जयशंकर ने अबिदजान में कोटे डी आइवर के रक्षा मंत्री ओट्टारा से की मुलाकात, आतंकवाद-रोधी सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 8 अक्टूबर 2026 को अबिदजान में कोटे डी आइवर के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री टेने बिराहिमा ओट्टारा से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और आतंकवाद-रोधी सहयोग को नई ऊँचाई देने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक जयशंकर की घाना यात्रा के ठीक बाद हुई और भारत की पश्चिम अफ्रीका में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का स्पष्ट संकेत है।
रक्षा साझेदारी का विस्तार
जयशंकर ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'कोटे डी आइवर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री टेने बिराहिमा ओट्टारा से मिलकर खुशी हुई। हमने आपसी भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा हितों पर आधारित अपनी बढ़ती रक्षा साझेदारी पर बात की।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा एवं आतंकवाद-रोधी क्षेत्र में प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत संपर्क बढ़ाने के अवसरों पर विचार साझा किए।
विदेश मंत्री काबा से मुलाकात और बहुआयामी चर्चा
इससे पहले जयशंकर ने कोटे डी आइवर की विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री नियाले काबा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, बुनियादी ढाँचे, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और जन-संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत का सहयोग 'लोगों पर केंद्रित' दृष्टिकोण पर आधारित होगा और यह कोटे डी आइवर की स्थानीय जरूरतों एवं प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ेगा।
ITEC कार्यक्रम और क्षमता निर्माण
जयशंकर ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों से भी बातचीत की। ITEC विदेश मंत्रालय का प्रमुख द्विपक्षीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसके तहत एशिया, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका, कैरेबियाई और प्रशांत क्षेत्र के 160 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की जाती है। उन्होंने कोटे डी आइवर के राष्ट्रीय शिक्षा, साक्षरता एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री कोफी एन'गेसन को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया — उल्लेखनीय है कि एन'गेसन स्वयं भी ITEC के पूर्व प्रतिभागी रह चुके हैं।
स्किल डेवलपमेंट पर हफ्ते भर की पहल
गौरतलब है कि इसी सप्ताह पहले कोटे डी आइवर में भारत के राजदूत रमेश बाबू लक्ष्मणन और शिक्षा मंत्री एन'गुएसन कोफी के बीच हुई बैठक में स्किल डेवलपमेंट, वोकेशनल एवं टेक्निकल एजुकेशन, तथा ज्ञान-साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मौकों पर विचार-विमर्श हो चुका था। जयशंकर की यात्रा इस पहल को राजनीतिक-कूटनीतिक बल देती है और दोनों देशों के बीच सहयोग को एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है।
क्या होगा आगे
यह दौरा भारत की 'अफ्रीका नीति' को जमीनी स्तर पर मूर्त रूप देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम अफ्रीका में बढ़ते आतंकी खतरे को देखते हुए भारत-कोटे डी आइवर का रक्षा सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संस्थागत सैन्य संपर्क और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संभावना को बल मिला है।