जयशंकर की घाना यात्रा: स्वास्थ्य, खनन, रक्षा और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग पर भारत-घाना की बड़ी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 7 अक्टूबर 2026 को अकरा में घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्जेटो अबलाकवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, रक्षा, खनन, रेलवे और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ। इसी दौरान दोनों देशों ने जैव विविधता और कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण पर दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
यात्रा की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले वर्ष की ऐतिहासिक घाना यात्रा के बाद तय की गई पहलों को ज़मीनी रूप देना था। उन्होंने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और ऊँचाई देने के उनके दृष्टिकोण की सराहना की।
जयशंकर ने कहा, 'यहां आने का मेरा मुख्य मकसद, जाहिर है, पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद की गतिविधियों को आगे बढ़ाना था। हमें सहयोग के नए क्षेत्र खोजने होंगे, अपनी पुरानी साझेदारी को और मज़बूत करना होगा।'
हस्ताक्षरित समझौते और नए क्षेत्र
बुधवार को हुए समझौते जैव विविधता संरक्षण और कृषि अनुसंधान व प्रशिक्षण पर केंद्रित हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, खनन, रक्षा, रेलवे और डिजिटल क्षेत्रों में आगे सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। जयशंकर ने बताया कि हाल के महीनों में फार्मास्यूटिकल, मेडिकल, पोल्ट्री और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भारतीय व्यवसायों द्वारा निवेश के बड़े वादे किए गए हैं।
ग्लोबल साउथ की साझा विरासत
विदेश मंत्री ने भारत और घाना को 'ऐतिहासिक साझेदार' और 'ग्लोबल साउथ के चैंपियन' बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने वैश्विक मंच पर उन देशों की आजादी, आत्मनिर्भरता और सम्मान की आवाज़ उठाई है जो कभी उपनिवेश रहे थे। यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि भारत की अफ्रीका नीति में हाल के वर्षों में विशेष तेज़ी आई है — G20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाने में भारत की भूमिका इसका प्रमाण है।
समानांतर पहलों की तुलना
जयशंकर ने दोनों देशों की घरेलू योजनाओं में दिलचस्प समानताएं रेखांकित कीं। घाना की स्वास्थ्य पहल और भारत की आयुष्मान भारत; घाना की 'फीड घाना' खाद्य सुरक्षा योजना और भारत के मिलेट्स व किसान समृद्धि कार्यक्रम; तथा घाना का 10 लाख कोडर तैयार करने का लक्ष्य और भारत का डिजिटल इंडिया व स्टार्ट-अप प्रोग्राम — इन सभी को सहयोग के स्वाभाविक आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया।
भारतीय समुदाय की भूमिका और आगे की राह
विदेश मंत्री ने घाना में सक्रिय भारतीय व्यापारिक समुदाय को दोनों देशों के बीच एक 'जीवंत सेतु' बताया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से न केवल व्यापारिक संबंध मज़बूत होंगे, बल्कि विकास का लाभ आम नागरिकों तक भी पहुँचेगा — 'खासकर ऐसी दुनिया में जो बहुत उथल-पुथल भरी और जटिल है।' दोनों देशों के बीच सहयोग का यह नया अध्याय आने वाले महीनों में ठोस परियोजनाओं के रूप में आकार लेने की उम्मीद है।