आईटीईसी दिवस 2026: भारत में प्रशिक्षित 4,200+ मालदीवी पेशेवर 'सच्चे राजदूत' — भारतीय उच्चायुक्त
सारांश
मुख्य बातें
भारत-मालदीव द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देते हुए, मालदीव में भारत के उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम ने आईटीईसी दिवस 2026 के अवसर पर कहा कि भारत के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित मालदीवी पेशेवर दोनों देशों के संबंधों को मज़बूत करने वाले 'सच्चे राजदूत' हैं। माले में आयोजित इस आधिकारिक समारोह में उनका संदेश भारत के उप उच्चायुक्त कुमार गौरव ने पढ़कर सुनाया।
समारोह का मुख्य घटनाक्रम
इस कार्यक्रम में मालदीव के उच्च शिक्षा, श्रम और कौशल विकास मंत्री डॉ. इस्माइल शफीउ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में आईटीईसी (इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) कार्यक्रम के पूर्व छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की।
मालदीव स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम की झलकियाँ साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1964 से आईटीईसी कार्यक्रम के तहत हर साल 600 छात्रवृत्तियों के माध्यम से मालदीवी प्रतिभाओं को कौशल विकास का अवसर दिया जा रहा है।
उप उच्चायुक्त का संदेश
उच्चायुक्त बालासुब्रमण्यम का संदेश पढ़ते हुए कुमार गौरव ने कहा, 'हम आधिकारिक रूप से राजनयिक हैं, लेकिन मेरा मानना है कि आप ही हमारे सच्चे राजदूत हैं, जो लोगों के बीच संबंधों को मज़बूत कर रहे हैं और दोनों सरकारों को और करीब ला रहे हैं।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आईटीईसी कार्यक्रम की सफलता केवल प्रमाणपत्रों की संख्या से नहीं, बल्कि उन प्रशिक्षित पेशेवरों के अपने संस्थानों और समुदायों में योगदान से मापी जाती है। भारत की प्रशिक्षण पहलें 'पड़ोसी प्रथम' नीति और विजन महासागर के तहत संचालित हैं — यानी ये मालदीव की विकास-संबंधी ज़रूरतों के अनुरूप हैं, न कि किसी एकरूपी ढाँचे पर आधारित।
आँकड़ों में प्रशिक्षण का दायरा
उप उच्चायुक्त गौरव के अनुसार, पिछले छह से सात वर्षों में 4,200 से अधिक मालदीवी पेशेवरों ने भारत में विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनमें प्रमुख आँकड़े इस प्रकार हैं:
भारत के राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) और मालदीव सिविल सेवा आयोग के बीच समझौते के तहत 1,269 सिविल सेवकों को प्रशिक्षण दिया गया। मालदीव लोकल गवर्नमेंट अथॉरिटी (एलजीए) और भारत के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) के समझौते के तहत 334 स्थानीय परिषद और सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।
भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और मालदीव कस्टम्स सेवा (एमसीएस) के सहयोग से 360 सीमा शुल्क अधिकारियों को प्रशिक्षण मिला। भारत की राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी और मालदीव न्यायिक सेवा आयोग के सहयोग से 323 न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। वर्ष 2014 से रक्षा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के तहत मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (एमएनडीएफ) के 1,948 कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
भारत-मालदीव संबंधों की व्यापक पृष्ठभूमि
यह समारोह ऐसे समय में आया जब इसी महीने की शुरुआत में मालदीव ने भारतीय रुपए की मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत ₹30 अरब की पहली निकासी को आगे बढ़ाने के भारत सरकार के फैसले के लिए आभार व्यक्त किया था।
मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम आदम ने 16 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को धन्यवाद देते हुए कहा था कि यह फैसला दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मज़बूत करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व में मालदीव अपने प्रमुख द्विपक्षीय साझेदारों के साथ संबंध और गहरे करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि यह संबंध आपसी सम्मान, समझ और सद्भावना पर टिके हैं, और आईटीईसी जैसे क्षमता-निर्माण कार्यक्रम इस साझेदारी को ज़मीनी स्तर पर जीवंत रखते हैं। भविष्य में भारत-मालदीव सहयोग के और विस्तार की संभावना इन्हीं संस्थागत नींवों पर टिकी है।