19 सितंबर 2026
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यूएन महासचिव गुटेरेस ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा न देने पर जताया खेद, अब्बास करेंगे वर्चुअल संबोधन

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यूएन महासचिव गुटेरेस ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा न देने पर जताया खेद, अब्बास करेंगे वर्चुअल संबोधन

सारांश

अमेरिका ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को UNGA के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया, जिस पर यूएन प्रमुख गुटेरेस ने खेद जताया और 1947 के मुख्यालय समझौते का हवाला दिया। महासभा ने 152-3 के भारी बहुमत से अब्बास को वर्चुअल संबोधन की मंज़ूरी दी — लगातार दूसरे वर्ष।

मुख्य बातें

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 19 सितंबर 2026 को फिलिस्तीनी अधिकारियों को अमेरिकी वीजा न दिए जाने पर गहरी नाराज़गी जताई।
महासभा ने 152-3 के बहुमत से राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वर्चुअल माध्यम से UNGA जनरल डिबेट में भाग लेने की अनुमति दी।
केवल अमेरिका, इज़रायल और पैराग्वे ने प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया; 4 देश अनुपस्थित रहे।
यह लगातार दूसरा वर्ष है जब अब्बास वीजा न मिलने के कारण व्यक्तिगत रूप से UNGA में भाग नहीं ले सकेंगे।
भारत ने अब्बास की वर्चुअल भागीदारी के पक्ष में मतदान किया।
अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन को वीजा दिया — जबकि दोनों देश कथित सैन्य संघर्ष में हैं, जो एक उल्लेखनीय विरोधाभास है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 19 सितंबर 2026 को फिलिस्तीनी अधिकारियों को अमेरिकी वीजा न दिए जाने पर गहरी नाराज़गी जताई है। इस प्रतिबंध के चलते फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकेंगे — लगातार दूसरे वर्ष यही स्थिति बनी है।

गुटेरेस का बयान और मुख्यालय समझौते की दुहाई

गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'महासचिव को अमेरिका की उस घोषणा पर गहरा अफसोस है जिसमें उन प्रतिबंधों को बढ़ाया गया है, जिनके तहत फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के सदस्यों और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होने के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा।' गुटेरेस ने मेजबान देश अमेरिका से आग्रह किया है कि वह 1947 के यूएन-यूएस मुख्यालय समझौते के तहत अपनी बाध्यताओं का सम्मान करते हुए सभी प्रतिनिधिमंडलों को वीजा जारी करे। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि गुटेरेस इस विषय पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ संवाद जारी रखेंगे।

महासभा ने वर्चुअल भागीदारी को दी मंज़ूरी

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति महमूद अब्बास को इस वर्ष की आम चर्चा (जनरल डिबेट) में वर्चुअल माध्यम से भाग लेने की अनुमति दे दी। यह प्रस्ताव अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया, जिसमें अब्बास सहित फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से इनकार किया गया था। यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ — इसे 152 देशों का समर्थन मिला, जबकि केवल अमेरिका, इज़रायल और पैराग्वे ने विरोध में मतदान किया और चार अन्य देश मतदान से अनुपस्थित रहे।

भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में दिया वोट

भारत ने अब्बास को वीडियो लिंक के ज़रिए उच्च स्तरीय बैठक संबोधित करने की अनुमति देने वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। यह भारत की उस नीति के अनुरूप है जो फिलिस्तीनी अधिकारों और बहुपक्षीय मंचों में समान भागीदारी का समर्थन करती रही है। गौरतलब है कि अब्बास ने पिछले वर्ष भी वीजा न मिलने के बाद वर्चुअल माध्यम से ही UNGA को संबोधित किया था।

अमेरिका का रुख और ईरान वाला विरोधाभास

अमेरिका ने अपने निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा है कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी की नीतियाँ अभी भी आतंकवाद के अनुकूल हैं। अमेरिका की उप स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा, 'हम अपनी इस माँग पर अड़े रहेंगे कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी और PLO पूरी तरह से और बिना किसी शर्त के आतंकवाद को छोड़ दें। उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।' हालाँकि, इस निर्णय के साथ एक उल्लेखनीय विरोधाभास भी सामने आया है: अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को उच्च स्तरीय सत्र में भाग लेने हेतु वीजा दिया है — जबकि ईरान के साथ अमेरिका कथित तौर पर कई महीनों से सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है।

क्या होगा आगे

महासभा के प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति अब्बास इस वर्ष की जनरल डिबेट में वीडियो के माध्यम से अपना वक्तव्य देंगे। गुटेरेस के प्रवक्ता के अनुसार, महासचिव इस विषय पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ कूटनीतिक संवाद जारी रखेंगे। यह घटनाक्रम वैश्विक बहुपक्षवाद और मेजबान देश की दायित्व-बाध्यताओं पर नई बहस छेड़ने वाला साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे राजनीतिक मतभेद कितने भी गहरे हों। ईरान को वीजा देना — जिसके साथ अमेरिका कथित सैन्य संघर्ष में है — और फिलिस्तीन को न देना, अमेरिकी नीति में एक स्पष्ट विरोधाभास उजागर करता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर दरकिनार कर देती है। 152 देशों का साथ आना यह दर्शाता है कि वैश्विक दक्षिण और पश्चिमी सहयोगी दोनों इस निर्णय को सही नहीं मानते। भारत का 'हाँ' में मतदान भी संकेत देता है कि नई दिल्ली फिलिस्तीन प्रश्न पर बहुपक्षीय मंचों में अपनी पारंपरिक स्थिति से पीछे नहीं हटी है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन महासचिव गुटेरेस ने अमेरिका के फिलिस्तीनी वीजा इनकार पर क्या कहा?
गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव को अमेरिका की उस घोषणा पर गहरा अफसोस है जिसमें PLO सदस्यों और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अधिकारियों को UNGA बैठकों के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा। गुटेरेस ने अमेरिका से 1947 के मुख्यालय समझौते के तहत अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का आग्रह किया है।
महमूद अब्बास UNGA 2026 में क्यों नहीं जा सकते?
अमेरिकी विदेश विभाग ने फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अधिकारियों को न्यूयॉर्क आने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने अभी तक आतंकवाद को पूरी तरह नहीं छोड़ा है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब अब्बास इसी कारण व्यक्तिगत रूप से UNGA में भाग नहीं ले सकेंगे।
UNGA प्रस्ताव में कितने देशों ने अब्बास के वर्चुअल संबोधन के पक्ष में वोट दिया?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह प्रस्ताव 152 के पक्ष, 3 के विरोध में पारित किया। केवल अमेरिका, इज़रायल और पैराग्वे ने विरोध में मतदान किया, जबकि 4 देश अनुपस्थित रहे। भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।
1947 का यूएन-यूएस मुख्यालय समझौता क्या है और यह इस मामले में क्यों प्रासंगिक है?
1947 में हस्ताक्षरित यह समझौता मेजबान देश अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधिमंडलों को वीजा जारी करने का दायित्व देता है। गुटेरेस ने इसी समझौते का हवाला देते हुए अमेरिका से फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने का आग्रह किया है।
अमेरिका ने ईरान को वीजा क्यों दिया जबकि फिलिस्तीनी अधिकारियों को नहीं?
अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को UNGA उच्च स्तरीय सत्र के लिए वीजा दिया है, जबकि दोनों देश कथित तौर पर कई महीनों से सैन्य संघर्ष में हैं। अमेरिका ने इस विरोधाभास पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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