PM मोदी की अध्यक्षता में सचिवों की दूसरी उच्चस्तरीय बैठक, 'विकसित भारत' लक्ष्यों पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जुलाई 2026 को अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली में भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों तथा विभागों के भविष्य के कार्य-एजेंडे की गहन समीक्षा की गई। बैठक का केंद्रीय उद्देश्य 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में कार्यान्वयन की गति को तेज़ करना था।
टीम निर्माण और साइलो तोड़ने पर ज़ोर
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों और विभागों के बीच अंतर-विभागीय समन्वय को मज़बूत करने का आह्वान किया। उन्होंने सरकारी तंत्र में व्याप्त 'हॉरिज़ॉन्टल' और 'वर्टिकल' साइलो — यानी विभागों के अलग-थलग कामकाज — को समाप्त करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनका तर्क था कि बेहतर तालमेल से ही एकीकृत और प्रभावशाली नीतिगत परिणाम संभव हैं।
नागरिक-केंद्रित शासन और स्वदेशी तकनीक
नागरिक-केंद्रित शासन को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत के आम नागरिक हर नीति और निर्णय के केंद्र में होने चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुनियादी ढाँचे में भारी निवेश के साथ-साथ स्वदेशी तकनीकों के विकास को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमता निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।
ऊर्जा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर विशेष चर्चा
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिक कल्याण से सीधे जोड़ा गया। प्रधानमंत्री ने नवाचार, विविधीकरण और त्वरित क्षमता निर्माण के ज़रिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का आग्रह किया। साइबर सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्कता ज़रूरी है और युवा इनोवेटर्स एवं उद्यमियों की साइबर सिक्योरिटी इकोसिस्टम में अधिक भागीदारी को एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए।
सुधार, कौशल विकास और भविष्योन्मुखी सरकार
मोदी ने स्पष्ट किया कि सुधार महज़ एक चर्चित शब्द नहीं, बल्कि प्रभावी शासन की निरंतर ज़रूरत है। उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य-संस्कृति को उन्नत बनाने और संस्थागत दक्षता को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया। उभरते और भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप इंडस्ट्री के साथ मिलकर नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार करने का भी आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील और भविष्योन्मुखी बने रहना चाहिए।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
इस उच्चस्तरीय बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक इस श्रृंखला की दूसरी कड़ी है, जो यह संकेत देती है कि सरकार नीतिगत लक्ष्यों की नियमित उच्चस्तरीय निगरानी को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।