एफसीआरए बिल जेपीसी को भेजना विपक्ष की जीत, सरकार की मर्जी नहीं: सीपीआई(एम) सांसद शिवदासन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद वी. शिवदासन ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजना सरकार की स्वेच्छा नहीं, बल्कि विपक्षी दलों और नागरिक समाज के सामूहिक दबाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार इस सत्र में ही विधेयक पारित कराना चाहती थी, किंतु संसद के भीतर और बाहर के संगठित विरोध ने उसे पीछे हटने पर मजबूर किया।
एफसीआरए विधेयक और जेपीसी का घटनाक्रम
शिवदासन ने कहा, 'सरकार को इस मामले को जेपीसी के पास भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा — ऐसा सरकार की इच्छा से नहीं, बल्कि विपक्ष के दखल और हमारे संघर्ष की वजह से हुआ।' उनके अनुसार, विपक्षी दलों के साथ-साथ राजनीतिक एवं नागरिक अधिकार समूहों ने मिलकर विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया, जिसके बाद सरकार को जेपीसी का रास्ता अपनाना पड़ा। यह विधेयक स्वयंसेवी संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों को मिलने वाले विदेशी अनुदान के नियमन से जुड़ा है।
धोती-लुंगी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद सुष्मिता देव की लुंगी संबंधी टिप्पणी पर शिवदासन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति का पहनावा उसका अपना अधिकार है। हम दक्षिण भारतीय, खासकर केरल के लोग आमतौर पर धोती पहनते हैं — यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।' उन्होंने जोड़ा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता में है — उत्तर, दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिम, सभी की अपनी अलग पहचान है। उनके अनुसार, इस विविधता को अपमानजनक भाषा से निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है और BJP इस बहुलता की अहमियत को नहीं समझती।
कावेरी जल विवाद: बातचीत ही एकमात्र रास्ता
कर्नाटक बंद और कावेरी जल विवाद पर शिवदासन ने कहा कि पानी का बंटवारा केवल दक्षिण भारत नहीं, बल्कि पूरे देश में एक संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा, 'कुछ विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि भविष्य में जल संसाधनों को लेकर संघर्ष हो सकता है।' उनका मानना है कि जल वितरण हवा की तरह सभी का साझा अधिकार है और इसे तमिलनाडु व कर्नाटक के बीच आपसी बातचीत और समझ से सुलझाया जाना चाहिए।
छात्र आंदोलन और आरक्षण का मुद्दा
शिवदासन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखने की घोषणा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के तीन-चार मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को आरक्षण व्यवस्था के तहत प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जो एक गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है। उन्होंने झारखंड, बिहार, कोलकाता, महाराष्ट्र और गुजरात में भी छात्रों की जायज माँगों पर ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, झारखंड में BJP इस आंदोलन को विपक्ष के विरुद्ध राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। शिवदासन ने स्पष्ट किया कि UP के छात्रों की अपील मिलने के बाद वे शिक्षा मंत्री को पत्र भेजेंगे, ताकि मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के अधिकार की बहाली सुनिश्चित हो सके।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का सत्र विभिन्न विधेयकों और विपक्षी विरोध के बीच उथल-पुथल भरा रहा है। आने वाले दिनों में जेपीसी की बैठकों और शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।