कर्नाटक विधान परिषद क्रॉस वोटिंग: भाजपा जांच समिति ने विजयेंद्र को सौंपी अंतरिम रिपोर्ट, 12 एनडीए वोटों पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तीन सदस्यीय जांच समिति ने शनिवार, 27 जून को बेंगलुरु स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग पर तैयार की गई अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र को सौंप दी। समिति के सदस्यों ने दावा किया कि मतगणना के आँकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुल 12 वोटों में क्रॉस वोटिंग हुई।
समिति की संरचना और जांच प्रक्रिया
पूर्व भाजपा राष्ट्रीय महासचिव एवं विधान परिषद सदस्य सी.टी. रवि की अध्यक्षता में गठित इस समिति में प्रदेश उपाध्यक्ष एन. महेश और विधायक महेश तेंगिनकाई भी शामिल थे। रवि ने पत्रकारों को बताया, "हमें मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। हमने चार दिनों के भीतर जांच पूरी की। समिति के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से रिपोर्ट तैयार की।"
जांच के दौरान समिति ने मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की। इसके बाद कई नेताओं से व्यक्तिगत बातचीत की गई। भाजपा उम्मीदवारों, जद (एस) नेताओं, मीडिया प्रतिनिधियों, पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से भी परामर्श किया गया।
मतगणना के आँकड़े और क्रॉस वोटिंग का दावा
रवि ने चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कहा, "भाजपा के दोनों उम्मीदवारों को 30-30 वोट मिलने थे। एक उम्मीदवार को 29 वोट मिले और एक मत अमान्य घोषित हो गया। दूसरे उम्मीदवार को केवल 27 वोट मिले, यानी तीन वोट कम रहे। वहीं, जद (एस) उम्मीदवार को 22 वोट मिलने थे, लेकिन उसे केवल 14 वोट मिले।" इन आँकड़ों के आधार पर समिति का दावा है कि जद (एस) के 8 और भाजपा के 4 — कुल 12 एनडीए वोट — क्रॉस वोटिंग के रूप में गए।
हालाँकि, रवि ने रिपोर्ट की विस्तृत सामग्री सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए कहा, "यह आंतरिक रिपोर्ट है। जो जानकारी सार्वजनिक की जानी थी, वह पहले ही बता दी गई है।"
कांग्रेस पर आरोप और राजनीतिक विवाद
रवि ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल यह न समझे कि उसे ये वोट किसी सद्भावना के कारण मिले हैं। उनके अनुसार, "क्रॉस वोटिंग अनैतिक तरीकों का परिणाम है। कांग्रेस के नेता दूसरे राज्यों में ऐसी घटनाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने स्वयं क्रॉस वोटिंग कराने के लिए अनैतिक तरीकों का सहारा लिया है।"
यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा से निष्कासित विधायक एस.टी. सोमशेखर ने गुरुवार को आरोप लगाया था कि केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे भाजपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग के लिए जिम्मेदार हैं। सोमशेखर ने यह भी दावा किया था कि प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक के बीच आंतरिक खींचतान भी इस घटनाक्रम का एक कारण रही, और यह क्रॉस वोटिंग एक साजिश का हिस्सा थी जिसका उद्देश्य दोनों नेताओं को उनके पदों से हटाना था।
गौरतलब है कि शुक्रवार को विजयेंद्र ने धर्मस्थल यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से किसी भी संबंध और क्रॉस वोटिंग को प्रोत्साहित करने के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया था।
संगठनात्मक कमियों की पहचान
रवि ने स्वीकार किया कि रिपोर्ट में पार्टी के भीतर उन पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है जहाँ अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत थी और संगठनात्मक स्तर पर हुई कमियों की भी पहचान की गई है। इससे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र ने नई दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर कथित क्रॉस वोटिंग के मुद्दे पर विस्तृत जानकारी दी थी, जिसके बाद यह जांच समिति गठित की गई थी।
आगे क्या होगा
रवि ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम रिपोर्ट है। अब प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी की कोर कमेटी तय करेगी कि मामले में आगे और जांच की आवश्यकता है या नहीं। भाजपा के इस कदम से कर्नाटक में विपक्ष और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव और गहराने की संभावना है।