महमूद अब्बास को फिर अमेरिकी वीजा से इनकार, UNGA में वीडियो संबोधन के प्रस्ताव को 152 वोट मिले
सारांश
मुख्य बातें
फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका ने एक बार फिर वीजा देने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 18 सितंबर 2026 को भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत अब्बास अगले सप्ताह होने वाली उच्च स्तरीय बैठक को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित कर सकेंगे। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
प्रस्ताव के समर्थन में 152 देशों ने वोट दिए, जबकि केवल अमेरिका, इजरायल और पैराग्वे ने इसके विरोध में मतदान किया। चार देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी। उल्लेखनीय है कि सभी पश्चिमी देशों ने भी इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।
लगातार दूसरे वर्ष वीजा से इनकार
यह लगातार दूसरा अवसर है जब महमूद अब्बास को न्यूयॉर्क आने के लिए अमेरिकी वीजा नहीं मिला। पिछले वर्ष भी वीजा नहीं मिलने के बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को वीडियो के जरिए संबोधित किया था। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि अमेरिका-फिलिस्तीन तनाव केवल द्विपक्षीय मसला नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियागत निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहा है।
अमेरिका का बचाव और आरोप
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की उप-स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने वीजा न देने के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) ने अब तक आतंकवाद को पूर्णतः और बिना शर्त नहीं छोड़ा है। उन्होंने कहा, 'हम इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ आतंकवाद को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के छोड़ें।'
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उसी उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए वीजा दिया है — यह ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है।
फिलिस्तीन का पक्ष
संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने कहा कि फिलिस्तीन इजरायल सहित दोनों देशों के 'शांति और सुरक्षा' के साथ रहने के अधिकार को मान्यता देता है। उन्होंने कहा, 'हमें वीजा नहीं दिया गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र के सामने सबसे बड़े मुद्दों में से एक — यानी फिलिस्तीनी लोग और उनका नेतृत्व — यहां मौजूद नहीं हैं।'
मंसूर ने दोहराया कि फिलिस्तीनी तब तक अपनी बात रखते रहेंगे जब तक कथित तौर पर इजरायल का गैरकानूनी कब्जा समाप्त नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय सहमति के अनुरूप दो-देश समाधान लागू नहीं होता — 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
चीन और रूस ने वीजा इनकार के लिए अमेरिका की आलोचना की और तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के तहत मेजबान देश के रूप में अमेरिका की बाध्यता थी कि वह अब्बास को वीजा प्रदान करता। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने भी अमेरिका से अब्बास को अनुमति देने की अपील की थी।
गौरतलब है कि फिलिस्तीन को अभी तक एक स्वतंत्र देश के रूप में पूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है और संयुक्त राष्ट्र में उसे केवल पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) का दर्जा प्राप्त है।
आगे क्या होगा
अब्बास अगले सप्ताह वीडियो संबोधन के ज़रिए UNGA की उच्च स्तरीय बैठक में अपना पक्ष रखेंगे। यह प्रकरण वैश्विक राजनय में अमेरिका की भूमिका और संयुक्त राष्ट्र की स्वायत्तता पर बहस को और तीव्र कर सकता है।