जयशंकर-शेख अब्दुल्ला मुंबई बैठक: भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मज़बूती
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा
दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की और आपसी सहयोग के नए आयाम तलाशे। बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच पारस्परिक संपर्क को और गहरा करने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
जयशंकर ने एक्स पर क्या कहा
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग काफी व्यापक और महत्वाकांक्षी है। भारत-यूएई संबंध एक 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।'
यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने 'भारत और यूएई की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने' पर विचार-विमर्श किया।
आधिकारिक दौरे का महत्त्व
शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान एक आधिकारिक दौरे पर सोमवार, 19 अक्टूबर को मुंबई पहुँचे। उनके स्वागत में महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा उपस्थित रहे।
विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को भारत और यूएई के बीच 'करीबी और नियमित जुड़ाव' का प्रतीक बताया। गौरतलब है कि यह यात्रा विदेश मंत्री जयशंकर के हालिया यूएई दौरे के बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने यूएई के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी और 'रायसीना मिडिल ईस्ट डायलॉग' में भाग लिया था।
भारत-यूएई संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और यूएई के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' की घोषणा 2017 में की गई थी और तब से दोनों देशों के संबंध व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी में रहने वाले 35 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों की उपस्थिति के कारण और अधिक सघन हुए हैं। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी खाड़ी कूटनीति को व्यापक पश्चिम एशिया रणनीति के हिस्से के रूप में सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है।
आगे क्या
इस उच्च-स्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों के बीच निवेश और तकनीक क्षेत्र में नई साझेदारियों की संभावनाएँ और प्रबल हुई हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा दोनों देशों की 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक ठोस रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।