30 अक्टूबर 2026
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सेबी ने एफपीआई के केवाईसी नियम आसान किए, समीक्षा अवधि अब 8 साल तक; 1 दिसंबर से लागू

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सेबी ने एफपीआई के केवाईसी नियम आसान किए, समीक्षा अवधि अब 8 साल तक; 1 दिसंबर से लागू

सारांश

सेबी ने एफपीआई के लिए केवाईसी समीक्षा की अनिवार्यता को बड़े पैमाने पर शिथिल किया — वार्षिक चक्र अब द्विवार्षिक होगा और त्रि-वार्षिक अब आठ साल में एक बार। 1 दिसंबर 2026 से लागू यह बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाज़ार को और सुलभ बनाने की दिशा में सेबी का ताज़ा कदम है।

मुख्य बातें

सेबी ने 30 अक्टूबर 2026 को एफपीआई के लिए केवाईसी समीक्षा की समय-सीमा संशोधित की।
वार्षिक केवाईसी समीक्षा अब हर 2 वर्ष में एक बार; त्रि-वार्षिक समीक्षा अब हर 8 वर्ष में एक बार होगी।
स्वागत-एफआई एफपीआई की केवाईसी समीक्षा अवधि 10 वर्ष पर अपरिवर्तित रहेगी।
जीएस-एफपीआई को मिली मौजूदा छूट भी पहले जैसी बनी रहेगी।
पंजीकरण नवीनीकरण के समय बदलाव-पुष्टि की अलग प्रक्रिया समाप्त की जाएगी।
नए प्रावधान 1 दिसंबर 2026 से प्रभावी होंगे।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए नियामकीय अनुपालन को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। सेबी ने केवाईसी (Know Your Customer) समीक्षा की समय-सीमा को एक साल से बढ़ाकर दो साल और तीन साल से बढ़ाकर आठ साल कर दिया है। ये संशोधित प्रावधान 1 दिसंबर 2026 से प्रभावी होंगे।

मुख्य बदलाव क्या हैं

सेबी के आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, वर्तमान नियामक ढाँचे में एफपीआई को लागू श्रेणी और अन्य मानदंडों के आधार पर सालाना अथवा हर तीन वर्ष पर केवाईसी समीक्षा करानी होती थी। संशोधित नियमों में यह चक्र क्रमशः दो वर्ष और आठ वर्ष कर दिया गया है।

हालाँकि, स्वागत-एफआई एफपीआई के मामले में केवाईसी समीक्षा की समय-सीमा पहले की तरह 10 वर्ष ही बनी रहेगी। इसी प्रकार, जीएस-एफपीआई को मिली मौजूदा छूट भी अपरिवर्तित रहेगी।

दोहरी प्रक्रिया समाप्त होगी

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण जारी रखने के समय पहले दी गई जानकारी में बदलाव के संबंध में अलग से पुष्टि लेने की प्रक्रिया अब बंद कर दी जाएगी। नियामक के अनुसार इस कदम का उद्देश्य एक समान प्रकृति की अनेक आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाना और बार-बार होने वाले अनुपालन के बोझ को कम करना है।

निवेशक-अनुकूल माहौल की ओर कदम

सेबी के सर्कुलर में रेखांकित किया गया है कि यह बदलाव उसके उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य एफपीआई के लिए एक सुगम, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नियामक वातावरण तैयार करना है। प्रक्रियागत और बार-बार दोहराई जाने वाली औपचारिकताओं को घटाने से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाज़ार में प्रवेश और परिचालन आसान होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक पूँजी को आकर्षित करने के लिए अपने वित्तीय बाज़ारों को तेज़ी से सुलभ और कुशल बनाने पर ज़ोर दे रहा है। गौरतलब है कि सेबी हाल के महीनों में एफपीआई से जुड़े अनेक नियमों की समीक्षा कर चुका है।

आगे क्या होगा

नए प्रावधान 1 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। मौजूदा एफपीआई को अपनी श्रेणी के अनुसार अद्यतन समय-सीमा के भीतर केवाईसी समीक्षा करानी होगी। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अनुपालन लागत घटाने और दीर्घकालिक विदेशी निवेश प्रवाह को प्रोत्साहित करने में सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक स्वाभाविक सवाल भी उठता है — लंबी समीक्षा अवधि से निगरानी की धार कुंद तो नहीं होगी? सेबी ने हाल के वर्षों में एफपीआई के स्वामित्व की पारदर्शिता को लेकर कड़े रुख अपनाए हैं; अब वही नियामक अनुपालन बोझ घटाने की राह पर है। दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाना असली परीक्षा होगी। वैश्विक पूँजी को आकर्षित करने की होड़ में यह कदम सही दिशा में है, बशर्ते जोखिम-आधारित निगरानी तंत्र मज़बूत बना रहे।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने एफपीआई के केवाईसी नियमों में क्या बदलाव किया है?
सेबी ने एफपीआई की केवाईसी समीक्षा की समय-सीमा को एक साल से बढ़ाकर दो साल और तीन साल से बढ़ाकर आठ साल कर दिया है। यह बदलाव 1 दिसंबर 2026 से लागू होगा।
नए केवाईसी नियम कब से प्रभावी होंगे?
सेबी के सर्कुलर के अनुसार संशोधित प्रावधान 1 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। मौजूदा एफपीआई को अपनी श्रेणी के अनुसार नई समय-सीमा का पालन करना होगा।
क्या सभी एफपीआई को यह राहत मिलेगी?
अधिकांश एफपीआई श्रेणियों को राहत मिलेगी, लेकिन स्वागत-एफआई एफपीआई के लिए केवाईसी समीक्षा की समय-सीमा 10 वर्ष पर पहले जैसी बनी रहेगी। जीएस-एफपीआई को मिली मौजूदा छूट भी अपरिवर्तित रहेगी।
सेबी ने यह कदम क्यों उठाया?
सेबी का लक्ष्य दोहराव वाली अनुपालन आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाना और विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाज़ार में एक सुगम, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नियामक माहौल तैयार करना है। इससे एफपीआई पर अनुपालन का बोझ कम होगा और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा मिलेगा।
पंजीकरण नवीनीकरण की प्रक्रिया में और क्या बदला है?
सेबी ने पंजीकरण जारी रखने के समय पूर्व में दी गई जानकारी में बदलाव के संबंध में अलग से पुष्टि लेने की प्रक्रिया समाप्त करने का निर्णय लिया है। इससे एफपीआई को बार-बार एक जैसी औपचारिकताएँ पूरी करने से मुक्ति मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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