23 सितंबर 2026
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ट्रंप, फ्रेडरिकसेन और निल्सन ने ग्रीनलैंड रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, 1951 का करार हुआ अपडेट

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ट्रंप, फ्रेडरिकसेन और निल्सन ने ग्रीनलैंड रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, 1951 का करार हुआ अपडेट

सारांश

सात दशक पुराने रक्षा करार को नया रूप मिला — ट्रंप, फ्रेडरिकसेन और निल्सन ने संयुक्त राष्ट्र में ग्रीनलैंड के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर दस्तखत किए। आर्कटिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह पश्चिमी गठबंधन का एक सुनियोजित कदम है, जो ग्रीनलैंड की स्वायत्तता को मान्यता देते हुए नाटो को मजबूत करता है।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप , मेटे फ्रेडरिकसेन और जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में नए ग्रीनलैंड रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता 1951 के अमेरिका-डेनमार्क रक्षा करार और 2004 के संशोधन की जगह लेता है।
समझौते में ग्रीनलैंड के आत्म-निर्णय के अधिकार और डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता दी गई है।
फ्रेडरिकसेन ने कहा कि यह करार विरोधी ताकतों को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोकेगा और नाटो को मजबूत करेगा।
ट्रंप ने पत्रकार के उस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या ग्रीनलैंड पर अमेरिकी मालिकाने का दावा खत्म हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो 1951 के पुराने द्विपक्षीय करार को आधुनिक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप अपडेट करता है। इस त्रिपक्षीय समझौते का उद्देश्य रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाई देना है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब आर्कटिक में रूस और चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी पश्चिमी देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

समझौते की मुख्य बातें

राष्ट्रपति ट्रंप ने हस्ताक्षर समारोह में कहा, 'हमारे रिश्ते बहुत शानदार और सुरक्षित होंगे, और हम इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता 'यूरोप, अमेरिका और सभी के लिए बहुत बढ़िया' होगा और ग्रीनलैंड के लिए 'अद्भुत' साबित होगा। ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस पर लंबे समय से काम चल रहा था और पहले यह संभव नहीं हो पाया था।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री निल्सन ने कहा कि इस समझौते से 1951 का रक्षा करार '2026 के दौर' के अनुरूप अपडेट हो गया है। उन्होंने इसे 'तीनों पक्षों के लिए फायदेमंद' बताया, जो साझा जिम्मेदारी, आपसी सम्मान और आर्कटिक में शांति बनाए रखने के लक्ष्य पर आधारित है।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड की अहमियत

डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन ने इस समझौते को अमेरिका के साथ डेनमार्क के दशकों पुराने सहयोग में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, '75 साल पहले, हमने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर एक समझौता किया था। आज, हम उससे भी बड़ा और बेहतर समझौता कर रहे हैं, एक ऐसा समझौता जो हमेशा कायम रहेगा।'

फ्रेडरिकसेन ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते का एक प्रमुख उद्देश्य विरोधी ताकतों को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोकना है। उनके शब्दों में, 'हम यह पक्का कर रहे हैं कि उन्हें ग्रीनलैंड पर कोई नियंत्रण या बड़ा असर डालने की इजाजत न मिले।' उन्होंने इसे नाटो (NATO) को मजबूत करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा भी बताया।

ग्रीनलैंड की स्वायत्तता और अधिकार

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री निल्सन ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता ग्रीनलैंड के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा, 'ग्रीनलैंड के लिए, यह सिर्फ हमारे बारे में समझौता नहीं है, बल्कि यह हमारे साथ किया गया समझौता है।' समझौते में डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के आत्म-निर्णय के अधिकार का सम्मान किए जाने की बात भी शामिल है।

निल्सन ने याद दिलाया कि द्वितीय विश्व युद्ध और शीत युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड ने सुरक्षा के लिहाज से अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से 'आज और भविष्य में ग्रीनलैंड की वफादारी को लेकर कोई शक नहीं रह जाना चाहिए।'

ट्रंप का ग्रीनलैंड-स्वामित्व वाले सवाल पर रुख

समारोह के दौरान एक पत्रकार ने ट्रंप से सीधे पूछा कि क्या ग्रीनलैंड पर अमेरिका के मालिकाना हक की बात अब खत्म हो गई है — लेकिन ट्रंप ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। जब उनसे ग्रीनलैंड के लोगों के लिए संदेश माँगा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझे ग्रीनलैंड के लोग बहुत पसंद हैं।' यह टिप्पणी इस सवाल को अनुत्तरित छोड़ती है, जो कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रहेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि वॉशिंगटन और कोपेनहेगन के बीच 1951 में हुए मूल रक्षा समझौते ने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का कानूनी आधार तैयार किया था। 2004 में तीनों पक्षों के बीच हुए एक संशोधन समझौते के जरिए इसमें पहली बार बदलाव किए गए थे। अब 2026 का यह नया समझौता उस श्रृंखला की तीसरी और अब तक की सबसे व्यापक कड़ी है। आने वाले महीनों में तीनों देशों की संसदों में इसकी पुष्टि की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह व्यवहार में कितना ठोस साबित होता है। अगर भविष्य में अमेरिकी सैन्य विस्तार ग्रीनलैंडिक जनता की सहमति के बिना होता है, तो यह समझौता भी एक कागजी वादे से ज्यादा कुछ नहीं रहेगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीनलैंड रक्षा समझौता 2026 क्या है?
यह अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच 23 सितंबर 2026 को हस्ताक्षरित एक त्रिपक्षीय रक्षा करार है, जो 1951 के पुराने समझौते को आधुनिक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट करता है। इसका उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना और विरोधी ताकतों को ग्रीनलैंड में प्रभाव बढ़ाने से रोकना है।
1951 के पुराने समझौते से यह करार कैसे अलग है?
1951 का मूल समझौता केवल अमेरिका और डेनमार्क के बीच था, जिसने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का आधार बनाया था। 2026 का नया समझौता त्रिपक्षीय है — इसमें ग्रीनलैंड को एक स्वतंत्र पक्ष के रूप में शामिल किया गया है और उसके आत्म-निर्णय के अधिकार को मान्यता दी गई है।
क्या ट्रंप का ग्रीनलैंड पर स्वामित्व का दावा अब खत्म हो गया है?
इस पर ट्रंप ने समारोह में पूछे गए सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल यह कहा कि 'मुझे ग्रीनलैंड के लोग बहुत पसंद हैं।' इसलिए यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस समझौते में ग्रीनलैंड को क्या मिला?
ग्रीनलैंड को इस समझौते में एक स्वतंत्र और बराबर के पक्षकार के रूप में शामिल किया गया है। निल्सन के अनुसार, इसमें ग्रीनलैंड के लोगों के अधिकारों, आजीविका और देश के विकास का ध्यान रखा गया है, तथा यह सुनिश्चित किया गया है कि उनके क्षेत्र और लोगों पर प्रभाव डालने वाले फैसलों में ग्रीनलैंड सीधे तौर पर शामिल होगा।
इस समझौते का नाटो और आर्कटिक सुरक्षा पर क्या असर होगा?
फ्रेडरिकसेन ने इसे भू-राजनीतिक तनाव के दौर में नाटो को मजबूत करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा बताया है। समझौते का लक्ष्य आर्कटिक में पश्चिमी सहयोगी देशों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और रूस व चीन जैसी विरोधी शक्तियों को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोकना है।
राष्ट्र प्रेस
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