31 अगस्त 2026
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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आह्वान: शिक्षा डिग्री से आगे, अनुसंधान और उद्योग-साझेदारी ज़रूरी

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आह्वान: शिक्षा डिग्री से आगे, अनुसंधान और उद्योग-साझेदारी ज़रूरी

सारांश

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोच्चि में साफ़ कहा — डिग्री काफी नहीं, भारत को अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक साझेदारी चाहिए। केरल के पलायन-संकट की पृष्ठभूमि में यह संदेश और भी तीखा है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 31 अगस्त को कोच्चि में राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह को संबोधित किया।
' कॉनफ्लुएंस 3.0 ' का उद्घाटन और नए प्रशासनिक भवन की आधारशिला रखी गई।
उन्होंने कहा — 'हम रोज़गार के अनुरूप लोग तैयार नहीं कर पा रहे, बाज़ार की माँग समझनी होगी।' केरल से उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों पर ध्यान देने और अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा को मज़बूत करने का आग्रह किया।
युवाओं से मादक पदार्थों से दूर रहने और क्षमताओं को समाज-कल्याण में लगाने की अपील।
केरल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री वी.
सतीशन भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 31 अगस्त 2026 को कोच्चि में राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को भारत के तकनीकी भविष्य की बुनियाद बताया।

मुख्य घटनाक्रम

उपराष्ट्रपति ने संस्था के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'कॉनफ्लुएंस 3.0' का उद्घाटन किया और राजगिरी स्कूल के नए प्रशासनिक भवन की आधारशिला भी रखी। कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

शिक्षा और रोज़गार पर राधाकृष्णन की चेतावनी

राधाकृष्णन ने सीधे शब्दों में कहा, 'हम रोज़गार के अनुरूप लोग तैयार नहीं कर पा रहे हैं, हमें बाज़ार की माँग समझनी होगी।' उन्होंने केरल से आग्रह किया कि वह उच्च-प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करे ताकि रोज़गार सृजन हो और प्रवासी केरलवासी अपने मूल क्षेत्रों में वापस लौट सकें।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल की साक्षरता दर और मानव विकास सूचकांक राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं, फिर भी राज्य से कुशल युवाओं का पलायन एक दीर्घकालिक चुनौती बना हुआ है। उपराष्ट्रपति ने इस विरोधाभास को रेखांकित करते हुए उच्च शिक्षा को उद्योग की वास्तविक ज़रूरतों से जोड़ने पर बल दिया।

अनुसंधान और नवाचार पर ज़ोर

उपराष्ट्रपति ने चीन की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी तरक्की उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने केरल से अनुसंधान-उन्मुख उच्च शिक्षा को मज़बूत करने का आग्रह किया।

गौरतलब है कि 'कॉनफ्लुएंस 3.0' जैसे मंच उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की खाई को पाटने की दिशा में एक सकारात्मक पहल हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी और स्टार्ट-अप के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ऐसी साझेदारियाँ अनिवार्य हैं।

संस्था की विरासत और सामाजिक योगदान

उपराष्ट्रपति ने कार्मेलाइट्स ऑफ मेरी इमैक्युलेट के योगदान और संत कुरियाकोस एलियास चावरा की विरासत को याद किया। उन्होंने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण, महिला शिक्षा और वयस्क साक्षरता को बढ़ावा देने के उनके ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना की। राजगिरी के बारे में उन्होंने कहा कि संस्था ने न केवल तकनीकी विशेषज्ञ, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोग भी तैयार किए हैं।

युवाओं से विशेष अपील

राधाकृष्णन ने छात्रों से 'मादक पदार्थों को ना कहें' का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षणिक सुख महान आशाओं और लक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए करने का अनुरोध किया।

राजगिरी स्कूल का यह रजत जयंती समारोह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं था — यह भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के सामने खड़ी चुनौतियों पर एक राष्ट्रीय संवाद का भी अवसर बना।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केरल के संदर्भ में इसकी धार अलग है। राज्य की साक्षरता और मानव विकास में शीर्ष स्थान के बावजूद कुशल युवाओं का खाड़ी देशों और अन्य राज्यों में पलायन एक विडंबना है जिसे केवल उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योग नीति से नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम सुधार और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र से भी संबोधित करना होगा। 'कॉनफ्लुएंस 3.0' जैसे आयोजन संवाद का मंच देते हैं, पर असली परीक्षा यह है कि राजगिरी जैसी संस्थाएँ अपने पाठ्यक्रम को उद्योग की वास्तविक माँग से कितनी तेज़ी से जोड़ पाती हैं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोच्चि में किस कार्यक्रम को संबोधित किया?
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 31 अगस्त को कोच्चि में राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह और 'कॉनफ्लुएंस 3.0' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्था के नए प्रशासनिक भवन की आधारशिला भी रखी।
राधाकृष्णन ने शिक्षा और डिग्री के बारे में क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उनके अनुसार अनुसंधान, नवाचार और समस्या-समाधान पर अधिक ज़ोर देना ज़रूरी है ताकि युवा बाज़ार की वास्तविक माँगों के अनुरूप तैयार हो सकें।
उपराष्ट्रपति ने केरल के लिए क्या सुझाव दिए?
राधाकृष्णन ने केरल से उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करने और अनुसंधान-उन्मुख उच्च शिक्षा को मज़बूत करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे रोज़गार सृजन होगा और प्रवासी केरलवासी अपने मूल क्षेत्रों में वापस लौट सकेंगे।
कॉनफ्लुएंस 3.0 क्या है?
कॉनफ्लुएंस 3.0 राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित एक उद्योग-अकादमिक संवाद मंच है, जिसे संस्था के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य उद्योग और शिक्षा जगत के बीच साझेदारी को मज़बूत करना है।
संत कुरियाकोस एलियास चावरा का उल्लेख क्यों किया गया?
उपराष्ट्रपति ने कार्मेलाइट्स ऑफ मेरी इमैक्युलेट के संस्थापक संत कुरियाकोस एलियास चावरा की विरासत को याद करते हुए शिक्षा के लोकतंत्रीकरण, महिला शिक्षा और वयस्क साक्षरता में उनके ऐतिहासिक योगदान की सराहना की। राजगिरी स्कूल इसी परंपरा से प्रेरित संस्था है।
राष्ट्र प्रेस
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