तेलंगाना ACB का बड़ा एक्शन: तहसीलदार ₹2 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, ड्राइवर भी पकड़ा
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार, 26 मई 2026 को मेडचल मलकाजगिरी जिले के शमीरपेट मंडल की तहसीलदार एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट और संयुक्त उप-पंजीयक टी. सुचित्रा को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ACB के अनुसार, यह राशि ₹30 लाख की कुल माँगी गई रिश्वत का आंशिक भुगतान थी।
मुख्य घटनाक्रम
ACB अधिकारियों के अनुसार, आरोपी तहसीलदार टी. सुचित्रा पर 30 एकड़ कृषि भूमि के नाला रूपांतरण आवेदनों को संसाधित करने और मंजूरी देने के एवज में ₹30 लाख की रिश्वत माँगने का आरोप है। ब्यूरो ने बताया कि ₹2 लाख की संदिग्ध राशि आरोपी अधिकारी के निजी ड्राइवर वी. नागेश के माध्यम से आंशिक भुगतान के रूप में ली गई और उसी के पास से बरामद की गई।
दोनों आरोपियों — तहसीलदार टी. सुचित्रा और ड्राइवर वी. नागेश — को गिरफ्तार कर नामपल्ली स्थित विशेष न्यायाधीश (एसपीई एवं ACB) के समक्ष न्यायिक हिरासत के लिए पेश किया गया। सुरक्षा कारणों से शिकायतकर्ता का विवरण गोपनीय रखा गया है।
दूसरा मामला: मंडल सर्वेक्षक भी गिरफ्तार
इसी दिन एक अलग कार्रवाई में, ACB ने जोगुलम्बा गडवाल जिले के वड्डेपल्ली मंडल के मंडल सर्वेक्षक कम्मारी ब्रह्मैया को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। ब्यूरो के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता के माता-पिता की जमीन का सर्वेक्षण करने के बदले ₹15,000 की माँग की थी।
गौरतलब है कि 6 मई 2026 को आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर ₹5,000 नकद अग्रिम के रूप में पहले ही ले लिए थे। शेष ₹10,000 की रिश्वत उनके पास से बरामद की गई। उन्हें भी गिरफ्तार कर नामपल्ली स्थित विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया।
ACB की कार्यप्रणाली और आरोप
ACB ने अपने बयान में कहा कि दोनों आरोपी अधिकारियों ने अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए अपने सरकारी कर्तव्य का अनुचित और बेईमानी से निर्वहन किया। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकारी एजेंसियों की सक्रियता पर सार्वजनिक ध्यान बढ़ा है।
दोनों मामलों की जाँच अभी जारी है।
आम जनता के लिए संदेश
ACB ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई लोक सेवक रिश्वत की माँग करता है, तो वे तत्काल टोल-फ्री नंबर 1064 पर संपर्क कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
दोनों मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और जाँच के परिणाम आने वाले दिनों में सामने आने की उम्मीद है।