कर्नाटक में दलितों को सुरक्षा नहीं — नारायणस्वामी ने CM शिवकुमार और गृह मंत्री खड़गे से माँगा इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. नारायणस्वामी ने 2 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में आरोप लगाया कि कर्नाटक में दलित समुदाय को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही। उन्होंने माँग की कि यदि राज्य सरकार दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम है, तो मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
मल्लेश्वरम स्थित BJP के प्रदेश कार्यालय जगन्नाथ भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नारायणस्वामी ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में दलितों की हत्या, यौन उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव की घटनाएँ सामने आई हैं, लेकिन सरकार इन मामलों पर मौन बनाए हुए है। उन्होंने कलबुर्गी, रायचूर, लिंगसुगुर, सिरवार और मानवी का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि अगस्त में ऐसी कई घटनाएँ हुईं।
नारायणस्वामी के अनुसार, एक जिले में कुप्रशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले एक मादिगा समुदाय के कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई और उसका शव सड़क पर छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा, 'केवल एफआईआर दर्ज की गई है और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद कोई और गिरफ्तारी नहीं हुई है।'
सरकार की चुप्पी पर सवाल
नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि लिंगसुगुर में एक दलित व्यक्ति को होटल में चाय पीने से रोका गया, जो संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने टी. नरसीपुर में यूट्यूबर मंजुनाथ के खिलाफ एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'राज्य सरकार चुप है। गृह मंत्री ने इन घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया। डीजीपी भी बैठकें नहीं बुला रहे।'
नंजनगुड में महादेवम्मा नामक महिला की कथित हत्या का हवाला देते हुए नारायणस्वामी ने सवाल उठाया कि इस मामले में अभी तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई।
आयोग और जवाबदेही पर निशाना
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने गृह मंत्री से माँग की कि वे बैठक बुलाकर 2023 से 2026 के बीच कर्नाटक में अनुसूचित जाति के सदस्यों के खिलाफ दर्ज अत्याचार के मामलों की समीक्षा करें। उन्होंने कर्नाटक राज्य अनुसूचित जाति आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए, यह आरोप लगाते हुए कि आयोग के अध्यक्ष मूर्ति समुदाय के हितों की रक्षा करने और उनमें विश्वास जगाने में विफल रहे हैं।
वित्तीय संकट और प्रशासनिक खामियाँ
नारायणस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार 98 प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूलों तक को साबुन और टूथपेस्ट जैसी बुनियादी वस्तुएँ नहीं मिल रहीं। शिक्षकों की नियुक्ति और प्रधानाचार्यों के वेतन भुगतान में भी देरी के आरोप उन्होंने लगाए। उन्होंने कहा, 'कई निगम धन की कमी के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।'
गौरतलब है कि नारायणस्वामी ने ठेकेदारों द्वारा लगाए गए उन आरोपों का भी उल्लेख किया, जिनमें कथित तौर पर करीब 70 प्रतिशत विधायकों द्वारा 'प्रतिशत' माँगने की बात कही गई है और ₹35,000 करोड़ के लंबित बकाये का भुगतान न होने पर यह जानकारी सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई है। उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट से इन आरोपों का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया।
आगे की राह
प्रेस कॉन्फ्रेंस में BJP प्रवक्ता एच. वेंकटेश दोड्डेरी और एससी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हूडी मंजुनाथ भी उपस्थित थे। यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब कर्नाटक में विपक्ष सरकार के खिलाफ कई मोर्चों पर दबाव बना रहा है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन आरोपों का आधिकारिक जवाब देती है या नहीं, और क्या अनुसूचित जाति आयोग इन मामलों पर स्वत: संज्ञान लेता है।