13 अगस्त 2026
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एफसीआरए बिल जेपीसी को भेजना विपक्ष की जीत, सरकार की मर्जी नहीं: सीपीआई(एम) सांसद शिवदासन

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एफसीआरए बिल जेपीसी को भेजना विपक्ष की जीत, सरकार की मर्जी नहीं: सीपीआई(एम) सांसद शिवदासन

सारांश

सीपीआई(एम) सांसद शिवदासन ने साफ कहा — एफसीआरए बिल का जेपीसी को जाना सरकार की उदारता नहीं, विपक्ष की जीत है। साथ ही उन्होंने UP के मेडिकल कॉलेजों में SC छात्रों को आरक्षण से वंचित करने पर शिक्षा मंत्री को पत्र लिखने की घोषणा की।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) सांसद वी.
शिवदासन ने कहा कि एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजना विपक्ष के दबाव का नतीजा है, सरकार की इच्छा नहीं।
विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों के सामूहिक विरोध के कारण सरकार को इस सत्र में विधेयक पारित कराने की योजना छोड़नी पड़ी।
BJP सांसद सुष्मिता देव की लुंगी टिप्पणी को शिवदासन ने भारत की सांस्कृतिक विविधता पर हमला बताया।
कावेरी जल विवाद पर शिवदासन ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच बातचीत को एकमात्र समाधान बताया।
उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में SC छात्रों को आरक्षण से वंचित करने पर शिवदासन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखने की घोषणा की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद वी. शिवदासन ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजना सरकार की स्वेच्छा नहीं, बल्कि विपक्षी दलों और नागरिक समाज के सामूहिक दबाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार इस सत्र में ही विधेयक पारित कराना चाहती थी, किंतु संसद के भीतर और बाहर के संगठित विरोध ने उसे पीछे हटने पर मजबूर किया।

एफसीआरए विधेयक और जेपीसी का घटनाक्रम

शिवदासन ने कहा, 'सरकार को इस मामले को जेपीसी के पास भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा — ऐसा सरकार की इच्छा से नहीं, बल्कि विपक्ष के दखल और हमारे संघर्ष की वजह से हुआ।' उनके अनुसार, विपक्षी दलों के साथ-साथ राजनीतिक एवं नागरिक अधिकार समूहों ने मिलकर विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया, जिसके बाद सरकार को जेपीसी का रास्ता अपनाना पड़ा। यह विधेयक स्वयंसेवी संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों को मिलने वाले विदेशी अनुदान के नियमन से जुड़ा है।

धोती-लुंगी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद सुष्मिता देव की लुंगी संबंधी टिप्पणी पर शिवदासन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति का पहनावा उसका अपना अधिकार है। हम दक्षिण भारतीय, खासकर केरल के लोग आमतौर पर धोती पहनते हैं — यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।' उन्होंने जोड़ा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता में है — उत्तर, दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिम, सभी की अपनी अलग पहचान है। उनके अनुसार, इस विविधता को अपमानजनक भाषा से निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है और BJP इस बहुलता की अहमियत को नहीं समझती।

कावेरी जल विवाद: बातचीत ही एकमात्र रास्ता

कर्नाटक बंद और कावेरी जल विवाद पर शिवदासन ने कहा कि पानी का बंटवारा केवल दक्षिण भारत नहीं, बल्कि पूरे देश में एक संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा, 'कुछ विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि भविष्य में जल संसाधनों को लेकर संघर्ष हो सकता है।' उनका मानना है कि जल वितरण हवा की तरह सभी का साझा अधिकार है और इसे तमिलनाडुकर्नाटक के बीच आपसी बातचीत और समझ से सुलझाया जाना चाहिए।

छात्र आंदोलन और आरक्षण का मुद्दा

शिवदासन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखने की घोषणा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के तीन-चार मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को आरक्षण व्यवस्था के तहत प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जो एक गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है। उन्होंने झारखंड, बिहार, कोलकाता, महाराष्ट्र और गुजरात में भी छात्रों की जायज माँगों पर ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, झारखंड में BJP इस आंदोलन को विपक्ष के विरुद्ध राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। शिवदासन ने स्पष्ट किया कि UP के छात्रों की अपील मिलने के बाद वे शिक्षा मंत्री को पत्र भेजेंगे, ताकि मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के अधिकार की बहाली सुनिश्चित हो सके।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का सत्र विभिन्न विधेयकों और विपक्षी विरोध के बीच उथल-पुथल भरा रहा है। आने वाले दिनों में जेपीसी की बैठकों और शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि वास्तविक जाँच का। एफसीआरए का मौजूदा संशोधन नागरिक समाज संगठनों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है, और जेपीसी को भेजना इस विरोध को शांत करने की रणनीति भी हो सकती है। UP के मेडिकल कॉलेजों में SC आरक्षण का मुद्दा मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर हाशिये पर रहता है, जबकि यह संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) का सीधा उल्लंघन है। धोती-लुंगी विवाद सतही लग सकता है, लेकिन यह उस गहरी सांस्कृतिक राजनीति का प्रतिबिंब है जो 'एक राष्ट्र, एक संस्कृति' की धारणा को बल देती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास क्यों भेजा गया?
शिवदासन के अनुसार, सरकार इस सत्र में विधेयक पारित कराना चाहती थी, लेकिन विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों के संगठित विरोध के कारण उसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजना पड़ा। यह सरकार की इच्छा नहीं, बल्कि विपक्ष के दबाव का परिणाम है।
एफसीआरए बिल क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) गैर-सरकारी संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी अनुदान को नियंत्रित करता है। आलोचकों का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन नागरिक समाज संगठनों की स्वायत्तता को और सीमित कर देगा।
उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में SC छात्रों का मुद्दा क्या है?
शिवदासन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के तीन-चार मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति के छात्रों को आरक्षण व्यवस्था के तहत प्रवेश का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। इसे संवैधानिक उल्लंघन बताते हुए उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखने की घोषणा की।
कावेरी जल विवाद पर शिवदासन का क्या रुख है?
शिवदासन ने कहा कि जल वितरण एक साझा अधिकार है और इसे तमिलनाडु व कर्नाटक के बीच आपसी बातचीत और समझ से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में जल संसाधनों को लेकर संघर्ष की आशंका है।
BJP सांसद की लुंगी टिप्पणी पर शिवदासन ने क्या कहा?
शिवदासन ने कहा कि पहनावा व्यक्ति का अपना अधिकार है और धोती दक्षिण भारत, विशेषकर केरल की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि भारत की विविध संस्कृतियों, पहनावे और खानपान की आदतों का अपमान करना स्वीकार्य नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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