जयशंकर की घाना यात्रा: भारत-घाना ने 2 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, कृषि, फार्मा, रक्षा में सहयोग बढ़ेगा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 8 अक्टूबर 2026 को अपनी पहली घाना यात्रा के दौरान घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और कहा कि भारत व घाना ग्लोबल साउथ की पुरानी आवाज़ें हैं तथा दोनों देश कृषि, फार्मा, डिजिटल और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को नए स्तर पर ले जाएंगे। इस यात्रा में दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण और जैव विविधता से संबंधित दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले वर्ष की ऐतिहासिक घाना यात्रा के बाद स्थापित व्यापक साझेदारी को ठोस रूप देना है। उन्होंने कहा कि अब जब दोनों देशों ने व्यापक साझेदारी कायम कर ली है, तो सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने और पुरानी साझेदारी को और मज़बूत करना ज़रूरी है।
गौरतलब है कि भारत और घाना के राजनयिक संबंध दशकों पुराने हैं और 'ग्लोबल साउथ' पद के प्रचलित होने से पहले भी दोनों देश उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलन में साझे मूल्यों के आधार पर खड़े रहे हैं।
समान चुनौतियाँ, समान पहलें
जयशंकर ने दोनों देशों के विकास कार्यक्रमों में उल्लेखनीय समानताओं की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि घाना का अकरा रीसेट स्वास्थ्य कार्यक्रम और भारत की आयुष्मान भारत पहल एक जैसे लक्ष्य साधती हैं। इसी तरह घाना का फीड घाना कार्यक्रम और भारत के किसान-कल्याण व मोटे अनाज को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा की एक जैसी चुनौतियों का समाधान करते हैं।
डिजिटल क्षेत्र में घाना का दस लाख कोडर्स तैयार करने का लक्ष्य और भारत के डिजिटल इंडिया तथा स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम भी परस्पर अनुभव साझा करने का मज़बूत आधार प्रदान करते हैं।
व्यापार और निवेश की संभावनाएँ
जयशंकर ने बताया कि घाना में भारतीय समुदाय लंबे समय से सक्रिय है और भारतीय कंपनियाँ वहाँ दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रही हैं। हाल के महीनों में फार्मा एवं मेडिकल सेक्टर, पोल्ट्री सेक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणाएँ हो चुकी हैं।
इसके अलावा दोनों देश खनन, रक्षा, रेलवे और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा बनाने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
अफ्रीकी संघ और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि घाना अफ्रीकी संघ में ऐतिहासिक भूमिका निभाता आया है और वह अगले वर्ष अफ्रीकी संघ की अध्यक्षता संभालने वाला है। जयशंकर ने ECOWAS में घाना की अहम भूमिका को भी महत्व दिया और कहा कि कॉमनवेल्थ की आने वाली बैठक में दोनों देश कई साझे मुद्दों पर मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं।
रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश
जयशंकर ने वैश्विक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और भारत व घाना जैसे देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे रणनीतिक स्वायत्तता का समर्थन करें तथा अपने फैसले स्वयं लेने की परंपरा को बनाए रखें। उनके अनुसार, आज की उथल-पुथल भरी दुनिया में यह साझेदारी दोनों देशों, क्षेत्र और समूची दुनिया के हित में है।
दोनों विदेश मंत्रियों के बीच इस वार्ता के साथ भारत-घाना संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है, जिसके आगे के परिणाम आने वाले महीनों में क्षेत्रवार सहयोग समझौतों के रूप में सामने आने की उम्मीद है।