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मैसूरु दशहरा: तीन दलित मंत्रियों को रोकने पर BJP का कांग्रेस पर हमला, CM से माफी की मांग

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मैसूरु दशहरा: तीन दलित मंत्रियों को रोकने पर BJP का कांग्रेस पर हमला, CM से माफी की मांग

सारांश

मैसूरु दशहरा में तीन दलित मंत्रियों को नंदी ध्वज पूजा में प्रवेश से रोकने की घटना ने कर्नाटक की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। BJP ने इसे कांग्रेस के 'सामाजिक न्याय' के दावों पर सीधा प्रहार बताया है, जबकि CM शिवकुमार ने जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्य बातें

21 अक्टूबर 2026 को मैसूरु दशहरा जंबू सवारी के दौरान मंत्रियों शिवराज तंगडगी , पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा को नंदी ध्वज पूजा में प्रवेश से कथित तौर पर रोका गया।
तीनों रोके गए मंत्री दलित समुदाय से हैं; BJP ने इसे दलित नेताओं को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश बताया।
अशोक ने CM डीके शिवकुमार से सार्वजनिक माफी की मांग की और पूछा कि पुलिस अधिकारियों को किसके निर्देश थे।
CM शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को घटना की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि ₹2,000 का टिकट खरीदने वाले कई दर्शक भी दशहरा समारोह में प्रवेश नहीं कर सके।

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 22 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला, जब मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान कथित तौर पर तीन दलित मंत्रियों को नंदी ध्वज पूजा में भाग लेने से रोक दिया गया। अशोक ने कहा कि इस घटना ने कांग्रेस सरकार के सामाजिक न्याय संबंधी दावों की असलियत उजागर कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

यह विवादास्पद घटना 21 अक्टूबर को मैसूरु महल परिसर स्थित कोटे अंजनेय स्वामी मंदिर के समीप हुई। जंबू सवारी जुलूस के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिस अधीक्षक (SP) सीबी रिश्यंथ के निर्देश पर मंत्रियों — शिवराज तंगडगी, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा — को कथित तौर पर पूजा स्थल में प्रवेश से रोक दिया गया। उल्लेखनीय है कि तीनों मंत्री दलित समुदाय से आते हैं।

BJP की प्रतिक्रिया

अशोक ने एक बयान में कहा, "अगर पुलिस अधिकारी सरकार में वरिष्ठ पदों पर बैठे मंत्रियों को सार्वजनिक रूप से रोकने की हिम्मत कर रहे हैं, तो इसके पीछे कौन है? क्या ऊपर से कोई गुप्त निर्देश दिए गए थे?" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह महज संयोग था कि रोके गए सभी तीन मंत्री दलित समुदाय से हैं, या फिर यह दलित नेताओं को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश थी।

अशोक ने मुख्यमंत्री से इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि "अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।" साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जांच के नाम पर मामले को दबाने की कोशिश दलित समुदाय और जनता में कड़ी प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकती है।

दशहरा व्यवस्था पर भी निशाना

BJP नेता ने मैसूरु दशहरा की समग्र व्यवस्थाओं को लेकर भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। अशोक ने आरोप लगाया कि ₹2,000 का टिकट खरीदने वाले कई दर्शक भी समारोह में प्रवेश नहीं कर सके। उन्होंने इसे प्रशासनिक अव्यवस्था और लापरवाही का उदाहरण बताते हुए कहा, "दशहरा जनता का उत्सव है, सरकार के प्रचार का मंच नहीं।"

अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आत्म प्रचार और राजनीतिक लाभ में व्यस्त रहते हुए आम नागरिकों की सुविधाओं और सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही है।

मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और जांच के आदेश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना को स्वीकार करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों ने मंत्रियों को रोककर "अहंकारी व्यवहार" किया। उन्होंने बताया, "मैंने तुरंत व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और मंत्रियों के प्रवेश की व्यवस्था कराई। लेकिन अधिकारियों का यह मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।"

शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को घटना की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। हालांकि, BJP का कहना है कि यह जांच जवाबदेही तय करने की बजाय आलोचना से बचने का प्रयास लगती है।

आगे क्या होगा

मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि SP रिश्यंथ ने मंत्रियों को रोकने का फैसला स्वयं लिया था या उन्हें ऊपर से निर्देश मिले थे। यह मामला कर्नाटक की राजनीति में दलित प्रतिनिधित्व और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही के मुद्दे को केंद्र में ला सकता है। आने वाले दिनों में विपक्ष के तेज तेवरों के बीच कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी की सरकार के मंत्रियों के साथ सार्वजनिक रूप से ऐसा व्यवहार — चाहे वह लापरवाही हो या निर्देशित — कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बेहद असहज है। CM शिवकुमार की त्वरित जांच के आदेश क्षति नियंत्रण की कोशिश तो दिखते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय होगी या मामला दबा दिया जाएगा। BJP के लिए यह मुद्दा 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित मतदाताओं को साधने का एक सुलभ अवसर है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूरु दशहरा में दलित मंत्रियों को क्यों रोका गया?
21 अक्टूबर 2026 को मैसूरु महल परिसर में जंबू सवारी जुलूस के दौरान SP सीबी रिश्यंथ के नेतृत्व वाली सुरक्षा टीम ने कथित तौर पर मंत्रियों शिवराज तंगडगी, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा को नंदी ध्वज पूजा स्थल में प्रवेश से रोक दिया। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह अधिकारियों का स्वतंत्र निर्णय था या किसी उच्च स्तर का निर्देश था, जिसकी जांच के आदेश दिए गए हैं।
BJP ने इस घटना को दलित विरोधी क्यों बताया?
BJP नेता आर. अशोक ने इशारा किया कि रोके गए तीनों मंत्री दलित समुदाय से हैं और सवाल उठाया कि क्या यह संयोग है या दलित नेताओं को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश। उन्होंने कांग्रेस के सामाजिक न्याय के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि जिस पार्टी की सरकार में दलित मंत्रियों के साथ ऐसा व्यवहार हो, वह आम दलित नागरिकों की हकदारी की बात कैसे कर सकती है।
CM डीके शिवकुमार ने घटना पर क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना के वक्त स्वयं हस्तक्षेप कर मंत्रियों के प्रवेश की व्यवस्था कराई। इसके बाद उन्होंने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को घटना की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया और अधिकारियों के रवैये को 'अहंकारी' बताया।
क्या दशहरा समारोह में दर्शकों को भी परेशानी हुई?
BJP के अनुसार, ₹2,000 का टिकट खरीदने वाले कई आम दर्शक भी दशहरा समारोह देखने के लिए प्रवेश नहीं कर सके। अशोक ने इसे प्रशासनिक अव्यवस्था और लापरवाही का उदाहरण बताते हुए सरकार को जनता के लिए बेहतर इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा कि SP रिश्यंथ ने स्वतंत्र निर्णय लिया था या उन्हें ऊपर से निर्देश मिले थे। BJP ने संकेत दिया है कि यदि मामले को दबाने की कोशिश हुई तो दलित समुदाय की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है, जो कर्नाटक की राजनीति को और गरमा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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