मैसूरु दशहरा विवाद: राजमाता प्रमोदादेवी की चेतावनी — स्वर्ण हौदा सौंपने पर पुनर्विचार संभव
सारांश
मुख्य बातें
मैसूरु दशहरा उत्सव को लेकर कर्नाटक में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने 26 अक्टूबर 2026 को मीडिया को जारी एक पत्र में आरोप लगाया कि दशहरा आयोजन के दौरान पुलिस ने मनमाना व्यवहार किया और शाही परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में शाही परिवार सरकार को स्वर्ण हौदा (अंबारी — हाथी पर रखी जाने वाली पालकी) सौंपने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है।
राजमाता की मुख्य शिकायतें
राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार के अनुसार, अंबारी ले जाने के लिए चुने गए हाथी की जानकारी शाही परिवार से करीब 45 वर्षों तक छिपाई जाती रही और इस बार भी आखिरी समय तक नहीं बताई गई। उन्हें खुद वन विभाग के उप-संरक्षक (डीसीएफ) से संपर्क करके यह जानकारी हासिल करनी पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि शाही परिवार के नवरात्रि समारोहों में धार्मिक अनुष्ठानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जबकि सरकारी दशहरा समारोहों का पारंपरिक प्रथाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है।
राजमाता ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में चामुंडी रथोत्सव के अवसर पर मैसूर पैलेस से बन्नीमंटप तक अंबारी जुलूस निकालना अधिक उचित होगा। कथित तौर पर उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार के कदम शाही परिवार की परंपराओं में बाधा डालते हैं, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं — हालाँकि अभी तक ऐसा नहीं किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
शहरी विकास मंत्री एवं मैसूर जिले के प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अंबारी बिना भुगतान के नहीं ली है। उन्होंने कहा, 'जिस अंबारी में चामुंडेश्वरी देवी की मूर्ति रखी जाती है, वह महल की संपत्ति है और हम इसके लिए भुगतान करते हैं। दशहरा का आयोजन सरकार और शाही परिवार के सहयोग से ठीक ढंग से किया जाना चाहिए।'
यतींद्र ने यह भी कहा कि अंबारी ले जाने वाले हाथी के चयन में वन विभाग को खुद निर्णय लेने में समय लगा और विभाग के लिए शाही परिवार को पूर्व सूचना देना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने राजमाता को सीधे सरकार से बात करने के बजाय मीडिया को पत्र जारी करने पर भी सवाल उठाए और कहा कि अधिकारी परिवार के संपर्क में थे।
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने कुछ भी नया नहीं किया है। उनके आहत होने का कोई कारण नहीं है। अगर उन्हें किसी तरह से बुरा लगा है, तो हम उनसे मिलने जाएंगे और स्थिति को ठीक करेंगे।'
भाजपा का हमला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के विरुद्ध एक राजनीतिक अवसर के रूप में भुनाया। BJP के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कर्नाटक की सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के बजाय प्रचार-प्रसार को अधिक प्राथमिकता दी। विजयेंद्र ने विशेष रूप से आपत्ति जताई कि शिवकुमार जंबू सवारी के उद्घाटन और जुलूस में अपनी पत्नी को साथ ले गए, जिसे उन्होंने परंपरा का उल्लंघन बताया।
गौरतलब है कि विजयेंद्र ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई उस भगदड़ का भी उल्लेख किया जिसमें 11 लोगों की मृत्यु हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच प्रचार पाने की होड़ ने इस घटना से जुड़े विवाद को और भड़काया।
आम जनता और परंपरा पर असर
मैसूरु दशहरा कर्नाटक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है और वाडियार राजघराने की भागीदारी इसे धार्मिक और ऐतिहासिक वैधता प्रदान करती है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस सरकार पर पहले से ही सांस्कृतिक प्रबंधन को लेकर आलोचनाएँ हो रही थीं। यदि शाही परिवार भविष्य में स्वर्ण हौदा देने से इनकार करता है, तो यह दशहरा जुलूस की पहचान और उसकी धार्मिक प्रामाणिकता पर सीधा असर डालेगा।
क्या होगा आगे
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि शाही परिवार की सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और अधिकारी परिवार से मुलाकात करेंगे। यतींद्र सिद्दारमैया ने कहा कि विजयादशमी समारोह के दौरान जट्टी कलागा (पारंपरिक कुश्ती) रद्द होने की एक घटना को छोड़कर कोई बड़ी अनियमितता नहीं हुई। आगामी दिनों में सरकार और शाही परिवार के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि अगले वर्ष का दशहरा किस स्वरूप में मनाया जाएगा।