मैसूरु दशहरा विवाद: तीन दलित मंत्रियों को रोकने पर CM शिवकुमार ने जांच के दिए आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 22 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को मैसूरु दशहरा विवाद की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया, जब 21 अक्टूबर को 'जंबू सवारी' जुलूस के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने तीन राज्य मंत्रियों को मैसूर पैलेस परिसर में 'नंदी ध्वज पूजा' स्थल पर प्रवेश करने से रोक दिया। इस घटना ने कर्नाटक की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है, जिसमें जनता दल (सेक्युलर) ने दलित मंत्रियों के 'अपमान' का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को घेरा है।
घटना का घटनाक्रम
दशहरा समारोह की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे पुलिस अधीक्षक (एसपी) सी.बी. ऋष्यंत ने 21 अक्टूबर को मंत्रियों शिवराज तंगदगी, पी.एम. नरेंद्र स्वामी और के.एस. बसवंथप्पा को अनुष्ठान स्थल में प्रवेश नहीं करने दिया। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर मंत्रियों के प्रवेश की व्यवस्था करानी पड़ी।
शिवकुमार ने कहा, "मैंने तुरंत व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और मंत्रियों के प्रवेश की व्यवस्था कराई, लेकिन अधिकारियों का यह मनमाना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसलिए मैंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच करें और रिपोर्ट सौंपें।"
जेडी(एस) का हमला और आरोप
जनता दल (सेक्युलर) — जो केंद्र में एनडीए की सहयोगी है और जिसके प्रदेश अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी हैं — ने इस घटना को 'दलित विरोधी मानसिकता' का प्रमाण बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दलितों को 'केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती है और सत्ता में आने के बाद उन्हें अपमानित करती है।'
जेडी(एस) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा, "कांग्रेस में दलित मंत्रियों के साथ ऐसा ही 'शाही बर्ताव' किया जाता है।" पार्टी ने राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से भी स्पष्टीकरण माँगा और कहा कि उनके विभाग के अधिकारियों ने यह दुर्व्यवहार किया।
अंबेडकर और कांग्रेस पर ऐतिहासिक हमला
जेडी(एस) ने इस अवसर का उपयोग कर डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ कांग्रेस के ऐतिहासिक व्यवहार पर भी निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने डॉ. अंबेडकर को हाशिए पर धकेलने के लिए चार बार चुनावों में उन्हें हराया, और कहा कि लगभग 75 वर्षों बाद भी पार्टी का रवैया नहीं बदला है।
पार्टी ने राज्य मंत्रिमंडल के सभी दलित मंत्रियों से आग्रह किया कि वे इस कथित व्यवहार की खुलकर निंदा करें और चुनौती दी कि यदि उनके आत्म सम्मान को ठेस पहुँची है तो वे इस्तीफा दें।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अधिकारी के व्यवहार को 'उद्दंडतापूर्ण' करार दिया। उन्होंने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को जांच के निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से कई मोर्चों पर विपक्षी दबाव का सामना कर रही है।
राजनीतिक परिदृश्य और आगे की राह
गौरतलब है कि मैसूरु दशहरा कर्नाटक का सबसे बड़ा राज्य उत्सव है, जिसमें देवी चामुंडेश्वरी की शोभायात्रा 'जंबू सवारी' राष्ट्रीय ध्यान खींचती है। ऐसे में इस तरह की घटना का राजनीतिक असर व्यापक है। जेडी(एस) की ओर से यह हमला कर्नाटक में कांग्रेस और एनडीए के बीच दलित राजनीति को लेकर जारी प्रतिस्पर्धा को और तेज करता है। मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि एसपी ऋष्यंत के विरुद्ध क्या कार्रवाई होती है।