21 अगस्त 2026
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बिहार CM सम्राट चौधरी की निर्मला सीतारमण और जयशंकर से मुलाकात, भारत-नेपाल जल परियोजनाओं और बजट पर चर्चा

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बिहार CM सम्राट चौधरी की निर्मला सीतारमण और जयशंकर से मुलाकात, भारत-नेपाल जल परियोजनाओं और बजट पर चर्चा

सारांश

बिहार CM सम्राट चौधरी ने 21 अगस्त को कर्तव्य भवन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। भारत-नेपाल जल परियोजनाओं, बजट और पर्यटन पर चर्चा हुई — बाढ़-पीड़ित बिहार के लिए यह बैठक रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

मुख्य बातें

बिहार CM सम्राट चौधरी ने 21 अगस्त को कर्तव्य भवन, नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर से मुलाकात की।
बैठक में भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनाओं , बजट विषयों और पर्यटन विकास पर चर्चा हुई।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और राज्यसभा सदस्य संजय झा भी बैठक में उपस्थित रहे।
कोसी परियोजना ( 1954 ) और गंडक परियोजना ( 1959 ) बाढ़ नियंत्रण व सिंचाई के लिए भारत-नेपाल के बीच प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाएँ हैं।
सप्त कोसी उच्च बांध परियोजना उत्तरी बिहार को बाढ़ से बचाने और जलविद्युत उत्पादन के लिए प्रस्तावित है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनाओं, बजट से जुड़े विषयों, पर्यटन विकास और बिहार के हित से संबंधित अन्य अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और जनता दल (यूनाइटेड) के राज्यसभा सदस्य संजय झा भी इस बैठक में उपस्थित रहे। सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सम्मिलित हुआ।'

मुख्य एजेंडा: बिहार के विकास और जल परियोजनाएँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक का केंद्रबिंदु बिहार के विकास, समृद्धि और जनहित से जुड़े विषयों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखना था। भारत-नेपाल जल संसाधन सहयोग के अंतर्गत कोसी, गंडक और महाकाली नदियों पर चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई सुविधा और जलविद्युत उत्पादन है।

भारत-नेपाल जल परियोजनाओं की पृष्ठभूमि

कोसी परियोजना भारत और नेपाल के बीच 1954 के समझौते के तहत शुरू हुई थी, जिसके अंतर्गत कोसी बैराज का निर्माण हुआ। इसका उद्देश्य उत्तर बिहार और नेपाल में बाढ़ नियंत्रण तथा सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करना है। वहीं, गंडक परियोजना 1959 के गंडक समझौते के तहत अस्तित्व में आई, जिसमें भैंसालोटन (बाल्मीकि नगर) में बांध और जलविद्युत संयंत्र का निर्माण किया गया।

इसके अलावा, सप्त कोसी उच्च बांध परियोजना नेपाल में सप्तकोशी नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी बहुउद्देशीय योजना है, जिस पर भारत और नेपाल मिलकर काम कर रहे हैं। इस परियोजना का लक्ष्य उत्तरी बिहार और दक्षिण-पूर्वी नेपाल को भीषण बाढ़ से बचाना, बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन और सिंचाई के लिए जल आपूर्ति करना है।

बिहार के लिए क्या मायने रखती है यह बैठक

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बिहार प्रतिवर्ष मानसून में कोसी और गंडक नदियों की बाढ़ से भारी तबाही झेलता है। केंद्र सरकार के साथ सीधे समन्वय से इन परियोजनाओं में तेज़ी आने और बजटीय आवंटन में बिहार की प्राथमिकताओं को जगह मिलने की संभावना है। गौरतलब है कि बिहार लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा और अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की माँग करता रहा है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संकेत दिया कि बेहतर केंद्र-राज्य समन्वय के साथ इन विषयों पर आगे भी काम जारी रहेगा। जल परियोजनाओं पर द्विपक्षीय वार्ता और बजटीय प्रावधानों से बिहार के लाखों किसानों और बाढ़-प्रभावित परिवारों को दीर्घकालिक राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार की बजटीय प्राथमिकता बन चुकी हैं। कोसी और गंडक परियोजनाएँ दशकों पुरानी हैं, फिर भी उत्तर बिहार में बाढ़ का कहर हर साल दोहराया जाता है — जो क्रियान्वयन की खाई को उजागर करता है। सप्त कोसी उच्च बांध जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना पर द्विपक्षीय प्रगति तभी संभव है जब विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय एकसाथ बिहार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएँ — इसीलिए यह बैठक केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, रणनीतिक पहल है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार CM सम्राट चौधरी ने दिल्ली में किससे और किस विषय पर बात की?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 21 अगस्त को कर्तव्य भवन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। बैठक में भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनाओं, बजट और पर्यटन विकास पर चर्चा हुई।
भारत-नेपाल जल परियोजनाएँ बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
कोसी, गंडक और सप्तकोशी नदियों पर बनी और प्रस्तावित परियोजनाएँ उत्तर बिहार में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए अहम हैं। बिहार हर साल इन नदियों की बाढ़ से भारी नुकसान उठाता है, इसलिए इन परियोजनाओं में प्रगति सीधे लाखों लोगों की जीवन-रक्षा से जुड़ी है।
कोसी और गंडक परियोजनाएँ कब शुरू हुईं?
कोसी परियोजना 1954 के भारत-नेपाल समझौते के तहत शुरू हुई और कोसी बैराज का निर्माण हुआ। गंडक परियोजना 1959 के गंडक समझौते के तहत बनी, जिसमें भैंसालोटन (बाल्मीकि नगर) में बांध और जलविद्युत संयंत्र स्थापित किया गया।
सप्त कोसी उच्च बांध परियोजना क्या है?
यह नेपाल में सप्तकोशी नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है, जिस पर भारत और नेपाल मिलकर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य उत्तरी बिहार और दक्षिण-पूर्वी नेपाल को भीषण बाढ़ से बचाना, बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन और सिंचाई के लिए जल आपूर्ति करना है।
इस बैठक से बिहार को क्या फायदा होने की उम्मीद है?
केंद्रीय वित्त और विदेश मंत्री से सीधी बातचीत से बिहार को बजटीय आवंटन में प्राथमिकता और भारत-नेपाल जल परियोजनाओं में तेज़ी मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बेहतर केंद्र-राज्य समन्वय के साथ इन विषयों पर काम जारी रखने का संकेत दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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