30 जून 2026
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जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण पूर्ण: CM मोहन यादव बोले — सनातन संस्कृति में जल सर्वोच्च तत्व

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जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण पूर्ण: CM मोहन यादव बोले — सनातन संस्कृति में जल सर्वोच्च तत्व

सारांश

मध्य प्रदेश में ₹10,514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हजार जल संरक्षण कार्य पूर्ण — CM मोहन यादव ने राजगढ़ में जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का समापन किया। अल-नीनो के कारण कम वर्षा की आशंका के बीच यह अभियान जारी रहेगा।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 30 जून 2026 को राजगढ़ के भैंसवा माता क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का समापन किया।
19 मार्च 2026 से लगभग 100 दिनों में ₹10,514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हजार जल संरक्षण कार्य पूर्ण हुए।
अल-नीनो के प्रभाव से इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा का अनुमान; इसलिए अमृत सरोवर, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और नदी संरक्षण कार्य जारी रहेंगे।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि सभी कार्य पूर्ण प्रामाणिकता से संपन्न हुए और जनभागीदारी से जल संचयन जारी रहेगा।
मध्य प्रदेश में यह अभियान पिछले 3 वर्षों से जन सहयोग के साथ वृहद स्तर पर संचालित हो रहा है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 जून 2026 को राजगढ़ जिले के भैंसवा माता क्षेत्र में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में पंच तत्वों — विशेष रूप से जल — का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश में ₹10,514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हजार जल संरक्षण कार्यों के सफल संपादन की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री का संबोधन: जल ही जीवन का आधार

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हमारे यहाँ हर पवित्र कार्य जल के साथ ही आरंभ होता है। उन्होंने प्रसिद्ध कवि रहीम की जल-महत्ता पर आधारित पंक्तियों का स्मरण कराते हुए कहा कि जल से ही प्रकृति का उद्भव और जीवन का विकास संभव हुआ है। उनके अनुसार, सृष्टि पर सबसे पहले जलचर प्राणी ही आए — यह तथ्य जल की केंद्रीयता को सिद्ध करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब हम जल संरचनाओं को देखते हैं तो मन आनंद से भर जाता है। 'हमारे पूर्वजों ने जल के महत्व को समझा और निरंतर जल संरचनाओं का निर्माण किया — आज हमारा दायित्व है कि हम उनका संरक्षण करें,' उन्होंने कहा।

अभियान का दायरा और उपलब्धियाँ

19 मार्च 2026 से आरंभ हुए इस अभियान के तीसरे चरण में लगभग 100 दिनों तक प्रदेशव्यापी जल संरक्षण कार्य संचालित किए गए। ₹10,514 करोड़ की लागत से कुल 3 लाख 63 हजार कार्य पूर्ण हुए, जिनमें अमृत सरोवर निर्माण, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और नदी संरक्षण प्रमुख रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 3 वर्षों से यह अभियान जन सहयोग के माध्यम से वृहद स्तर पर चलाया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब मौसम विभाग ने अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परिस्थिति में जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन और भी अनिवार्य हो जाता है।

केंद्र सरकार की भूमिका और राज्य का समन्वय

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में जल संरक्षण और संवर्धन का अभियान चलाया जा रहा है, और मध्य प्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे जनआंदोलन का रूप दिया है।

मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की अपील

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम में कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत अब तक हुए सभी कार्य पूर्ण प्रामाणिकता के साथ संपन्न हुए हैं। उन्होंने कहा, 'हम सभी को पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी जनभागीदारी से इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं।

आगे की राह: जल संरक्षण जारी रहेगा

अल-नीनो के कारण कम वर्षा की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमृत सरोवर, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और नदी संरक्षण के कार्य आगामी मानसून सत्र के दौरान भी निरंतर जारी रहेंगे। यह अभियान मध्य प्रदेश में दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में एक सतत प्रयास के रूप में आगे बढ़ता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

514 करोड़ और 3 लाख 63 हजार कार्यों के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इन संरचनाओं का दीर्घकालिक रखरखाव कौन सुनिश्चित करेगा — क्योंकि भारत में जल संरक्षण परियोजनाएँ प्रायः निर्माण के बाद उपेक्षित हो जाती हैं। अल-नीनो की चेतावनी के बीच यह अभियान समय पर है, परंतु जल संकट का स्थायी समाधान केवल संरचना-निर्माण से नहीं, बल्कि भूजल पुनर्भरण और कृषि जल-दक्षता की नीतियों से आएगा। सनातन संस्कृति और जल की महत्ता का संदर्भ जन-जागरण के लिए उपयोगी है, किंतु नीतिगत जवाबदेही के लिए ठोस मापन ढाँचे की आवश्यकता है जो अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार का जल संरक्षण अभियान है जिसका तीसरा चरण 19 मार्च 2026 से लगभग 100 दिनों तक चला। इस चरण में ₹10,514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हजार जल संरक्षण कार्य पूर्ण किए गए, जिनमें अमृत सरोवर, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और नदी संरक्षण शामिल हैं।
CM मोहन यादव ने राजगढ़ में क्या कहा?
CM मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में पंच तत्वों में जल का स्थान सर्वोपरि है और जल से ही जीवन का विकास संभव है। उन्होंने पूर्वजों द्वारा बनाई जल संरचनाओं के संरक्षण को आज की पीढ़ी का दायित्व बताया।
अल-नीनो का मध्य प्रदेश के जल संरक्षण अभियान पर क्या असर है?
अल-नीनो के प्रभाव से इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा का अनुमान है, जिसके कारण राज्य सरकार ने जल संचयन और जल स्रोत संरक्षण के कार्यों को मानसून के दौरान भी जारी रखने का निर्णय लिया है। यही कारण है कि अमृत सरोवर और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
जल गंगा संवर्धन अभियान में कितनी राशि खर्च हुई?
अभियान के तीसरे चरण में ₹10,514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हजार जल संरक्षण कार्य कराए गए। यह अभियान पिछले 3 वर्षों से मध्य प्रदेश में जन सहयोग के साथ चलाया जा रहा है।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने जल संरक्षण पर क्या कहा?
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि अभियान के सभी कार्य पूर्ण प्रामाणिकता के साथ हुए हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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