29 अक्टूबर 2026
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आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग: लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली HC ने ED को नोटिस जारी किया

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आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग: लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली HC ने ED को नोटिस जारी किया

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर ED को नोटिस थमा दिया है। सितंबर में ट्रायल कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर PMLA के तहत आरोप तय किए थे। अब CBI और ED — दोनों मोर्चों पर यादव परिवार की कानूनी लड़ाई उच्च न्यायालय में एक साथ चल रही है।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर 2026 को ED को नोटिस जारी किया; मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को।
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने लालू को निचली अदालत से स्थगन माँगने की स्वतंत्रता दी।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सितंबर में PMLA के तहत लालू प्रसाद यादव , राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय किए थे; 7 आरोपियों को बरी किया था।
यह मामला 2004-2009 के बीच IRCTC होटल ठेकों में कथित अनियमितताओं और 3 एकड़ भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है।
दिल्ली HC में CBI के भ्रष्टाचार मामले में भी यादव परिवार की पुनरीक्षण याचिकाएँ पहले से लंबित हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया। यादव ने आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके विरुद्ध आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

उच्च न्यायालय का आदेश

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने ED को नोटिस जारी करते हुए लालू प्रसाद यादव को यह स्वतंत्रता भी दी कि वे उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई तक निचली अदालत की कार्यवाही पर स्थगन की अपील कर सकते हैं। न्यायालय ने मामले को 3 दिसंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।

याचिका में राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किए गए थे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। ED के अनुसार, उस दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के होटलों के रखरखाव के ठेके निर्धारित मानदंडों का पालन किए बिना RJD प्रमुख के करीबी सहयोगियों से जुड़ी एक निजी कंपनी को दिए गए।

ED के अनुसार, इन ठेकों के बदले यादव परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़ी एक कथित बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ की प्रमुख भूमि का अधिग्रहण किया गया था। यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किए गए मूल अपराध से जुड़ा है।

गौरतलब है कि इसी साल सितंबर में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा था कि इन आरोपियों के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग का प्रथमदृष्टया मामला बनता है, जबकि उसी आदेश में सात आरोपियों को बरी भी कर दिया गया था।

समानांतर कानूनी लड़ाई

दिल्ली उच्च न्यायालय पहले से ही लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में CBI द्वारा IRCTC होटल घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए गए हैं।

यानी अब इसी मामले से जुड़े दो अलग-अलग ट्रैक — CBI की भ्रष्टाचार शाखा और ED की मनी लॉन्ड्रिंग शाखा — दोनों के आदेशों को उच्च न्यायालय में एक साथ चुनौती दी जा रही है।

लालू प्रसाद यादव का पक्ष

लालू प्रसाद यादव लगातार इन सभी आरोपों का खंडन करते रहे हैं। उनका कहना है कि IRCTC होटलों के टेंडर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दिए गए थे तथा उनके विरुद्ध दर्ज मामले राजनीति से प्रेरित हैं।

आगे क्या होगा

अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को होगी, जिसमें ED को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि निचली अदालत से स्थगन मिलता है, तो ट्रायल की कार्यवाही अस्थायी रूप से रुक सकती है। यह मामला बिहार की राजनीति और RJD के भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो PMLA के तहत दोषसिद्धि की स्थिति में तेजस्वी यादव के राजनीतिक भविष्य पर भी असर पड़ सकता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ED को नोटिस क्यों जारी किया?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की उस याचिका पर ED को नोटिस जारी किया, जिसमें IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा PMLA के तहत तय आरोपों को चुनौती दी गई है। यह नोटिस न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी किया।
आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामला क्या है?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। ED के अनुसार, IRCTC होटलों के रखरखाव के ठेके बिना निर्धारित मानदंडों का पालन किए करीबी सहयोगियों की एक निजी कंपनी को दिए गए और बदले में बेनामी कंपनी के ज़रिए तीन एकड़ जमीन हासिल की गई। CBI ने इस मूल अपराध में अलग FIR दर्ज की है।
लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप कब तय हुए थे?
इसी साल सितंबर 2026 में राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने PMLA के तहत लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किए। उसी आदेश में सात अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
इस मामले में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की क्या भूमिका है?
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर भी PMLA के तहत आरोप तय किए हैं। दोनों ने लालू प्रसाद यादव के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय में CBI के भ्रष्टाचार मामले के आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएँ भी दायर की हुई हैं।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में होगी, जिसमें ED को अपना जवाब दाखिल करना होगा। लालू प्रसाद यादव को तब तक निचली अदालत से कार्यवाही पर स्थगन माँगने की स्वतंत्रता दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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