10 अगस्त 2026
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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस का क्लीन स्वीप, पाँचों उम्मीदवार जीते; भाजपा को 2, जेडी(एस) को शून्य सीट

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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस का क्लीन स्वीप, पाँचों उम्मीदवार जीते; भाजपा को 2, जेडी(एस) को शून्य सीट

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस का क्लीन स्वीप — पाँचों उम्मीदवार जीते, 151 वोट मिले जो अनुमान से 11 अधिक थे। भाजपा के तीन और जेडी(एस) के छह विधायकों की कथित क्रॉस वोटिंग ने शिवकुमार की पकड़ साबित की और कुमारस्वामी की प्रतिष्ठा को बड़ा धक्का दिया।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 18 जून 2026 को घोषित कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में पाँचों सीटें जीतीं।
कांग्रेस को अनुमानित 138 की जगह 151 वोट मिले — 11 अतिरिक्त वोट क्रॉस वोटिंग से आए।
भाजपा के तीन और जेडी(एस) के छह विधायकों ने कथित तौर पर कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया।
भाजपा को 2 सीटें ( रघु कौटिल्य व लिंगराज पाटिल ); जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले और वे हारे।
यह नतीजा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बड़ी जीत और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कुल 222 मत डाले गए; 1 मत वरीयता अंकन की त्रुटि के कारण अमान्य घोषित।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 18 जून 2026 को घोषित परिणामों में ऐतिहासिक क्लीन स्वीप दर्ज किया — पाँचों उम्मीदवार पहले ही दौर की मतगणना में विजयी हुए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मात्र दो सीटें मिलीं, जबकि सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) का एकमात्र उम्मीदवार हार गया। यह नतीजा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की संगठनात्मक पकड़ की बड़ी जीत और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के लिए करारा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

मतगणना का पूरा चित्र

चुनाव में कुल 222 मत डाले गए, जिनमें से एक मत अमान्य घोषित किया गया क्योंकि मतदाता ने वरीयता संख्या सही ढंग से अंकित नहीं की थी। जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 27.63 वोटों की ज़रूरत थी।

कांग्रेस विजेताओं का मतविवरण इस प्रकार रहा: बीके हरिप्रसाद को 30 वोट, टिप्पणप्पा कामकानूर को 30 वोट, पीवी मोहन को 30 वोट, बीएस शिवन्ना को 30 वोट और विनय कार्तिक को 32 वोट मिले। भाजपा के रघु कौटिल्य को 29 और लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले, जबकि जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट प्राप्त हुए।

क्रॉस वोटिंग ने पलटा समीकरण

कांग्रेस को अपने अनुमान से 11 अतिरिक्त वोट मिले। पार्टी का अनुमान था कि उसे 138 विधायकों का समर्थन मिलेगा — 135 कांग्रेस विधायक, एसकेपी के एक सदस्य और दो निर्दलीय — लेकिन अंतिम गणना में उम्मीदवारों को कुल 151 विधायकों का समर्थन मिला।

रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा से निष्कासित विधायक शिवराम हेब्बार और एसटी सोमशेखर के अलावा भाजपा के तीन अन्य विधायकों और जेडी(एस) के छह विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। इसी कारण भाजपा को दो निर्दलीयों समेत 64 विधायकों के समर्थन के बावजूद केवल 56 प्रथम वरीयता वोट मिले और एक वोट अमान्य हो गया। जेडी(एस) को 18 सदस्यों की विधायक संख्या के बावजूद केवल 14 वोट मिले।

गौरतलब है कि लिंगराज पाटिल पहले चरण में जीत के ज़रूरी आँकड़े तक नहीं पहुँच सके; जेडी(एस) उम्मीदवार के एलिमिनेशन के बाद वोट-ट्रांसफर के ज़रिए वे अंततः जीत का आँकड़ा पार करने में सफल रहे।

नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'आज कर्नाटक के इतिहास में एक बड़ा दिन है। यह सिर्फ कांग्रेस के पाँच उम्मीदवारों की जीत नहीं, बल्कि कर्नाटक की जनता की जीत है। राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है।'

भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने स्वीकार किया कि 'मतदान के पैटर्न से स्पष्ट हुआ है कि हमारे तीन वोट दूसरी तरफ गए हैं।' उन्होंने कहा कि पार्टी यह पता लगाएगी कि किसने विपक्ष के पक्ष में मतदान किया और उचित निर्णय लेगी।

विजयी उम्मीदवार टिप्पणप्पा कामकानूर ने मुख्यमंत्री शिवकुमार, गृह मंत्री प्रियंक खड़गे, बड़े एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल और उत्तर कर्नाटक के नेताओं के सहयोग का आभार जताया।

विनय कार्तिक की उम्मीदवारी की पृष्ठभूमि

पाँचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक को 32 वोट मिले — जो पहले घोषित चार उम्मीदवारों से भी अधिक थे। कार्तिक का नाम मुख्यमंत्री शिवकुमार ने चार उम्मीदवारों की घोषणा के बाद प्रस्तावित किया था। कार्तिक को शिवकुमार का करीबी सहयोगी और दूर का रिश्तेदार बताया जाता है। यह तथ्य यह भी दर्शाता है कि शिवकुमार का विधायकों पर नियंत्रण कितना मज़बूत है।

राजनीतिक निहितार्थ

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बनाया था और मुख्यमंत्री शिवकुमार को खुली चुनौती दी थी। जेडी(एस) की इस हार ने भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन की ज़मीनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि छह जेडी(एस) विधायकों का क्रॉस वोटिंग करना दर्शाता है कि गठबंधन के भीतर दरारें गहरी हैं। आगे भाजपा के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वह अपने असंतुष्ट विधायकों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विनय कार्तिक को पहले चार उम्मीदवारों से भी अधिक वोट मिलना शिवकुमार की व्यक्तिगत पकड़ को रेखांकित करता है — लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या पार्टी संगठन और व्यक्तिगत नेटवर्क के बीच की यह निर्भरता दीर्घकाल में कांग्रेस के लिए टिकाऊ है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026 में किसे कितनी सीटें मिलीं?
कांग्रेस ने पाँचों सीटें जीतीं, भाजपा को दो सीटें मिलीं और जेडी(एस) का एकमात्र उम्मीदवार हार गया। परिणाम 18 जून 2026 को घोषित किए गए।
कर्नाटक MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग किसने की?
रिपोर्टों के अनुसार भाजपा के तीन विधायकों और जेडी(एस) के छह विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। भाजपा से निष्कासित विधायक शिवराम हेब्बार और एसटी सोमशेखर भी इनमें शामिल बताए जा रहे हैं।
कांग्रेस के कौन-से पाँच उम्मीदवार विजयी हुए?
विजयी उम्मीदवार हैं: बीके हरिप्रसाद (30 वोट), टिप्पणप्पा कामकानूर (30 वोट), पीवी मोहन (30 वोट), बीएस शिवन्ना (30 वोट) और विनय कार्तिक (32 वोट)।
इस जीत का एचडी कुमारस्वामी पर क्या असर पड़ेगा?
कुमारस्वामी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बनाया था और मुख्यमंत्री शिवकुमार को खुली चुनौती दी थी। जेडी(एस) के उम्मीदवार की हार और पार्टी के छह विधायकों की कथित क्रॉस वोटिंग ने उनकी राज्य-स्तरीय साख को बड़ा धक्का दिया है।
भाजपा अपने असंतुष्ट विधायकों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी?
नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कहा है कि पार्टी यह पता लगाएगी कि किसने विपक्ष के पक्ष में मतदान किया और 'उचित निर्णय' लेगी। अभी तक कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई घोषित नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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