पप्पू यादव के संसद परिसर में 'नाटक' पर भाजपा सांसदों का हमला, स्पीकर को नोटिस; SP ने एफआईआर को बताया अनावश्यक
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव द्वारा 31 जुलाई को मकर द्वार के सामने राम मंदिर चढ़ावे और संतों से जुड़े कथित प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई सांसदों ने इसे सनातन परंपरा, संत समाज और भगवान रामलला का अपमान करार देते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की है। वहीं, इस मामले में विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को समाजवादी पार्टी ने अनावश्यक बताया है।
संसदीय नियमों के उल्लंघन का आरोप
BJP सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि संसद परिसर के भीतर जो कुछ हुआ, वह संसदीय नियमों और मर्यादा के सर्वथा विरुद्ध है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नियम 222, 223 और 227 के तहत नोटिस दिया है। जायसवाल के अनुसार संसद परिसर के एकमात्र संरक्षक स्पीकर हैं और किसी भी सांसद को वहाँ संसदीय नियमों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने माँग की कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
जायसवाल ने यह भी कहा कि उनके अनुसार इस घटना से संविधान के अनुच्छेद 25 की भावना का भी उल्लंघन हुआ है। उन्होंने 31 जुलाई को हुए इस प्रदर्शन को सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का मामला बताते हुए कार्रवाई की माँग दोहराई।
साक्षी महाराज और राहुल सिन्हा का तीखा प्रहार
BJP सांसद साक्षी महाराज ने भी पप्पू यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संतों-साधुओं, भगवान रामलला और पवित्र भगवा परंपरा का अपमान कर उन्होंने गंभीर अपराध किया है। उनके अनुसार धार्मिक आस्था और संत समाज का सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
BJP सांसद राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि पप्पू यादव ने संत का अभिनय कर हिंदू संतों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, 'यदि वह अभिनय करना चाहते हैं तो अन्य धार्मिक वेशभूषा में भी ऐसा करने का साहस दिखाएं।' सिन्हा ने इसे हिंदू समाज की सहिष्णुता का गलत फायदा उठाने की कोशिश बताया। इसी दौरान उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए।
झारखंड लोक सेवा आयोग पर निशिकांत दूबे का निशाना
इसी बीच BJP सांसद निशिकांत दूबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सात-आठ वर्षों से आयोग में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, जिसके कारण झारखंड के युवाओं को नौकरियाँ नहीं मिल पा रही हैं।
दूबे ने कहा कि राज्य में पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन कोई संज्ञान लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के सदस्य कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से जुड़े हुए हैं।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अनावश्यक करार दिया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दिए गए नोटिस पर उनका रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। विशेषाधिकार समिति को मामला भेजे जाने की माँग पर फैसला आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि संसदीय प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। इस पूरे विवाद ने मानसून सत्र की कार्यवाही पर असर डालना शुरू कर दिया है।