आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग: लालू परिवार पर आरोप तय करने का फैसला फिर टला, 27 अगस्त को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने का फैसला 14 अगस्त 2026 को एक बार फिर स्थगित कर दिया। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 27 अगस्त 2026 निर्धारित की है। यह मामला 2004 से 2009 के बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री कार्यकाल से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके पुत्र तेजस्वी यादव, पत्नी राबड़ी देवी, पुत्री मीसा भारती, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में फैसला टला हो — इससे पहले 16 जून को सुनवाई की तारीख 31 जुलाई तक बढ़ाई गई थी, और 31 जुलाई को भी फैसला 14 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
ईडी का आरोप: क्या है मामला
जाँच एजेंसी के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब आईआरसीटीसी के होटलों के संचालन और रखरखाव के ठेके तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना राजद प्रमुख के कथित करीबी सहयोगियों से जुड़ी एक निजी कंपनी को दिए गए। अभियोजन पक्ष का यह भी आरोप है कि इन ठेकों के एवज में एक बेनामी कंपनी के माध्यम से लालू परिवार और उनके सहयोगियों ने करीब तीन एकड़ कीमती जमीन हासिल की।
लालू परिवार का पक्ष
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने इन सभी आरोपों को लगातार नकारा है। उनका कहना है कि आईआरसीटीसी होटलों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई थी। परिवार का तर्क है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है।
क्या होगा आगे
अब सभी की निगाहें 27 अगस्त 2026 पर टिकी हैं, जब राऊज एवेन्यू कोर्ट इस मामले में आरोप तय करने पर अपना फैसला सुनाएगी। गौरतलब है कि यह मामला एक दशक से अधिक समय से विभिन्न अदालती चरणों में है और इसमें बिहार के प्रमुख राजनीतिक परिवार के कई सदस्य आरोपी हैं। फैसले का असर न केवल कानूनी, बल्कि बिहार की राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।