28 जुलाई 2026
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PM मोदी की अध्यक्षता में सचिवों की दूसरी उच्चस्तरीय बैठक, 'विकसित भारत' लक्ष्यों पर मंथन

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PM मोदी की अध्यक्षता में सचिवों की दूसरी उच्चस्तरीय बैठक, 'विकसित भारत' लक्ष्यों पर मंथन

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 28 जुलाई को सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक में 'विकसित भारत' लक्ष्यों की समीक्षा की। अंतर-विभागीय साइलो तोड़ने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने और स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया गया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 28 जुलाई 2026 को 7 लोक कल्याण मार्ग पर सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में वित्त, वाणिज्य एवं उद्योग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के मंत्रालयों के कार्य-एजेंडे की समीक्षा हुई।
मोदी ने सरकारी तंत्र में 'हॉरिज़ॉन्टल' और 'वर्टिकल' साइलो समाप्त कर अंतर-विभागीय समन्वय बढ़ाने का आह्वान किया।
ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जोड़ते हुए नवाचार व विविधीकरण पर ज़ोर दिया गया।
साइबर सुरक्षा को राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाने और युवा इनोवेटर्स की भागीदारी बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में कैबिनेट सचिव , प्रमुख विभागों के सचिव और PMO के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जुलाई 2026 को अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली में भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों तथा विभागों के भविष्य के कार्य-एजेंडे की गहन समीक्षा की गई। बैठक का केंद्रीय उद्देश्य 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में कार्यान्वयन की गति को तेज़ करना था।

टीम निर्माण और साइलो तोड़ने पर ज़ोर

प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों और विभागों के बीच अंतर-विभागीय समन्वय को मज़बूत करने का आह्वान किया। उन्होंने सरकारी तंत्र में व्याप्त 'हॉरिज़ॉन्टल' और 'वर्टिकल' साइलो — यानी विभागों के अलग-थलग कामकाज — को समाप्त करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनका तर्क था कि बेहतर तालमेल से ही एकीकृत और प्रभावशाली नीतिगत परिणाम संभव हैं।

नागरिक-केंद्रित शासन और स्वदेशी तकनीक

नागरिक-केंद्रित शासन को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत के आम नागरिक हर नीति और निर्णय के केंद्र में होने चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुनियादी ढाँचे में भारी निवेश के साथ-साथ स्वदेशी तकनीकों के विकास को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमता निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।

ऊर्जा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर विशेष चर्चा

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिक कल्याण से सीधे जोड़ा गया। प्रधानमंत्री ने नवाचार, विविधीकरण और त्वरित क्षमता निर्माण के ज़रिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का आग्रह किया। साइबर सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्कता ज़रूरी है और युवा इनोवेटर्स एवं उद्यमियों की साइबर सिक्योरिटी इकोसिस्टम में अधिक भागीदारी को एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए।

सुधार, कौशल विकास और भविष्योन्मुखी सरकार

मोदी ने स्पष्ट किया कि सुधार महज़ एक चर्चित शब्द नहीं, बल्कि प्रभावी शासन की निरंतर ज़रूरत है। उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य-संस्कृति को उन्नत बनाने और संस्थागत दक्षता को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया। उभरते और भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप इंडस्ट्री के साथ मिलकर नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार करने का भी आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील और भविष्योन्मुखी बने रहना चाहिए।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक इस श्रृंखला की दूसरी कड़ी है, जो यह संकेत देती है कि सरकार नीतिगत लक्ष्यों की नियमित उच्चस्तरीय निगरानी को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विभागीय सीमाएँ अक्सर राजनीतिक इच्छाशक्ति से अधिक मज़बूत साबित हुई हैं। साइबर सुरक्षा को 'राष्ट्रव्यापी आंदोलन' बनाने का आह्वान महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके लिए ठोस नीतिगत ढाँचे और बजटीय प्रतिबद्धता की ज़रूरत होगी — जिसका विवरण अभी सामने नहीं आया है। असली कसौटी यह होगी कि ये बैठकें केवल दिशा-निर्देश देने तक सीमित रहती हैं या जवाबदेही तंत्र के साथ परिणाम-आधारित निगरानी की ओर ले जाती हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

28 जुलाई को PM मोदी की सचिवों के साथ बैठक में क्या हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जुलाई 2026 को 7 लोक कल्याण मार्ग पर सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वित्त, वाणिज्य, उद्योग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के मंत्रालयों के कार्य-एजेंडे की समीक्षा हुई। बैठक का मुख्य फोकस 'विकसित भारत' लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को गति देना था।
'विकसित भारत' लक्ष्य क्या हैं और इनसे क्या अपेक्षा है?
'विकसित भारत' भारत सरकार का दीर्घकालिक विकास लक्ष्य है, जिसके तहत देश को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना है। इस बैठक में इन लक्ष्यों की दिशा में मंत्रालयों की प्रगति, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में साइबर सुरक्षा पर क्या निर्देश दिए गए?
प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने साइबर सुरक्षा इकोसिस्टम में युवा इनोवेटर्स और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने और इसे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर PM मोदी ने क्या कहा?
मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिक कल्याण से सीधे जोड़ा। उन्होंने नवाचार, विविधीकरण और त्वरित क्षमता निर्माण के ज़रिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर बल दिया।
इस बैठक में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हुए?
बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह इस श्रृंखला की दूसरी बैठक थी, जो नीतिगत लक्ष्यों की नियमित उच्चस्तरीय निगरानी को संस्थागत रूप देने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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