13 अगस्त 2026
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विराटनगर में ACB का ट्रैप: तहसीलदार, कनिष्ठ सहायक और दलाल ₹55,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार

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विराटनगर में ACB का ट्रैप: तहसीलदार, कनिष्ठ सहायक और दलाल ₹55,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार

सारांश

विराटनगर में एक साधारण भूमि रजिस्ट्री दस्तावेज के लिए ₹55,000 की रिश्वत माँगना तहसीलदार संजय कुमार और उनके सहयोगियों को भारी पड़ा — ACB की ट्रैप कार्रवाई में तीनों रंगे हाथ गिरफ्तार। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज होगा।

मुख्य बातें

ACB ने 12 अगस्त 2026 को विराटनगर में ट्रैप कार्रवाई कर तहसीलदार संजय कुमार , कनिष्ठ सहायक देवीलाल और दलाल अशोक को गिरफ्तार किया।
तीनों पर आरोप है कि उन्होंने भूमि रजिस्ट्री दस्तावेज सौंपने के बदले ₹55,000 की रिश्वत ली।
शिकायतकर्ता ने 26 मई 2026 को ₹1.46 लाख में 0.0742 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी थी और स्टांप शुल्क के रूप में ₹13,931 पहले ही जमा किए थे।
भूमि पर कोई विवाद, बकाया या स्थगन आदेश नहीं था — फिर भी रिश्वत माँगी गई।
कार्रवाई ACB महानिदेशक गोविंद गुप्ता के निर्देश पर, DIG डॉ.
रामेश्वर सिंह की निगरानी में हुई।
आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के विराटनगर में एक सुनियोजित ट्रैप कार्रवाई में तहसीलदार संजय कुमार, कनिष्ठ सहायक देवीलाल और निजी दलाल अशोक को ₹55,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने एक साधारण भूमि रजिस्ट्री दस्तावेज सौंपने के बदले यह अवैध राशि माँगी।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता ने 26 मई 2026 को अमलोदा गाँव में 0.0742 हेक्टेयर कृषि भूमि ₹1.46 लाख में खरीदी थी। भूमि की रजिस्ट्री विराटनगर उप-पंजीयक कार्यालय में दर्ज हुई थी और शिकायतकर्ता ने पंजीकरण एवं स्टांप शुल्क के रूप में ₹13,931 पहले ही जमा कर दिए थे। सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी होने के बावजूद भूमि से जुड़ा कोई विवाद, बकाया शुल्क या न्यायालय का स्थगन आदेश नहीं था।

इसके बाद भी तहसीलदार संजय कुमार और देवीलाल ने रजिस्ट्री का दस्तावेज देने के एवज में कथित तौर पर ₹60,000 की रिश्वत माँगी। शिकायतकर्ता ने 11 अगस्त को ACB चौकी SU-1, जयपुर में शिकायत दर्ज कराई।

सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद मंगलवार को रिश्वत माँगने के आरोप का सत्यापन किया गया। सत्यापन के दौरान देवीलाल ने कथित रूप से ₹60,000 की माँग दोहराई। जब शिकायतकर्ता ने ₹10,000 देने की पेशकश की, तो आरोपी ने पूरी रकम एक साथ देने पर जोर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने तहसीलदार संजय कुमार से राशि कम करने का अनुरोध किया, जिस पर रिश्वत की रकम कथित तौर पर ₹55,000 तय की गई।

रिश्वत माँगने की पुष्टि होने के बाद बुधवार को ACB के पुलिस उपमहानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह की निगरानी में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत कौशिक के नेतृत्व में ट्रैप कार्रवाई की गई। इस अभियान को पुलिस उपाधीक्षक अर्चना मीणा ने अंजाम दिया।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

कार्रवाई के दौरान कनिष्ठ सहायक देवीलाल ने शिकायतकर्ता से ₹55,000 लेकर अपनी जेब में रखे। कुछ समय बाद उसने दलाल अशोक को बुलाकर यह रकम उसे सौंप दी। ACB टीम ने मौके पर ही रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली। प्रारंभिक जाँच में पुष्टि हुई कि शिकायतकर्ता का काम आरोपियों के पास लंबित था।

वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया

ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि शिकायत मिलते ही त्वरित कदम उठाए गए। ACB की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमला की निगरानी में आरोपियों से पूछताछ और आगे की जाँच जारी है।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई ACB मुख्यालय के सीधे निर्देश पर की गई, जो राजस्थान में भ्रष्टाचार के मामलों में ब्यूरो की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है।

आगे की कार्रवाई

ACB तीनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जाँच करेगी। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि भूमि रजिस्ट्री जैसी बुनियादी सरकारी सेवाओं में भी भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं — और नागरिकों को बिना किसी कारण के अवैध वसूली का सामना करना पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐसी गिरफ्तारियाँ केवल उदाहरण बनकर रह जाती हैं या इनसे उप-पंजीयक कार्यालयों में संरचनात्मक बदलाव आता है। भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया का डिजिटलीकरण और मानवीय हस्तक्षेप में कमी ही दीर्घकालिक समाधान हो सकता है — अन्यथा ट्रैप कार्रवाइयाँ हिमशैल की नोक मात्र साबित होंगी।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विराटनगर ACB ट्रैप मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
ACB ने तहसीलदार/उप-पंजीयक संजय कुमार, कनिष्ठ सहायक देवीलाल और निजी दलाल अशोक को गिरफ्तार किया। तीनों को ₹55,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया।
रिश्वत क्यों माँगी गई थी?
शिकायतकर्ता ने विराटनगर उप-पंजीयक कार्यालय में कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराई थी और सभी शुल्क चुका दिए थे। इसके बावजूद आरोपियों ने रजिस्ट्री दस्तावेज सौंपने के बदले ₹60,000 की माँग की, जो बाद में ₹55,000 तय हुई।
ACB ने इस मामले में कार्रवाई कैसे की?
शिकायतकर्ता की 11 अगस्त को दर्ज शिकायत के बाद मंगलवार को सत्यापन किया गया और बुधवार को ट्रैप कार्रवाई की गई। DIG डॉ. रामेश्वर सिंह की निगरानी और APS प्रशांत कौशिक के नेतृत्व में DSP अर्चना मीणा ने यह अभियान अंजाम दिया।
आरोपियों के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाए जाएँगे?
ACB तीनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करेगी। ACB की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमला की निगरानी में पूछताछ और जाँच जारी है।
शिकायतकर्ता ने कितनी भूमि खरीदी थी और क्या उस पर कोई विवाद था?
शिकायतकर्ता ने 26 मई 2026 को अमलोदा गाँव में 0.0742 हेक्टेयर कृषि भूमि ₹1.46 लाख में खरीदी थी। भूमि पर कोई विवाद, बकाया शुल्क या स्थगन आदेश नहीं था — फिर भी रिश्वत माँगी गई।
राष्ट्र प्रेस
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