मक्का के पास ड्रोन रोके जाने के सऊदी दावे को हूती ने नकारा, हमले से साफ इनकार
सारांश
मुख्य बातें
यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब पर किसी भी प्रकार का हमला करने से स्पष्ट रूप से इनकार किया। यह बयान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के उस दावे के तुरंत बाद आया, जिसमें कहा गया था कि मक्का क्षेत्र में हूतियों के एक ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया गया। मक्का, इस्लाम का सर्वाधिक पवित्र शहर, इस विवाद के केंद्र में है।
हूती का खंडन और सऊदी दावा
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरीया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में सऊदी गठबंधन के इस दावे को 'झूठा' करार दिया। उन्होंने कहा कि समूह ने शुक्रवार को सऊदी अरब के क्षेत्र की ओर कोई भी सैन्य अभियान नहीं चलाया।
इससे पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने एक्स पर जानकारी दी थी कि हूती समूह की ओर से भेजे गए एक ड्रोन को मक्का क्षेत्र में रोककर नष्ट कर दिया गया। अल-मलिकी ने इस्लाम के दोनों पवित्रतम स्थलों और वहाँ आने वाले जायरीनों की सुरक्षा को 'रेड लाइन' बताते हुए आवश्यक जवाबी कदम उठाने की चेतावनी भी दी।
बढ़ते तनाव का पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच सीमा पार हमलों में स्पष्ट तेजी आई है। सऊदी अरब ने यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर हवाई हमले किए हैं, जबकि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। गठबंधन के प्रवक्ता का दावा है कि मक्का को निशाना बनाने की यह हूतियों की कथित तौर पर दूसरी कोशिश है — इससे पहले 27 जुलाई 2017 को भी गठबंधन ने हूतियों पर बैलिस्टिक मिसाइल से मक्का को निशाना बनाने का आरोप लगाया था।
यह ऐसे समय में आया है जब यमन में दिसंबर 2014 से संघर्ष जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। तत्पश्चात 2015 में यमन की सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।
हूती नेतृत्व का पहले का रुख
यह पहली बार नहीं है जब हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोपों को अस्वीकार किया हो। सितंबर में हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने भी ऐसे आरोपों को 'मनगढ़ंत और भ्रामक जानकारी' बताया था। उन्होंने अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित एक संबोधन में आरोप लगाया था कि यमन पर सैन्य कार्रवाई के लिए व्यापक समर्थन जुटाने के उद्देश्य से इस तरह के झूठे दावे किए जा रहे हैं।
अल-हूती ने सऊदी अरब पर यह भी आरोप लगाया था कि तुलनात्मक रूप से शांत रहे दौर में भी राजनीतिक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, बल्कि हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर प्रतिबंध और सख्त किए गए। हवाई अड्डों के संचालन और आयात पर लगी पाबंदियाँ अब भी प्रमुख अनसुलझे मुद्दे बने हुए हैं।
आगे क्या हो सकता है
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच यमन संघर्ष में कूटनीतिक गतिरोध गहराता दिख रहा है। सऊदी गठबंधन ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि हूती पक्ष किसी भी हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और भड़काएगी।