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बिहार बाढ़ 2025: तटबंधों की रात्रिकालीन निगरानी के आदेश, उपमुख्यमंत्री चौधरी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

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बिहार बाढ़ 2025: तटबंधों की रात्रिकालीन निगरानी के आदेश, उपमुख्यमंत्री चौधरी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

सारांश

बिहार में बाढ़ का मौसम दस्तक देते ही उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर तटबंधों पर रात्रिकालीन औचक निरीक्षण और एक सप्ताह में शेष कटाव निरोधक कार्य पूरे करने के सख्त निर्देश दिए। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने 9 जुलाई को बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
सभी शेष कटाव निरोधक कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरे करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य अभियंताओं को सप्ताह में कम से कम दो बार रात्रिकालीन औचक निरीक्षण अनिवार्य किया गया।
संवेदनशील स्थलों पर हटमेंट, प्रकाश व्यवस्था और आवश्यक सामग्री का भंडारण पहले से सुनिश्चित करने के आदेश।
तटबंधों पर अतिक्रमण और रैट होल्स-फॉक्स होल्स की मरम्मत पर विशेष जोर।
एक सप्ताह बाद संयुक्त टीम तैयारियों का सत्यापन करेगी; लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी।

बिहार में बाढ़ का मौसम शुरू होते ही राज्य सरकार ने सतर्कता की मुद्रा अपना ली है। उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 9 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंधों पर रात्रिकालीन औचक निरीक्षण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। बैठक में सभी बाढ़ परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं से क्षेत्रवार तैयारियों का जायज़ा लिया गया।

मुख्य निर्देश और समय-सीमा

चौधरी ने स्पष्ट किया कि शेष सभी कटाव निरोधक कार्य एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि मुख्य अभियंता सप्ताह में कम से कम दो बार रात के समय औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि संबंधित अभियंता एवं श्रमिक कार्यस्थल पर कैंप कर रहे हों। अधिकांश कटाव निरोधक कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

संवेदनशील स्थलों पर विशेष तैयारी

उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील स्थलों पर हटमेंट, प्रकाश व्यवस्था तथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नदियों के जलस्तर में वृद्धि का इंतज़ार किए बिना अभी से सभी संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

तटबंध अतिक्रमण और तकनीकी खामियों पर सख्ती

चौधरी ने तटबंधों पर अतिक्रमण मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वर्षा के दौरान दिखाई न देने वाले रैट होल्स एवं फॉक्स होल्स की समय रहते मरम्मत कराने तथा आपात स्थिति में सामग्री की त्वरित आपूर्ति के लिए पहुंच मार्गों को दुरुस्त रखने का भी निर्देश दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार प्रतिवर्ष मानसून के दौरान उत्तरी नदियों के उफान से भारी नुकसान झेलता है।

सत्यापन और जवाबदेही

उपमुख्यमंत्री ने घोषणा की कि एक सप्ताह बाद मुख्यालय और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर तैयारियों और सामग्री भंडारण का सत्यापन करेगी। उन्होंने दो-टूक कहा कि बाढ़ का यह समय सभी अधिकारियों की कार्यक्षमता की परीक्षा है — बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आगे की राह

राज्य के बाढ़ प्रबंधन तंत्र की असली परीक्षा तब होगी जब उत्तर बिहार की प्रमुख नदियाँ — कोसी, गंडक और बागमती — मानसून की तेज़ बारिश के बाद उफान पर आएंगी। सरकार की यह सक्रियता संकेत देती है कि इस बार प्रशासन आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने की बजाय पहले से तैयार रहने की रणनीति पर चल रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सतर्कता केवल बैठकों तक सीमित रहेगी या ज़मीन पर भी दिखेगी। राज्य में हर साल बाढ़ पूर्व समीक्षाएं होती हैं, फिर भी कोसी और गंडक के किनारे के जिले बार-बार तबाही झेलते हैं। रात्रिकालीन निरीक्षण और एक सप्ताह की समय-सीमा जैसे ठोस निर्देश सकारात्मक हैं, परंतु जब तक जवाबदेही का तंत्र केवल चेतावनी तक न रहे और वास्तव में लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई हो, तब तक इन घोषणाओं का असर सीमित रहेगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने बाढ़ से पहले क्या तैयारियां की हैं?
बिहार सरकार ने तटबंधों पर रात्रिकालीन औचक निरीक्षण अनिवार्य किया है और शेष सभी कटाव निरोधक कार्य एक सप्ताह में पूरे करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील स्थलों पर आवश्यक सामग्री का पहले से भंडारण सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
बिहार में बाढ़ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की?
उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 9 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय बाढ़ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें सभी बाढ़ परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंता शामिल हुए।
तटबंधों पर रात्रिकालीन निरीक्षण क्यों ज़रूरी बताया गया?
रात के समय रैट होल्स और फॉक्स होल्स जैसी खामियां दिखाई नहीं देतीं, जो बाढ़ के दौरान तटबंध टूटने का कारण बन सकती हैं। इसीलिए मुख्य अभियंताओं को सप्ताह में कम से कम दो बार रात्रिकालीन औचक निरीक्षण का निर्देश दिया गया है।
तैयारियों का सत्यापन कैसे होगा?
उपमुख्यमंत्री चौधरी ने बताया कि एक सप्ताह बाद मुख्यालय और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर तैयारियों और सामग्री भंडारण का सत्यापन करेगी। लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बिहार में बाढ़ का मौसम कब शुरू होता है और कौन-सी नदियां खतरनाक होती हैं?
बिहार में बाढ़ का मौसम आमतौर पर जुलाई से शुरू होकर सितंबर तक रहता है। कोसी, गंडक और बागमती जैसी उत्तर बिहार की नदियां मानसून में उफान पर आने से सबसे अधिक खतरनाक मानी जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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