26 अक्टूबर 2026
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मैसूरु दशहरा विवाद: राजमाता प्रमोदादेवी की चेतावनी — स्वर्ण हौदा सौंपने पर पुनर्विचार संभव

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मैसूरु दशहरा विवाद: राजमाता प्रमोदादेवी की चेतावनी — स्वर्ण हौदा सौंपने पर पुनर्विचार संभव

सारांश

मैसूरु दशहरा इस बार सिर्फ उत्सव नहीं रहा — राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने पुलिस दुर्व्यवहार और परंपराओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए भविष्य में स्वर्ण हौदा सौंपने पर पुनर्विचार की चेतावनी दे डाली। सरकार सफाई दे रही है, BJP हमलावर है और एक ऐतिहासिक उत्सव की साख दाँव पर है।

मुख्य बातें

राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने 26 अक्टूबर 2026 को मीडिया को पत्र जारी कर मैसूरु दशहरा आयोजन में पुलिस दुर्व्यवहार और परंपराओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
राजमाता ने चेतावनी दी कि शाही परिवार भविष्य में सरकार को स्वर्ण हौदा (अंबारी) सौंपने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है।
अंबारी ले जाने वाले हाथी की जानकारी शाही परिवार से करीब 45 वर्षों तक छिपाई गई — इस बार भी आखिरी समय तक सूचना नहीं दी गई।
प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने कहा कि सरकार अंबारी के लिए भुगतान करती है और शाही परिवार की शिकायतों का समाधान किया जाएगा।
BJP प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.
विजयेंद्र ने CM डीके शिवकुमार पर कर्नाटक की सांस्कृतिक परंपराओं को नजरअंदाज कर प्रचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
राजमाता ने संकेत दिया कि सरकारी कदम परंपराओं में बाधा डालने पर शाही परिवार उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है, हालाँकि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है।

मैसूरु दशहरा उत्सव को लेकर कर्नाटक में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने 26 अक्टूबर 2026 को मीडिया को जारी एक पत्र में आरोप लगाया कि दशहरा आयोजन के दौरान पुलिस ने मनमाना व्यवहार किया और शाही परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में शाही परिवार सरकार को स्वर्ण हौदा (अंबारी — हाथी पर रखी जाने वाली पालकी) सौंपने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है।

राजमाता की मुख्य शिकायतें

राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार के अनुसार, अंबारी ले जाने के लिए चुने गए हाथी की जानकारी शाही परिवार से करीब 45 वर्षों तक छिपाई जाती रही और इस बार भी आखिरी समय तक नहीं बताई गई। उन्हें खुद वन विभाग के उप-संरक्षक (डीसीएफ) से संपर्क करके यह जानकारी हासिल करनी पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि शाही परिवार के नवरात्रि समारोहों में धार्मिक अनुष्ठानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जबकि सरकारी दशहरा समारोहों का पारंपरिक प्रथाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है।

राजमाता ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में चामुंडी रथोत्सव के अवसर पर मैसूर पैलेस से बन्नीमंटप तक अंबारी जुलूस निकालना अधिक उचित होगा। कथित तौर पर उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार के कदम शाही परिवार की परंपराओं में बाधा डालते हैं, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं — हालाँकि अभी तक ऐसा नहीं किया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

शहरी विकास मंत्री एवं मैसूर जिले के प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अंबारी बिना भुगतान के नहीं ली है। उन्होंने कहा, 'जिस अंबारी में चामुंडेश्वरी देवी की मूर्ति रखी जाती है, वह महल की संपत्ति है और हम इसके लिए भुगतान करते हैं। दशहरा का आयोजन सरकार और शाही परिवार के सहयोग से ठीक ढंग से किया जाना चाहिए।'

यतींद्र ने यह भी कहा कि अंबारी ले जाने वाले हाथी के चयन में वन विभाग को खुद निर्णय लेने में समय लगा और विभाग के लिए शाही परिवार को पूर्व सूचना देना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने राजमाता को सीधे सरकार से बात करने के बजाय मीडिया को पत्र जारी करने पर भी सवाल उठाए और कहा कि अधिकारी परिवार के संपर्क में थे।

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने कुछ भी नया नहीं किया है। उनके आहत होने का कोई कारण नहीं है। अगर उन्हें किसी तरह से बुरा लगा है, तो हम उनसे मिलने जाएंगे और स्थिति को ठीक करेंगे।'

