उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आह्वान: शिक्षा डिग्री से आगे, अनुसंधान और उद्योग-साझेदारी ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 31 अगस्त 2026 को कोच्चि में राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को भारत के तकनीकी भविष्य की बुनियाद बताया।
मुख्य घटनाक्रम
उपराष्ट्रपति ने संस्था के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'कॉनफ्लुएंस 3.0' का उद्घाटन किया और राजगिरी स्कूल के नए प्रशासनिक भवन की आधारशिला भी रखी। कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
शिक्षा और रोज़गार पर राधाकृष्णन की चेतावनी
राधाकृष्णन ने सीधे शब्दों में कहा, 'हम रोज़गार के अनुरूप लोग तैयार नहीं कर पा रहे हैं, हमें बाज़ार की माँग समझनी होगी।' उन्होंने केरल से आग्रह किया कि वह उच्च-प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करे ताकि रोज़गार सृजन हो और प्रवासी केरलवासी अपने मूल क्षेत्रों में वापस लौट सकें।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल की साक्षरता दर और मानव विकास सूचकांक राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं, फिर भी राज्य से कुशल युवाओं का पलायन एक दीर्घकालिक चुनौती बना हुआ है। उपराष्ट्रपति ने इस विरोधाभास को रेखांकित करते हुए उच्च शिक्षा को उद्योग की वास्तविक ज़रूरतों से जोड़ने पर बल दिया।
अनुसंधान और नवाचार पर ज़ोर
उपराष्ट्रपति ने चीन की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी तरक्की उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने केरल से अनुसंधान-उन्मुख उच्च शिक्षा को मज़बूत करने का आग्रह किया।
गौरतलब है कि 'कॉनफ्लुएंस 3.0' जैसे मंच उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की खाई को पाटने की दिशा में एक सकारात्मक पहल हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी और स्टार्ट-अप के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ऐसी साझेदारियाँ अनिवार्य हैं।
संस्था की विरासत और सामाजिक योगदान
उपराष्ट्रपति ने कार्मेलाइट्स ऑफ मेरी इमैक्युलेट के योगदान और संत कुरियाकोस एलियास चावरा की विरासत को याद किया। उन्होंने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण, महिला शिक्षा और वयस्क साक्षरता को बढ़ावा देने के उनके ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना की। राजगिरी के बारे में उन्होंने कहा कि संस्था ने न केवल तकनीकी विशेषज्ञ, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोग भी तैयार किए हैं।
युवाओं से विशेष अपील
राधाकृष्णन ने छात्रों से 'मादक पदार्थों को ना कहें' का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षणिक सुख महान आशाओं और लक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए करने का अनुरोध किया।
राजगिरी स्कूल का यह रजत जयंती समारोह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं था — यह भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के सामने खड़ी चुनौतियों पर एक राष्ट्रीय संवाद का भी अवसर बना।