24 अक्टूबर 2026
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मैसूरु दशहरा विवाद: यदुवीर वाडियार ने नंदी ध्वज पूजा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल की माँग की

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मैसूरु दशहरा विवाद: यदुवीर वाडियार ने नंदी ध्वज पूजा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल की माँग की

सारांश

मैसूरु दशहरा इस बार सिर्फ उत्सव नहीं, विवाद का केंद्र भी बना — दलित मंत्रियों को नंदी ध्वज पूजा से रोके जाने के बाद राजपरिवार के वंशज यदुवीर वाडियार ने स्पष्ट प्रोटोकॉल की माँग उठाई। उनका सुझाव है: मुख्यमंत्री और दो अधिकारी काफी हैं — अनुष्ठान राजनीति से ऊपर होने चाहिए।

मुख्य बातें

यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने 24 अक्टूबर 2026 को नंदी ध्वज पूजा के लिए स्पष्ट सरकारी प्रोटोकॉल की माँग की।
दशहरा समारोह के दौरान पुलिस ने वरिष्ठ दलित मंत्रियों को कुछ समय के लिए पूजा में शामिल होने से रोका था, जिससे राजनीतिक विवाद भड़का।
यदुवीर के अनुसार अनुष्ठान में केवल मुख्यमंत्री और एक-दो अधिकारियों की उपस्थिति पर्याप्त है; राजपरिवार ने पिछले 12 वर्षों से इन अनुष्ठानों में भाग लिया है।
राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने बताया कि हाथी प्रशांत ने पहली बार स्वर्ण हौदे को जुलूस में वहन किया और पूरी तरह शांत रहा।
पारंपरिक 'जाट्टी कलागा' कार्यक्रम के रद्द होने पर राजमाता स्पष्टीकरण देंगी।

मैसूरु-कोडागु के भाजपा सांसद और मैसूरु राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान नंदी ध्वज पूजा अनुष्ठान में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति पर सवाल उठाया और सरकार से इस अनुष्ठान के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल निर्धारित करने की माँग की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में उस समय राजनीतिक विवाद उठ खड़ा हुआ था जब पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ दलित मंत्रियों को इस पारंपरिक पूजा में शामिल होने से कुछ समय के लिए रोक दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

मैसूरु में पत्रकारों से बात करते हुए यदुवीर ने कहा कि अनुष्ठान के लिए केवल मुख्यमंत्री और एक-दो अधिकारियों की उपस्थिति पर्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी न तो आवश्यक है और न ही परंपरा के अनुरूप।

उन्होंने कहा, 'पहले उन्हें प्रोटोकॉल स्पष्ट करना चाहिए। मुझे ऐसे किसी प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं है। अगर मुख्यमंत्री के साथ दो लोग भी हों तो काफी है। हर कोई वहाँ क्यों जाना चाहता है?'

परंपरा और राजपरिवार की भूमिका

यदुवीर ने बताया कि राजमाता के निर्देश पर वे पिछले 12 वर्षों से मैसूरु राजपरिवार की ओर से इन अनुष्ठानों में भाग लेते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजपरिवार ने कभी भी अपनी उपस्थिति पर विशेष ज़ोर नहीं दिया। उनके अनुसार, पहले के वर्षों में केवल मुख्यमंत्री और एक-दो अधिकारी ही इन अनुष्ठानों में शामिल होते थे।

उन्होंने कहा, 'यह सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम है और सरकार को ही निर्णय लेकर आगे बढ़ना होता है। मेरा मानना है कि कम लोगों का होना बेहतर होगा, क्योंकि अनुष्ठानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उन्हें उचित ढंग से संपन्न किया जाना चाहिए।'

अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी

केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों की दशहरा उत्सव में उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर यदुवीर ने कहा कि उनका निमंत्रण एक सराहनीय कदम था जिससे त्योहार को व्यापक प्रचार मिला। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था तो देवी चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा, 'अगर उन्हें आमंत्रित किया जाए और फिर पुष्प अर्पित करने की अनुमति न दी जाए तो यह कैसे संभव है? इसीलिए मैं स्पष्ट प्रोटोकॉल पर जोर देता हूँ। एक ढाँचा होना बेहतर होगा।'

राजमाता की प्रतिक्रिया और हाथी 'प्रशांत'

