31 अगस्त 2026
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बिहार सिंचाई-बाढ़ नियंत्रण: CM सम्राट चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से माँगी ₹16,339 करोड़ परियोजनाओं की मंजूरी

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बिहार सिंचाई-बाढ़ नियंत्रण: CM सम्राट चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से माँगी ₹16,339 करोड़ परियोजनाओं की मंजूरी

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर ₹16,339 करोड़ की 18 से अधिक सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की शीघ्र मंजूरी माँगी — जिनमें से अब तक केवल दो को ही स्वीकृति मिली है।

मुख्य बातें

CM सम्राट चौधरी ने 31 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की।
बिहार ने ₹16,339.18 करोड़ की परियोजनाओं के DPR केंद्र को सौंपे, लेकिन अब तक केवल 2 परियोजनाओं को मंजूरी मिली।
₹3,652.56 करोड़ की कोसी-मेची अंतर्राज्यीय नदी जोड़ परियोजना के लिए अब तक केवल ₹156.745 करोड़ प्राप्त हुए।
पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए ₹8,338.89 करोड़ का DPR केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया; राज्य ने ₹3,484.24 करोड़ का पहला चरण स्वयं शुरू किया।
बाढ़ प्रबंधन की 15 और सिंचाई की 3 परियोजनाओं की स्वीकृति में तेजी लाने की माँग।
राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति और गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पटना में बनाए रखने पर भी जोर।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 31 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर राज्य की लंबित सिंचाई, जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को त्वरित मंजूरी दिलाने तथा केंद्रीय सहायता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी उपस्थित रहे।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के सामने रखा कि बिहार सरकार ने ₹16,339.18 करोड़ की परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) केंद्र को सौंपे हैं, किंतु अब तक केवल दो परियोजनाओं को ही स्वीकृति मिल पाई है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर बिहार हर वर्ष कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों की बाढ़ से व्यापक क्षति झेलता है।

कोसी-मेची परियोजना पर विशेष जोर

बैठक में कोसी-मेची अंतर्राज्यीय नदी जोड़ परियोजना पर केंद्रित चर्चा हुई। ₹3,652.56 करोड़ की इस परियोजना का उद्देश्य कोसी बेसिन के अतिरिक्त जल का उपयोग कर उत्तर बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। पहले चरण के लिए 2025-26 में ₹395.41 करोड़ और 2026-27 में ₹570 करोड़ का प्रावधान है, परंतु अब तक केवल ₹156.745 करोड़ ही प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने शेष राशि शीघ्र जारी करने और दूसरे चरण के DPR को मंजूरी देने का अनुरोध किया।

अन्य प्रमुख परियोजनाओं पर माँग

सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना के लिए ₹125.08 करोड़ की केंद्रीय सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने की माँग की गई। संबंधित केंद्रीय समिति इस योजना की अनुशंसा पहले ही कर चुकी है। इसके अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र की तीन और बाढ़ प्रबंधन क्षेत्र की 15 परियोजनाओं की स्वीकृति में तेजी लाने की माँग भी रखी गई।

पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए बिहार सरकार ने ₹8,338.89 करोड़ का DPR केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। राज्य ने अपने संसाधनों से ₹3,484.24 करोड़ के पहले चरण का कार्य पहले ही शुरू कर दिया है और अब केंद्रीय सहायता की प्रतीक्षा है।

केंद्रीय बजट में शामिल करने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 में इंद्रपुरी जलाशय परियोजना, सोन-फल्गु नदी जोड़ परियोजना और सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना के पहले चरण को शामिल करने का आग्रह किया। सारण परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,350.95 करोड़ है।

गाद प्रबंधन और नेपाल-संबद्ध परियोजनाएँ

सम्राट चौधरी ने फरक्का बराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि से जुड़ी गाद, नदी-धारा परिवर्तन और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान हेतु राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति तथा एक समर्पित कोष बनाने की माँग की। उन्होंने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पटना में बनाए रखने पर भी बल दिया। नेपाल से संबंधित कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना के सर्वेक्षण एवं DPR कार्य में तेजी लाने का आग्रह भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर बिहार को बाढ़ राहत, सिंचाई विस्तार और जलविद्युत उत्पादन के नए अवसर मिलेंगे। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से इन महत्वपूर्ण जल संसाधन परियोजनाओं को शीघ्र गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

339 करोड़ के DPR भेजे गए, लेकिन दो से अधिक को मंजूरी नहीं मिली, जबकि उत्तर बिहार हर मानसून में तबाही झेलता है। कोसी-मेची जैसी परियोजना के लिए आवंटित राशि का एक तिहाई से भी कम जारी होना बताता है कि घोषणाएँ और धरातल के बीच की दूरी अभी भी बड़ी है। नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं पर DPR में तेजी की माँग सही दिशा में है, लेकिन द्विपक्षीय जल-कूटनीति के बिना ये अनुरोध कागज़ पर ही रहने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार CM सम्राट चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से किन परियोजनाओं की मंजूरी माँगी?
मुख्यमंत्री ने ₹16,339.18 करोड़ की सिंचाई, जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की शीघ्र मंजूरी माँगी, जिनमें कोसी-मेची नदी जोड़, पश्चिमी कोसी नहर, सिकरहना तटबंध, इंद्रपुरी जलाशय और सारण बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएँ प्रमुख हैं। अब तक इनमें से केवल दो परियोजनाओं को ही केंद्रीय स्वीकृति मिली है।
कोसी-मेची नदी जोड़ परियोजना क्या है और इसकी क्या स्थिति है?
₹3,652.56 करोड़ की यह अंतर्राज्यीय परियोजना कोसी बेसिन के अतिरिक्त जल का उपयोग कर उत्तर बिहार में सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिए बनाई गई है। पहले चरण के लिए 2025-26 और 2026-27 में क्रमशः ₹395.41 करोड़ और ₹570 करोड़ का प्रावधान है, लेकिन अब तक केवल ₹156.745 करोड़ ही जारी हुए हैं।
पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए बिहार ने क्या कदम उठाए हैं?
बिहार सरकार ने इस परियोजना के विस्तार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए ₹8,338.89 करोड़ का DPR केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। राज्य ने अपने संसाधनों से ₹3,484.24 करोड़ के पहले चरण का काम पहले ही शुरू कर दिया है और अब केंद्रीय सहायता की प्रतीक्षा है।
बिहार ने गाद प्रबंधन और नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं पर क्या माँग रखी?
मुख्यमंत्री ने फरक्का बराज और गंगा जल संधि से जुड़ी गाद व बाढ़ समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति और समर्पित कोष बनाने की माँग की। साथ ही कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना के DPR कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया गया।
इन परियोजनाओं से बिहार को क्या लाभ होगा?
इन परियोजनाओं के पूरा होने पर उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जलविद्युत उत्पादन के नए अवसर मिलेंगे। यह क्षेत्र हर वर्ष कोसी, गंडक और बागमती नदियों की बाढ़ से व्यापक नुकसान झेलता है।
राष्ट्र प्रेस
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