यूएन महासचिव गुटेरेस ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा न देने पर जताया खेद, अब्बास करेंगे वर्चुअल संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 19 सितंबर 2026 को फिलिस्तीनी अधिकारियों को अमेरिकी वीजा न दिए जाने पर गहरी नाराज़गी जताई है। इस प्रतिबंध के चलते फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकेंगे — लगातार दूसरे वर्ष यही स्थिति बनी है।
गुटेरेस का बयान और मुख्यालय समझौते की दुहाई
गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'महासचिव को अमेरिका की उस घोषणा पर गहरा अफसोस है जिसमें उन प्रतिबंधों को बढ़ाया गया है, जिनके तहत फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के सदस्यों और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होने के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा।' गुटेरेस ने मेजबान देश अमेरिका से आग्रह किया है कि वह 1947 के यूएन-यूएस मुख्यालय समझौते के तहत अपनी बाध्यताओं का सम्मान करते हुए सभी प्रतिनिधिमंडलों को वीजा जारी करे। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि गुटेरेस इस विषय पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ संवाद जारी रखेंगे।
महासभा ने वर्चुअल भागीदारी को दी मंज़ूरी
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति महमूद अब्बास को इस वर्ष की आम चर्चा (जनरल डिबेट) में वर्चुअल माध्यम से भाग लेने की अनुमति दे दी। यह प्रस्ताव अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया, जिसमें अब्बास सहित फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से इनकार किया गया था। यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ — इसे 152 देशों का समर्थन मिला, जबकि केवल अमेरिका, इज़रायल और पैराग्वे ने विरोध में मतदान किया और चार अन्य देश मतदान से अनुपस्थित रहे।
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में दिया वोट
भारत ने अब्बास को वीडियो लिंक के ज़रिए उच्च स्तरीय बैठक संबोधित करने की अनुमति देने वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। यह भारत की उस नीति के अनुरूप है जो फिलिस्तीनी अधिकारों और बहुपक्षीय मंचों में समान भागीदारी का समर्थन करती रही है। गौरतलब है कि अब्बास ने पिछले वर्ष भी वीजा न मिलने के बाद वर्चुअल माध्यम से ही UNGA को संबोधित किया था।
अमेरिका का रुख और ईरान वाला विरोधाभास
अमेरिका ने अपने निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा है कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी की नीतियाँ अभी भी आतंकवाद के अनुकूल हैं। अमेरिका की उप स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा, 'हम अपनी इस माँग पर अड़े रहेंगे कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी और PLO पूरी तरह से और बिना किसी शर्त के आतंकवाद को छोड़ दें। उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।' हालाँकि, इस निर्णय के साथ एक उल्लेखनीय विरोधाभास भी सामने आया है: अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को उच्च स्तरीय सत्र में भाग लेने हेतु वीजा दिया है — जबकि ईरान के साथ अमेरिका कथित तौर पर कई महीनों से सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है।
क्या होगा आगे
महासभा के प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति अब्बास इस वर्ष की जनरल डिबेट में वीडियो के माध्यम से अपना वक्तव्य देंगे। गुटेरेस के प्रवक्ता के अनुसार, महासचिव इस विषय पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ कूटनीतिक संवाद जारी रखेंगे। यह घटनाक्रम वैश्विक बहुपक्षवाद और मेजबान देश की दायित्व-बाध्यताओं पर नई बहस छेड़ने वाला साबित हो सकता है।