19 सितंबर 2026
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ग्रीनलैंड पर अमेरिका का 'अनंत काल' सुरक्षा समझौता: ट्रंप बोले — स्थायी नियंत्रण मिला, चीन-रूस की एंट्री बंद

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ग्रीनलैंड पर अमेरिका का 'अनंत काल' सुरक्षा समझौता: ट्रंप बोले — स्थायी नियंत्रण मिला, चीन-रूस की एंट्री बंद

सारांश

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर वह काम किया जो उनके मुताबिक 100 वर्षों में कोई राष्ट्रपति नहीं कर पाया — एक 'अनंत काल' का समझौता, जो अमेरिका को स्थायी सैन्य पहुंच देता है, चीन-रूस को बाहर रखता है और ग्रीनलैंड के स्वतंत्र होने पर भी लागू रहेगा। आर्कटिक की भू-राजनीति में यह एक निर्णायक मोड़ है।

मुख्य बातें

अमेरिका , डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच 19 सितंबर 2026 को सुरक्षा समझौता संपन्न।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'अनंत काल' का समझौता बताया — कोई समय-सीमा नहीं।
अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी सैन्य पहुंच , सैन्य अड्डे और हवाई उड़ान अधिकार मिले।
चीन और रूस को सैन्य अड्डे, सेना तैनाती और संवेदनशील निवेश से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया।
समझौता ग्रीनलैंड के भविष्य में स्वतंत्र होने की स्थिति में भी लागू रहेगा।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा हितों की स्थायी गारंटी बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर 2026 को घोषणा की कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक ऐतिहासिक सुरक्षा समझौता संपन्न हुआ है, जो वाशिंगटन को आर्कटिक द्वीप की सुरक्षा पर स्थायी नियंत्रण प्रदान करता है और अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का मार्ग खोलता है। ट्रंप ने इस समझौते को 'अनंत काल' यानी असीमित अवधि वाला बताया — जिसकी कोई समय-सीमा नहीं होगी।

समझौते में क्या शामिल है

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस समझौते में स्थायी पहुंच, सैन्य अड्डे स्थापित करने और हवाई उड़ान के अधिकार शामिल हैं। समझौते के तहत अमेरिकी सेना को आवश्यकतानुसार ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डों की संख्या बढ़ाने की अनुमति मिलेगी।

अधिकारी के अनुसार, चीन और रूस सहित नाटो से बाहर के देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डे स्थापित करने या सेना भेजने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा शत्रु देशों को संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे किसी भी निवेश से रोका जाएगा जो अमेरिका के लिए खतरा बन सकता हो — केवल अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ही संवेदनशील निवेश की अनुमति होगी।

ट्रंप की 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट — मुख्य बातें

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण मिल गया है, जिससे अमेरिका की सभी चिंताएं पूरी तरह से दूर हो गई हैं। इसके लिए अमेरिका को कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि 100 से अधिक वर्षों से राष्ट्रपति ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व को जानते रहे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा सका। ट्रंप ने इसे 'अमेरिका के लिए एक सपना सच होने जैसा' बताया। उन्होंने घोषणा की कि ग्रीनलैंड के उपयुक्त हिस्सों में तत्काल बड़ी सैन्य उपस्थिति स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

विदेश मंत्री रुबियो की प्रतिक्रिया

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा हितों की स्थायी गारंटी बताया। रुबियो ने कहा, 'ग्रीनलैंड हमेशा के लिए उत्तरी अमेरिका के रणनीतिक रक्षा क्षेत्र का हिस्सा रहेगा और किसी भी शत्रु को इससे और आसपास के क्षेत्र से बाहर रखेगा। यह समझौता ग्रीनलैंड में हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का स्थायी और पूर्ण रूप से समाधान है।'

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ग्रीनलैंड के साथ अमेरिकी सेना के संबंध कई दशक पुराने हैं। वाशिंगटन और कोपेनहेगन ने 1951 में एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और 2004 में इगालिकु में हुए एक समझौते ने उस ढाँचे में संशोधन व विस्तार किया। ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना का पिटुफिक स्पेस बेस पहले से स्थापित है, जिसके रडार ऑपरेशन मिसाइल चेतावनी, मिसाइल रक्षा और अंतरिक्ष निगरानी में सहायक हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती सक्रियता पश्चिमी देशों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बनी हुई है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता इस सप्ताह हुआ और ग्रीनलैंड के किसी भी संभावित स्वतंत्र दर्जे की स्थिति में भी लागू रहेगा।

आगे क्या होगा

समझौते के अनुसार ट्रंप ने घोषणा की कि विकास और निर्माण में ग्रीनलैंड के लोगों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। समझौते की शर्तें अमेरिका, डेनमार्क, ग्रीनलैंड और उनके सहयोगी देशों के पारस्परिक हित में बताई गई हैं। अब यह देखना होगा कि ग्रीनलैंड की स्वायत्त सरकार और डेनमार्क की संसद इस समझौते पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक रूप से अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस दशकों से वहाँ मौजूद है — असली बदलाव यह है कि अब इसे ग्रीनलैंड की किसी भी भावी राजनीतिक स्थिति से ऊपर रखा जा रहा है। यह समझौता ग्रीनलैंड की स्वायत्तता की राजनीति और वहाँ की जनता की स्वाधीनता की आकांक्षाओं के साथ टकराव का बीज भी बो सकता है — क्योंकि डेनमार्क की सहमति और ग्रीनलैंड की स्वायत्त सरकार की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। आर्कटिक में चीन और रूस की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए यह कदम नाटो के भीतर भी नई बहस छेड़ेगा कि क्या द्विपक्षीय सुरक्षा व्यवस्थाएं सामूहिक रक्षा ढाँचे को कमज़ोर करती हैं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड सुरक्षा समझौता क्या है?
यह 19 सितंबर 2026 को संपन्न एक रक्षा समझौता है जो अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी सैन्य पहुंच, सैन्य अड्डे स्थापित करने और हवाई उड़ान के अधिकार प्रदान करता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'अनंत काल' का समझौता बताया — यानी इसकी कोई समय-सीमा नहीं है।
इस समझौते में चीन और रूस पर क्या प्रतिबंध लगे हैं?
समझौते के तहत चीन और रूस सहित नाटो से बाहर के देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डे स्थापित करने, सेना तैनात करने और संवेदनशील निवेश करने से स्पष्ट रूप से रोका गया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी के अनुसार, केवल अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश की अनुमति होगी।
क्या ग्रीनलैंड के स्वतंत्र होने पर भी यह समझौता लागू रहेगा?
हाँ। विदेश विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि यदि ग्रीनलैंड भविष्य में पूरी तरह स्वतंत्र भी हो जाता है, तब भी इस समझौते की शर्तें लागू रहेंगी। यह व्यवस्था इसे किसी भी भावी राजनीतिक बदलाव से परे रखती है।
ग्रीनलैंड के साथ अमेरिका के पुराने रक्षा संबंध कैसे रहे हैं?
अमेरिका और डेनमार्क ने 1951 में पहला रक्षा समझौता किया था और 2004 में इगालिकु समझौते ने उस ढाँचे को अद्यतन किया। ग्रीनलैंड में अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस पहले से मौजूद है, जो मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते पर क्या कहा?
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा हितों की स्थायी गारंटी बताया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड हमेशा के लिए उत्तरी अमेरिका के रणनीतिक रक्षा क्षेत्र का हिस्सा रहेगा और कोई भी शत्रु इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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