30 अक्टूबर 2026
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मक्का के पास ड्रोन रोके जाने के सऊदी दावे को हूती ने नकारा, हमले से साफ इनकार

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मक्का के पास ड्रोन रोके जाने के सऊदी दावे को हूती ने नकारा, हमले से साफ इनकार

सारांश

मक्का के पास ड्रोन रोके जाने का सऊदी गठबंधन का दावा और हूती का सीधा खंडन — यह टकराव सिर्फ एक ड्रोन की कहानी नहीं है। इस्लाम के सर्वपवित्र शहर का नाम जुड़ते ही यह विवाद धार्मिक संवेदनशीलता और सैन्य प्रचार की जटिल परतें उजागर करता है, जो एक दशक से जारी यमन संघर्ष को और उलझाता है।

मुख्य बातें

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने 30 अक्टूबर 2026 को मक्का क्षेत्र में ड्रोन भेजने के सऊदी दावे को 'झूठा' बताया।
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने दावा किया था कि हूती ड्रोन को मक्का के दक्षिण में ही रोककर नष्ट कर दिया गया।
अल-मलिकी ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को 'रेड लाइन' बताते हुए जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी।
गठबंधन के अनुसार, यह कथित तौर पर मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश है; पहली 27 जुलाई 2017 को बताई जाती है।
यमन में संघर्ष दिसंबर 2014 से जारी है; 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।

यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब पर किसी भी प्रकार का हमला करने से स्पष्ट रूप से इनकार किया। यह बयान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के उस दावे के तुरंत बाद आया, जिसमें कहा गया था कि मक्का क्षेत्र में हूतियों के एक ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया गया। मक्का, इस्लाम का सर्वाधिक पवित्र शहर, इस विवाद के केंद्र में है।

हूती का खंडन और सऊदी दावा

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में सऊदी गठबंधन के इस दावे को 'झूठा' करार दिया। उन्होंने कहा कि समूह ने शुक्रवार को सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई भी सैन्य अभियान नहीं चलाया।

इससे पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने एक्स पर जानकारी दी थी कि हूती समूह की ओर से भेजे गए एक ड्रोन को मक्का क्षेत्र में रोककर नष्ट कर दिया गया। अल-मलिकी ने इस्लाम के दोनों पवित्रतम स्थलों और वहाँ आने वाले जायरीनों की सुरक्षा को 'रेड लाइन' बताते हुए आवश्यक जवाबी कदम उठाने की चेतावनी भी दी।

बढ़ते तनाव का पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच सीमा पार हमलों में स्पष्ट तेजी आई है। सऊदी अरब ने यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर हवाई हमले किए हैं, जबकि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। गठबंधन के प्रवक्ता का दावा है कि मक्का को निशाना बनाने की यह हूतियों की कथित तौर पर दूसरी कोशिश है — इससे पहले 27 जुलाई 2017 को भी गठबंधन ने हूतियों पर बैलिस्टिक मिसाइल से मक्का को निशाना बनाने का आरोप लगाया था।

यह ऐसे समय में आया है जब यमन में दिसंबर 2014 से संघर्ष जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। तत्पश्चात 2015 में यमन की सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।

हूती नेतृत्व का पहले का रुख

यह पहली बार नहीं है जब हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोपों को अस्वीकार किया हो। सितंबर में हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने भी ऐसे आरोपों को 'मनगढ़ंत और भ्रामक जानकारी' बताया था। उन्होंने अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित एक संबोधन में आरोप लगाया था कि यमन पर सैन्य कार्रवाई के लिए व्यापक समर्थन जुटाने के उद्देश्य से इस तरह के झूठे दावे किए जा रहे हैं।

अल-हूती ने सऊदी अरब पर यह भी आरोप लगाया था कि तुलनात्मक रूप से शांत रहे दौर में भी राजनीतिक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, बल्कि हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर प्रतिबंध और सख्त किए गए। हवाई अड्डों के संचालन और आयात पर लगी पाबंदियाँ अब भी प्रमुख अनसुलझे मुद्दे बने हुए हैं।

आगे क्या हो सकता है

दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच यमन संघर्ष में कूटनीतिक गतिरोध गहराता दिख रहा है। सऊदी गठबंधन ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि हूती पक्ष किसी भी हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और भड़काएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वह मुस्लिम विश्व में हूतियों को धार्मिक रूप से अस्वीकार्य ठहराने की कोशिश करता है। दूसरी ओर, हूती हर बार इन दावों को प्रचार बताकर यमन पर जारी नाकेबंदी की ओर ध्यान खींचते हैं। एक दशक से अधिक लंबे इस संघर्ष में जहाँ सत्यापन स्वतंत्र रूप से असंभव है, वहाँ ऐसे परस्पर-विरोधी दावों की जाँच के बिना किसी एक पक्ष को सच मान लेना पत्रकारिता की बुनियादी जिम्मेदारी से चूकना होगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हूती ने मक्का ड्रोन हमले के सऊदी दावे को क्यों नकारा?
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने कहा कि समूह ने 30 अक्टूबर को सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई सैन्य अभियान नहीं चलाया और सऊदी दावा 'झूठा' है। हूती नेतृत्व का कहना है कि ऐसे आरोप यमन पर सैन्य कार्रवाई के लिए समर्थन जुटाने के लिए गढ़े जाते हैं।
सऊदी गठबंधन ने मक्का के पास ड्रोन रोकने का क्या दावा किया?
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने एक्स पर बताया कि रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्सेज ने हूती ड्रोन को मक्का के दक्षिण में ही रोककर नष्ट कर दिया, इससे पहले कि वह शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करता। गठबंधन ने इसे मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कथित कोशिश बताया।
यमन में यह संघर्ष कब से जारी है?
यमन में यह संघर्ष दिसंबर 2014 से चल रहा है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया।
क्या पहले भी मक्का पर ड्रोन या मिसाइल हमले का दावा किया गया है?
हाँ, सऊदी गठबंधन के अनुसार 27 जुलाई 2017 को भी हूतियों पर बैलिस्टिक मिसाइल से मक्का को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था। सितंबर में हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने भी तब के आरोपों को 'मनगढ़ंत और भ्रामक' बताया था।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव के प्रमुख अनसुलझे मुद्दे क्या हैं?
हवाई अड्डों के संचालन और आयात पर लगी पाबंदियाँ अब भी प्रमुख अनसुलझे मुद्दे बने हुए हैं। हूती नेतृत्व का आरोप है कि सऊदी अरब शांतिकाल में भी हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर प्रतिबंध ढीले करने की बजाय और सख्त कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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