भारत की पश्चिम एशिया पर नजर: खाड़ी देशों से संपर्क बढ़ा रहा विदेश मंत्रालय
सारांश
Key Takeaways
- भारत पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर गहरी नजर रख रहा है।
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यूएई दौरा महत्वपूर्ण है।
- भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी विकसित हो रही है।
- खाड़ी देशों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता जारी है।
- दवाओं की कीमतों में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत पश्चिम एशिया के तेजी से बदलते हालात पर गहरी नजर रख रहा है और इस क्षेत्र के खाड़ी देशों के साथ संपर्क स्थापित कर रहा है।
गुरुवार को पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने केंद्र की तैयारियों का विवरण साझा किया।
जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार बदलते घटनाक्रमों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं, और भारत इन परिवर्तनों पर बारीकी से नजर रखे हुए है और क्षेत्रीय देशों के साथ सक्रिय संवाद कर रहा है। इस सिलसिले में विदेश मंत्री एस. जयशंकर 11 से 12 अप्रैल 2026 को संयुक्त अरब अमीरात का दौरा करेंगे, जहाँ वे दोनों देशों के बीच सहयोग की समीक्षा के साथ-साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के बीच बन रही यह व्यापक रणनीतिक साझेदारी न केवल आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस बीच, भारत की अन्य खाड़ी देशों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता भी जारी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 और 10 अप्रैल 2026 को कतर का दौरा कर रहे हैं, जो ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और आपसी हितों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
वहीं, फार्मास्यूटिकल्स विभाग के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश टी. एल. ने दवाओं की कीमतों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया के संकट के कारण फार्मा इनपुट्स की कई वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थीं। फिर भी, दवाओं की कीमतों में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है। 40 विभिन्न पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को घटाकर शून्य कर दिया गया है। एलपीजी और एचएसडी की आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल किसी प्रकार की बाधा नहीं है। सरकार उद्योग के साथ समन्वय में लगातार समस्याओं का समाधान कर रही है ताकि दवा उत्पादन में कोई रुकावट न आए।