इस बीच, राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने बताया कि उन्हें प्रशांत नामक हाथी को लेकर चिंता थी, जिसने इस बार पहली बार देवी चामुंडेश्वरी के स्वर्ण हौदे को मैसूरु दशहरा जुलूस में वहन किया। उन्होंने स्वीकार किया, 'पहले कभी ऐसी कोई चिंता नहीं हुई थी, लेकिन इस बार मुझे थोड़ी फिक्र थी।'

हालाँकि, राजमाता ने राहत जताई कि हाथी ने पूरे जुलूस के दौरान अत्यंत शांत और अनुशासित व्यवहार किया तथा कोई परेशानी उत्पन्न नहीं की। उन्होंने कहा कि हाथी और स्वर्ण हौदा दोनों को बेहद खूबसूरती से सजाया गया था।

आगे की राह

पारंपरिक 'जाट्टी कलागा' कार्यक्रम के रद्द होने के सवाल पर यदुवीर ने कहा कि इस मामले पर उनकी माँ राजमाता स्पष्टीकरण देंगी और उनके बयान के बाद ही आगे की प्रतिक्रिया दी जाएगी। यदुवीर ने यह भी कहा कि वे इन मुद्दों को उचित मंच पर उठाएँगे और सरकार से अपेक्षा है कि वह अगले वर्ष के समारोह से पहले प्रोटोकॉल को स्पष्ट रूप से परिभाषित करे। गौरतलब है कि इस वर्ष के दशहरा समारोह से मिले सबक भविष्य की योजना में सहायक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस अनौपचारिकता की कीमत इस बार दलित मंत्रियों को रोककर चुकानी पड़ी। यदुवीर वाडियार का यह बयान कि 'मुझे ऐसे किसी प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं', खुद बताता है कि राजपरिवार और सरकार के बीच भूमिकाओं की सीमाएँ अब तक अपरिभाषित हैं। मुख्यधारा की कवरेज विवाद को दलित-बनाम-परंपरा के चश्मे से देख रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि एक राजकीय-वित्त पोषित उत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों की पहुँच को बिना किसी पारदर्शी नीति के कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। अगले वर्ष तक यदि सरकार ने लिखित दिशानिर्देश जारी नहीं किए, तो यही विवाद नए रूप में लौटेगा।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूरु दशहरा नंदी ध्वज पूजा विवाद क्या है?
मैसूरु दशहरा 2026 के दौरान पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ दलित मंत्रियों को पारंपरिक नंदी ध्वज पूजा में शामिल होने से कुछ समय के लिए रोक दिया, जिससे कर्नाटक में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया। इस घटना के बाद भाजपा सांसद यदुवीर वाडियार ने स्पष्ट प्रोटोकॉल की माँग उठाई।
यदुवीर वाडियार ने प्रोटोकॉल को लेकर क्या कहा?
यदुवीर वाडियार ने कहा कि नंदी ध्वज पूजा में मुख्यमंत्री और केवल एक-दो अधिकारियों की उपस्थिति पर्याप्त है और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी अनावश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अगले वर्ष के समारोह से पहले प्रोटोकॉल को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
राजपरिवार कब से दशहरा अनुष्ठानों में भाग ले रहा है?
यदुवीर वाडियार के अनुसार वे राजमाता के निर्देश पर पिछले 12 वर्षों से मैसूरु राजपरिवार की ओर से दशहरा अनुष्ठानों में भाग लेते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजपरिवार ने कभी अपनी उपस्थिति पर विशेष जोर नहीं दिया।
हाथी 'प्रशांत' और स्वर्ण हौदे को लेकर राजमाता ने क्या कहा?
राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने बताया कि हाथी प्रशांत ने इस वर्ष पहली बार देवी चामुंडेश्वरी का स्वर्ण हौदा वहन किया और पूरे जुलूस में शांत रहा। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें थोड़ी चिंता थी, लेकिन हाथी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
'जाट्टी कलागा' कार्यक्रम क्यों रद्द हुआ?
'जाट्टी कलागा' के रद्द होने पर यदुवीर वाडियार ने कहा कि इस विषय पर राजमाता स्पष्टीकरण देंगी और उनके बयान के बाद ही आगे की प्रतिक्रिया दी जाएगी। इस कार्यक्रम के रद्द होने का कारण अभी तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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