यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद का भारत दौरा, 20 अक्टूबर को जयशंकर से मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान सोमवार शाम दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँचे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, वह मंगलवार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की कोशिशें जारी हैं।
आगमन और कार्यक्रम
विदेश मंत्रालय के अनुसार, शेख अब्दुल्ला सोमवार रात 8 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचे। मंगलवार को उनकी डॉ. जयशंकर के साथ बैठक होटल ताज महल पैलेस, मुंबई में निर्धारित है। उपलब्ध कार्यक्रम में बैठक के विस्तृत एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया है।
बातचीत के अपेक्षित मुद्दे
दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढाँचे के तहत इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक), रक्षा और संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक व बहुपक्षीय मुद्दे भी एजेंडे का हिस्सा हो सकते हैं।
जयशंकर की हालिया यूएई यात्रा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि डॉ. जयशंकर ने हाल ही में 14 से 16 अक्टूबर 2026 तक यूएई का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान उन्होंने अबू धाबी में शेख अब्दुल्ला सहित यूएई के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने भारत-यूएई संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और फिनटेक के क्षेत्रों में सहयोग को और मज़बूत करने पर विचार-विमर्श किया था।
जयशंकर ने उस यात्रा के दौरान अबू धाबी में आयोजित रायसीना मिडिल ईस्ट कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में भी हिस्सा लिया था, जहाँ उन्होंने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
भारत-यूएई संबंधों का महत्व
यूएई, भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक प्रमुख गंतव्य भी। दोनों देशों के बीच फरवरी 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह यात्रा मात्र एक सप्ताह के भीतर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच दूसरी प्रत्यक्ष बैठक है, जो रिश्तों की गहराती सक्रियता को दर्शाती है।
आगे क्या
बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनज़र यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा के संदर्भ में भी अहम मानी जा रही है।