27 सितंबर 2026
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संभल मंदिर-मस्जिद विवाद: भड़काऊ बयानबाजी पर 4 लोगों को नोटिस, 3 अक्टूबर को सुनवाई

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संभल मंदिर-मस्जिद विवाद: भड़काऊ बयानबाजी पर 4 लोगों को नोटिस, 3 अक्टूबर को सुनवाई

सारांश

संभल में मंदिर-मस्जिद विवाद ने प्रशासनिक रूप ले लिया है — BJP नेता के रामलीला मंच बयान के बाद भड़की जवाबी बयानबाजी पर जिला प्रशासन ने चार नेताओं को नोटिस थमाया है। 3 अक्टूबर की सुनवाई तय होना बताता है कि प्रशासन सांप्रदायिक तनाव को कानूनी दायरे में रखने के लिए सक्रिय है।

मुख्य बातें

संभल जिला प्रशासन ने मंदिर-मस्जिद विवाद और भड़काऊ बयानबाजी पर 4 लोगों को नोटिस जारी किया।
नोटिस पाने वालों में जफर अली (शाही जामा मस्जिद कमेटी), राजेश सिंघल (BJP), ममलूकुर्रहमान बर्क (सपा सांसद के पिता) और शकील अहमद (AIMIM) शामिल हैं।
सभी को 3 अक्टूबर 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होना होगा।
₹20,000 की जमानत या स्वयंबंध पत्र देकर 6 महीने शांति बनाए रखने का जवाब माँगा गया है।
विवाद की शुरुआत BJP नेता राजेश सिंघल के रहटौल गांव रामलीला मंच से दिए कथित बयान से हुई।

उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में मंदिर-मस्जिद विवाद और कथित भड़काऊ बयानबाजी के मामले में जिला प्रशासन ने 27 सितंबर 2026 को चार प्रमुख व्यक्तियों को नोटिस जारी किया है। सभी को 3 अक्टूबर को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है।

मामले में किन्हें भेजा गया नोटिस

जिला प्रशासन की ओर से नोटिस पाने वालों में शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल, समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता शकील अहमद शामिल हैं। चारों को ₹20,000 की जमानत अथवा समतुल्य स्वयंबंध पत्र प्रस्तुत करने और छह महीने तक शांति बनाए रखने का जवाब देने को कहा गया है।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे बढ़ा विवाद

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विवाद का तात्कालिक कारण BJP नेता राजेश सिंघल का रहटौल गांव में रामलीला मंच से दिया गया बयान बताया जा रहा है। सिंघल ने कथित तौर पर कहा था कि संभल में अब मस्जिद नहीं, मंदिर बनेंगे और हरिहर मंदिर जाने वालों पर गोली नहीं, पुष्प वर्षा होगी। इस बयान के बाद ममलूकुर्रहमान बर्क और AIMIM नेता शकील अहमद ने आपत्ति जताते हुए जवाबी बयान दिए, जिससे तनाव और गहरा हो गया।

पुलिस रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई

सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार के अनुसार, 23 सितंबर को संभल और नखासा थाने से पुलिस रिपोर्ट प्राप्त हुई थी, जिसे 25 सितंबर को उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया। पुलिस रिपोर्ट में सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर की गई बयानबाजी के कारण दो समुदायों के बीच शांति व कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। जफर अली के संदर्भ में पुलिस ने पूर्व में दर्ज मुकदमों और पहले की बयानबाजी का भी उल्लेख किया है।

आम जनता और कानून-व्यवस्था पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब संभल पहले से ही मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सार्वजनिक बयानबाजी और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं। गौरतलब है कि इस तरह के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील बयानों के खिलाफ प्रशासन का शांति बंधपत्र का प्रयोग उत्तर प्रदेश में एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है।

क्या होगा आगे

3 अक्टूबर 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में होने वाली सुनवाई में चारों नोटिस प्राप्तकर्ता अपना पक्ष रखेंगे। यदि वे जमानत देने से इनकार करते हैं या अदालत संतुष्ट नहीं होती, तो उनके विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन की यह सक्रियता संभल में आगामी त्योहारी मौसम के मद्देनजर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि नोटिस सभी पक्षों को एक साथ क्यों — क्या यह समान कानूनी जवाबदेही है या दोनों तरफ की राजनीतिक आँच को ठंडा करने का प्रयास? BJP नेता का रामलीला मंच-बयान पहले आया और उसी से जवाबी बयानबाजी की श्रृंखला शुरू हुई — इस क्रम को नज़रअंदाज़ करके सभी को समान दर्जे में रखना न्यायिक बारीकियों को धुंधला करता है। त्योहारी मौसम से पहले यह सक्रियता ज़रूरी है, पर असली परीक्षा 3 अक्टूबर की सुनवाई के बाद के कदमों में होगी।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संभल में किन चार लोगों को नोटिस जारी किया गया है?
शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली, BJP के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल, सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क और AIMIM नेता शकील अहमद को नोटिस दिया गया है। यह नोटिस मंदिर-मस्जिद विवाद और कथित भड़काऊ बयानबाजी के चलते जारी किया गया है।
संभल में नोटिस पर सुनवाई कब होगी?
3 अक्टूबर 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई निर्धारित है। चारों नोटिस प्राप्तकर्ताओं को उस दिन उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।
संभल में यह विवाद किस बयान से शुरू हुआ?
कथित तौर पर BJP नेता राजेश सिंघल ने रहटौल गांव में रामलीला मंच से बयान दिया था कि संभल में अब मस्जिद नहीं, मंदिर बनेंगे। इस बयान के बाद ममलूकुर्रहमान बर्क और AIMIM नेता शकील अहमद ने जवाबी बयान दिए, जिससे तनाव बढ़ा।
नोटिस में जमानत की क्या शर्त रखी गई है?
प्रशासन ने चारों से ₹20,000 की जमानत अथवा इतनी ही राशि का स्वयंबंध पत्र प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने का आश्वासन देना होगा।
पुलिस रिपोर्ट कब और किस आधार पर दाखिल हुई?
23 सितंबर 2026 को संभल और नखासा थाने ने पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसे 25 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार के समक्ष प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट में सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर की गई बयानबाजी से दो समुदायों के बीच शांति भंग होने की आशंका जताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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