भाजपा का हमला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के विरुद्ध एक राजनीतिक अवसर के रूप में भुनाया। BJP के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कर्नाटक की सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के बजाय प्रचार-प्रसार को अधिक प्राथमिकता दी। विजयेंद्र ने विशेष रूप से आपत्ति जताई कि शिवकुमार जंबू सवारी के उद्घाटन और जुलूस में अपनी पत्नी को साथ ले गए, जिसे उन्होंने परंपरा का उल्लंघन बताया।

गौरतलब है कि विजयेंद्र ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई उस भगदड़ का भी उल्लेख किया जिसमें 11 लोगों की मृत्यु हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच प्रचार पाने की होड़ ने इस घटना से जुड़े विवाद को और भड़काया।

आम जनता और परंपरा पर असर

मैसूरु दशहरा कर्नाटक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है और वाडियार राजघराने की भागीदारी इसे धार्मिक और ऐतिहासिक वैधता प्रदान करती है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस सरकार पर पहले से ही सांस्कृतिक प्रबंधन को लेकर आलोचनाएँ हो रही थीं। यदि शाही परिवार भविष्य में स्वर्ण हौदा देने से इनकार करता है, तो यह दशहरा जुलूस की पहचान और उसकी धार्मिक प्रामाणिकता पर सीधा असर डालेगा।

क्या होगा आगे

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि शाही परिवार की सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और अधिकारी परिवार से मुलाकात करेंगे। यतींद्र सिद्दारमैया ने कहा कि विजयादशमी समारोह के दौरान जट्टी कलागा (पारंपरिक कुश्ती) रद्द होने की एक घटना को छोड़कर कोई बड़ी अनियमितता नहीं हुई। आगामी दिनों में सरकार और शाही परिवार के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि अगले वर्ष का दशहरा किस स्वरूप में मनाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्सव की धार्मिक वैधता शाही परिवार की भागीदारी पर टिकी है — यह असंतुलन ही इस टकराव की जड़ है। BJP का हमला भले ही राजनीति से प्रेरित हो, लेकिन राजमाता की शिकायत में एक वास्तविक प्रशासनिक विफलता — 45 वर्षों से जानकारी न देना — स्वीकार करना सरकार के लिए जरूरी है। यदि इस असहमति को बातचीत से नहीं सुलझाया गया, तो अगले वर्ष का दशहरा एक संवैधानिक और सांस्कृतिक पेचीदगी में फँस सकता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूरु दशहरा स्वर्ण हौदा विवाद क्या है?
राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक सरकार ने दशहरा आयोजन में शाही परिवार को उचित सम्मान नहीं दिया — अंबारी ले जाने वाले हाथी की जानकारी आखिरी समय तक नहीं दी गई और पुलिस ने दुर्व्यवहार किया। इसके जवाब में उन्होंने भविष्य में सरकार को स्वर्ण हौदा सौंपने के फैसले पर पुनर्विचार की चेतावनी दी है।
स्वर्ण हौदा (अंबारी) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
स्वर्ण हौदा, जिसे अंबारी भी कहते हैं, हाथी की पीठ पर रखी जाने वाली सोने की पालकी है जिसमें मैसूरु दशहरा के जुलूस में चामुंडेश्वरी देवी की मूर्ति विराजमान होती है। यह वाडियार राजघराने की संपत्ति है और मैसूरु दशहरा की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान का केंद्रबिंदु है। शाही परिवार का इसे न सौंपना उत्सव की प्रामाणिकता को सीधे प्रभावित करेगा।
कर्नाटक सरकार ने राजमाता की शिकायतों पर क्या कहा?
प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने स्पष्ट किया कि सरकार अंबारी के उपयोग के लिए शाही परिवार को भुगतान करती है और शाही परिवार की सभी शिकायतों का समाधान करने के लिए तैयार है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी नया नहीं किया और यदि परिवार आहत हुआ है तो सरकार उनसे मिलने जाएगी।
भाजपा ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
BJP प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने CM डीके शिवकुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने कर्नाटक की सांस्कृतिक परंपराओं की जगह प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता दी। विजयेंद्र ने विशेष रूप से जंबू सवारी में मुख्यमंत्री के पत्नी को साथ ले जाने को परंपरा का उल्लंघन बताया और चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ में 11 मौतों का भी उल्लेख किया।
क्या राजमाता उच्च न्यायालय जा सकती हैं?
राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने कथित तौर पर संकेत दिया है कि यदि सरकार के कदम शाही परिवार की परंपराओं में बाधा डालते रहे, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं। हालाँकि, अभी तक कोई याचिका दायर नहीं की गई है और सरकार ने बातचीत से समाधान का भरोसा दिलाया है।
राष्ट्र प्रेस
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