदें अब उमर अब्दुल्ला के अगले संभावित कैबिनेट फेरबदल पर टिकी हैं। नई कैबिनेट का असली इम्तिहान यह होगा कि वह जम्मू-कश्मीर की जनता की उम्मीदों को पूरा करने में कहाँ तक सफल होती है।