मध्य प्रदेश में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' को मिली नई रफ्तार, CM मोहन यादव ने मन की बात के 136वें एपिसोड में PM मोदी का जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 27 जुलाई 2025 को निवाड़ी जिले के प्रसिद्ध पर्यटन व धार्मिक स्थल ओरछा स्थित कंचना घाट पर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का 136वाँ संस्करण सुना। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के जल संरक्षण आह्वान की सराहना करते हुए मध्य प्रदेश के प्रयासों को रेखांकित किया।
मन की बात में क्या बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 136वें संस्करण में 'कैच द रेन' अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के ज़रिए अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हो रही प्रगति तथा देश के खिलाड़ियों के प्रेरणादायी प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। विशेष रूप से, प्रधानमंत्री ने सीधी जिले में जनभागीदारी से किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की खुलकर सराहना की।
मध्य प्रदेश में जल संरक्षण के उल्लेखनीय प्रयास
मुख्यमंत्री मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत व्यापक कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रेरित होकर इन प्रयासों को और गति मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन कार्यों का सकारात्मक प्रभाव 4 जुलाई से शुरू हुए 'कैच द रेन' अभियान में भी परिलक्षित होगा।
सीधी जिले की उपलब्धियाँ
सीधी जिले में अब तक 12,983 जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इनमें 1,489 खेत तालाब निर्मित किए गए हैं, जिनसे वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिले की जल भंडारण क्षमता 1,35,73,874 घन मीटर से बढ़कर 1,80,56,486 घन मीटर हो गई है — यानी 44,82,612 घन मीटर की वृद्धि। इस अतिरिक्त क्षमता से लगभग 896 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई संभव हुई है और करीब एक लाख लोगों की दैनिक जल आवश्यकताएँ पूरी की जा सकती हैं।
आजीविका से जुड़ा जल संरक्षण
सीधी जिले ने जल संरक्षण को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर के रूप में भी परिभाषित किया है। वर्तमान में 211 तालाबों में मत्स्य पालन और 178 तालाबों में सिंघाड़े की खेती की जा रही है। इन गतिविधियों से मछुआरा समूहों, स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत किसानों को प्रत्यक्ष रूप से लगभग ₹80 लाख का आर्थिक लाभ हुआ है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'कैच द रेन' अभियान को पूरे देश में जन आंदोलन का रूप देने पर जोर दे रही है। मध्य प्रदेश का सीधी मॉडल — जहाँ जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ा गया है — अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। गौरतलब है कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब मध्य प्रदेश ने इस अभियान में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।