यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद मुंबई पहुंचे, जयशंकर से 19-20 अक्टूबर को द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान 19 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचे, जहाँ वे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ 19 और 20 अक्टूबर को द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। विदेश मंत्रालय ने इस उच्चस्तरीय दौरे को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
स्वागत और आगमन
मुंबई में महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने यूएई के विदेश मंत्री का औपचारिक स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस आगमन की जानकारी साझा की। यह दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत और निरंतर राजनयिक संवाद का प्रतीक माना जा रहा है।
वार्ता के प्रमुख एजेंडा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा, व्यापार, निवेश, फिनटेक, रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में चल रही पहलों का आकलन करेंगे। साथ ही पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति तथा वैश्विक एवं बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।
जायसवाल ने कहा, 'यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की यात्रा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने का अवसर होगी। दोनों प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा, व्यापार, निवेश, फिनटेक, रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में पहलों का आकलन करेंगे और उन्हें आगे बढ़ाएंगे।'
मार्को रुबियो से भी होगी मुलाकात
20 अक्टूबर को विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी वार्ता करेंगे और संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस तरह मुंबई एक ही दिन में दो प्रमुख राजनयिक बैठकों का केंद्र बन गया है।
भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) 2022 में लागू हुआ था, जिसने द्विपक्षीय व्यापार को नई गति दी। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक और निवेश साझेदारों में से एक है। यह दौरा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, और दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
क्या होगा आगे
दोनों देशों के बीच 19 और 20 अक्टूबर को होने वाली इस वार्ता के परिणामों पर सभी की नज़रें टिकी हैं। विशेष रूप से रक्षा सहयोग और फिनटेक क्षेत्र में किसी ठोस घोषणा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह दौरा भारत की सक्रिय खाड़ी कूटनीति की दिशा में एक और अध्याय जोड़ता है।