आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग: लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली HC ने ED को नोटिस जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया। यादव ने आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके विरुद्ध आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
उच्च न्यायालय का आदेश
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने ED को नोटिस जारी करते हुए लालू प्रसाद यादव को यह स्वतंत्रता भी दी कि वे उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई तक निचली अदालत की कार्यवाही पर स्थगन की अपील कर सकते हैं। न्यायालय ने मामले को 3 दिसंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।
याचिका में राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किए गए थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। ED के अनुसार, उस दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के होटलों के रखरखाव के ठेके निर्धारित मानदंडों का पालन किए बिना RJD प्रमुख के करीबी सहयोगियों से जुड़ी एक निजी कंपनी को दिए गए।
ED के अनुसार, इन ठेकों के बदले यादव परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़ी एक कथित बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ की प्रमुख भूमि का अधिग्रहण किया गया था। यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किए गए मूल अपराध से जुड़ा है।
गौरतलब है कि इसी साल सितंबर में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा था कि इन आरोपियों के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग का प्रथमदृष्टया मामला बनता है, जबकि उसी आदेश में सात आरोपियों को बरी भी कर दिया गया था।
समानांतर कानूनी लड़ाई
दिल्ली उच्च न्यायालय पहले से ही लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में CBI द्वारा IRCTC होटल घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए गए हैं।
यानी अब इसी मामले से जुड़े दो अलग-अलग ट्रैक — CBI की भ्रष्टाचार शाखा और ED की मनी लॉन्ड्रिंग शाखा — दोनों के आदेशों को उच्च न्यायालय में एक साथ चुनौती दी जा रही है।
लालू प्रसाद यादव का पक्ष
लालू प्रसाद यादव लगातार इन सभी आरोपों का खंडन करते रहे हैं। उनका कहना है कि IRCTC होटलों के टेंडर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दिए गए थे तथा उनके विरुद्ध दर्ज मामले राजनीति से प्रेरित हैं।
आगे क्या होगा
अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को होगी, जिसमें ED को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि निचली अदालत से स्थगन मिलता है, तो ट्रायल की कार्यवाही अस्थायी रूप से रुक सकती है। यह मामला बिहार की राजनीति और RJD के भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।