मैसूरु दशहरा विवाद: यदुवीर वाडियार ने नंदी ध्वज पूजा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
मैसूरु-कोडागु के भाजपा सांसद और मैसूरु राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान नंदी ध्वज पूजा अनुष्ठान में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति पर सवाल उठाया और सरकार से इस अनुष्ठान के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल निर्धारित करने की माँग की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में उस समय राजनीतिक विवाद उठ खड़ा हुआ था जब पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ दलित मंत्रियों को इस पारंपरिक पूजा में शामिल होने से कुछ समय के लिए रोक दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
मैसूरु में पत्रकारों से बात करते हुए यदुवीर ने कहा कि अनुष्ठान के लिए केवल मुख्यमंत्री और एक-दो अधिकारियों की उपस्थिति पर्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी न तो आवश्यक है और न ही परंपरा के अनुरूप।
उन्होंने कहा, 'पहले उन्हें प्रोटोकॉल स्पष्ट करना चाहिए। मुझे ऐसे किसी प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं है। अगर मुख्यमंत्री के साथ दो लोग भी हों तो काफी है। हर कोई वहाँ क्यों जाना चाहता है?'
परंपरा और राजपरिवार की भूमिका
यदुवीर ने बताया कि राजमाता के निर्देश पर वे पिछले 12 वर्षों से मैसूरु राजपरिवार की ओर से इन अनुष्ठानों में भाग लेते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजपरिवार ने कभी भी अपनी उपस्थिति पर विशेष ज़ोर नहीं दिया। उनके अनुसार, पहले के वर्षों में केवल मुख्यमंत्री और एक-दो अधिकारी ही इन अनुष्ठानों में शामिल होते थे।
उन्होंने कहा, 'यह सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम है और सरकार को ही निर्णय लेकर आगे बढ़ना होता है। मेरा मानना है कि कम लोगों का होना बेहतर होगा, क्योंकि अनुष्ठानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उन्हें उचित ढंग से संपन्न किया जाना चाहिए।'
अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी
केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों की दशहरा उत्सव में उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर यदुवीर ने कहा कि उनका निमंत्रण एक सराहनीय कदम था जिससे त्योहार को व्यापक प्रचार मिला। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था तो देवी चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, 'अगर उन्हें आमंत्रित किया जाए और फिर पुष्प अर्पित करने की अनुमति न दी जाए तो यह कैसे संभव है? इसीलिए मैं स्पष्ट प्रोटोकॉल पर जोर देता हूँ। एक ढाँचा होना बेहतर होगा।'
राजमाता की प्रतिक्रिया और हाथी 'प्रशांत'
इस बीच, राजमाता प्रमोदादेवी वाडियार ने बताया कि उन्हें प्रशांत नामक हाथी को लेकर चिंता थी, जिसने इस बार पहली बार देवी चामुंडेश्वरी के स्वर्ण हौदे को मैसूरु दशहरा जुलूस में वहन किया। उन्होंने स्वीकार किया, 'पहले कभी ऐसी कोई चिंता नहीं हुई थी, लेकिन इस बार मुझे थोड़ी फिक्र थी।'
हालाँकि, राजमाता ने राहत जताई कि हाथी ने पूरे जुलूस के दौरान अत्यंत शांत और अनुशासित व्यवहार किया तथा कोई परेशानी उत्पन्न नहीं की। उन्होंने कहा कि हाथी और स्वर्ण हौदा दोनों को बेहद खूबसूरती से सजाया गया था।
आगे की राह
पारंपरिक 'जाट्टी कलागा' कार्यक्रम के रद्द होने के सवाल पर यदुवीर ने कहा कि इस मामले पर उनकी माँ राजमाता स्पष्टीकरण देंगी और उनके बयान के बाद ही आगे की प्रतिक्रिया दी जाएगी। यदुवीर ने यह भी कहा कि वे इन मुद्दों को उचित मंच पर उठाएँगे और सरकार से अपेक्षा है कि वह अगले वर्ष के समारोह से पहले प्रोटोकॉल को स्पष्ट रूप से परिभाषित करे। गौरतलब है कि इस वर्ष के दशहरा समारोह से मिले सबक भविष्य की योजना में सहायक होंगे।