जल गंगा संवर्धन अभियान: मध्य प्रदेश में 1.77 लाख जल कार्य पूर्ण, ₹6,201 करोड़ की योजना
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार का 'जल गंगा संवर्धन अभियान' अपने निर्णायक चरण में पहुँच गया है। 14 मई 2026 तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 1 लाख 77 हजार 121 जल संरक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं — जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भू-जल पुनर्भरण की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रगति मानी जा रही है।
अभियान का दायरा और वित्तीय प्रावधान
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के समन्वय से संचालित इस अभियान के लिए राज्य सरकार ने ₹6,201.81 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। पूरे प्रदेश में 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और अब तक ₹4,443.85 करोड़ का व्यय किया जा चुका है।
अभियान की मूल अवधारणा 'खेत का पानी खेत में और गाँव का पानी गाँव में' रोकने पर आधारित है, ताकि आगामी मानसून में वर्षा की प्रत्येक बूँद का अधिकतम संचयन सुनिश्चित हो सके।
मुख्य कार्यों का विवरण
अभियान के अंतर्गत 'डग वेल रिचार्ज' यानी सूखे कुओं के पुनर्भरण में राज्य ने विशेष सफलता हासिल की है — 88,123 से अधिक कुओं को रिचार्ज करने का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पशुपालन की सुविधा के लिए 53,568 खेत तालाबों का निर्माण भी पूरा किया गया है।
जल संरक्षण और पुनर्भरण की अन्य विधियों के तहत 27,332 अतिरिक्त कार्य सम्पन्न हुए हैं। वृक्षारोपण और स्कूलों में जल टैंकों की सफाई जैसे पर्यावरणीय कार्यों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। जेएसजेबी 2.0 (जल संचयन जल भागीदारी) पहल के तहत 10 लाख से अधिक कार्यों का पंजीकरण राज्य की सक्रियता को रेखांकित करता है।
जिलों की रैंकिंग: खंडवा अव्वल
14 मई 2026 को जारी नवीनतम जिला प्रदर्शन रैंकिंग के अनुसार, खंडवा जिला 7.51 के स्कोर के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। खंडवा में कुल 9,131 कार्य प्रारंभ किए गए हैं, जिनमें से 2,944 पूर्ण और 5,400 की भौतिक पूर्णता सुनिश्चित की गई है।
रैंकिंग में खरगोन (7.38 स्कोर) दूसरे स्थान पर है और उसने 81.17 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक 'बुक्ड एक्सपेंडिचर' दर्ज किया है। इसके पश्चात बड़वानी (7.23), उज्जैन (7.08) और राजगढ़ (6.90) क्रमशः तीसरे, चौथे और पाँचवें स्थान पर हैं।
सरकार की मंशा और आगे की राह
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अभियान की सफलता को जन-भागीदारी का परिणाम बताते हुए कहा कि जल संरक्षण समाज के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन स्थायी जल संरचनाओं के माध्यम से भू-जल स्तर को बढ़ाया जाए, जिससे भविष्य में पेयजल संकट का स्थायी समाधान हो और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य भू-जल संकट से जूझ रहे हैं और मानसून की अनिश्चितता कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही है। अभियान की शेष 65,067 कार्यों को मानसून से पूर्व पूर्ण करना अब राज्य की प्राथमिकता बताई जा रही है।