मैसूरु दशहरा में दलित मंत्रियों के कथित अपमान पर जेडी(एस) का हमला, प्रियंक खड़गे से इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (सेक्युलर) के दलित नेताओं ने 22 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु स्थित जेपी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे से इस्तीफे की माँग की। नेताओं ने आरोप लगाया कि मैसूरु दशहरा और जंबू सवारी समारोह के दौरान तीन दलित मंत्रियों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, और इसकी नैतिक जिम्मेदारी गृह मंत्री पर है।
मुख्य घटनाक्रम
जेडी(एस) के पूर्व विधायकों — के. अन्नादानी, अश्विन कुमार, निसर्ग नारायणस्वामी, श्रीनिवास मूर्ति और अखंडा श्रीनिवास मूर्ति — ने आरोप लगाया कि प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही के चलते पुलिस ने दलित मंत्रियों पीएम नरेंद्र स्वामी, शिवराज तंगडगी और केएस बसवंतप्पा को रोका और उनका अपमान किया।
पूर्व टी. नरसीपुर विधायक अश्विन कुमार ने सवाल उठाया कि जब पुलिस ने मंत्रियों को रोका, उस वक्त मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आगे चल रहे थे — उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई संभवतः शिवकुमार के निर्देश पर हुई।
सरकार पर सीधा निशाना
जेडी(एस) के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक के. अन्नादानी ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को कथित रूप से निशाना बनाकर किए गए स्टिंग ऑपरेशन की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे 'कर्नाटक के लिए कलंक' करार दिया।
अन्नादानी ने सवाल किया कि पुलिस ने संबंधित निजी कन्नड़ चैनल के मालिक के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा — 'शायद सरकार खुद ही इस स्टिंग का शिकार हो गई है, इसलिए गृह मंत्री चुप हैं।'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रियंक खड़गे केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा उठाए गए कर्नाटक लोक सेवा आयोग घोटाले के आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
खड़गे परिवार और दलित प्रतिनिधित्व पर सवाल
अन्नादानी ने एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी निशाना साधा और पूछा कि क्या उन्हें कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित स्टिंग की जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से दलितों को महज वोट बैंक मानती आई है, और डॉ. बीआर आंबेडकर के साथ पार्टी का व्यवहार भी उचित नहीं रहा।
पूर्व देवनहल्ली विधायक निसर्ग नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि खड़गे परिवार दलित पहचान का राजनीतिक लाभ उठाता है, लेकिन अनेकल शिवन्ना और बंगारपेट नारायणस्वामी जैसे नेताओं को मंत्री पद नहीं दिलाया गया।
जेडी(एस) का देवगौड़ा-कुमारस्वामी को श्रेय
अन्नादानी ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और एचडी कुमारस्वामी को गंगा कल्याण योजना तथा जिला व तालुक पंचायतों में आरक्षण जैसी पहलों का श्रेय दिया। उन्होंने दावा किया कि कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री बनने के एक सप्ताह के भीतर एक दलित परिवार के घर में रहकर उनकी समस्याएं समझने का प्रयास किया था।
उन्होंने देवगौड़ा को हासन में एक दलित युवक को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का श्रेय भी दिया, और कहा कि जेडी(एस) ने दलित नेतृत्व को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
आगे क्या होगा
गृह मंत्री प्रियंक खड़गे की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर कई मोर्चों पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है — मुआवजा घोटाले के आरोपों से लेकर स्टिंग ऑपरेशन विवाद तक। जेडी(एस) की यह आक्रामक रणनीति संकेत देती है कि विपक्ष आने वाले दिनों में दलित प्रतिनिधित्व के मुद्दे को और तेज करेगा।