भारत ने मालदीव की ₹30 अरब करेंसी स्वैप सुविधा विस्तार को मंजूरी दी, 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत बड़ा कदम
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने 16 अक्टूबर 2026 को मालदीव सरकार के ₹30 अरब की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने के अनुरोध को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई।
करेंसी स्वैप व्यवस्था की पृष्ठभूमि
यह सुविधा सार्क देशों के लिए करेंसी स्वैप ढाँचे के अंतर्गत प्रदान की जा रही है। इस व्यवस्था पर अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। इस सुविधा के तहत ₹30 अरब की पहली किस्त इसी वर्ष 23 अप्रैल को मालदीव सरकार को हस्तांतरित की गई थी।
गौरतलब है कि 2012 में इस ढाँचे की स्थापना के बाद से अब तक RBI मालदीव को कुल 1.1 अरब डॉलर से अधिक की स्वैप सहायता प्रदान कर चुका है। 2024-27 के ढाँचे में रियायती ब्याज दरें और अन्य अनुकूल शर्तें भी शामिल हैं।
मालदीव को वित्तीय स्थिरता में सहायता
करेंसी स्वैप व्यवस्था के तहत मालदीव को भारतीय रुपये उपलब्ध होते हैं, जिससे संकट के समय नकदी की सुलभता और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना सहज हो जाता है। यह सुविधा मालदीव की उस कमज़ोर विदेशी मुद्रा स्थिति को मज़बूती देती है, जो पर्यटन पर अत्यधिक निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए एक पुरानी चुनौती रही है।
भारत ने करेंसी स्वैप के अतिरिक्त मालदीव की सरकारी प्रतिभूतियों में भी निवेश किया है। 250 मिलियन डॉलर और 100 मिलियन डॉलर के दो दीर्घकालिक ट्रेजरी बॉन्ड खरीदे गए थे। इसके अलावा, भारत द्वारा खरीदे गए 150 मिलियन डॉलर मूल्य के तीन ट्रेजरी बिलों का भुगतान मालदीव कर चुका है। इन प्रतिभूतियों पर 42.8 मिलियन डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने वहन किया था।
रणनीतिक महत्व और 'महासागर' विज़न
भारत के लिए यह निरंतर वित्तीय सहयोग महज आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच मालदीव के साथ मज़बूत संबंध भारत की समुद्री सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा हैं। आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और 'महासागर' विज़न — जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक उन्नति पर आधारित है — में मालदीव का विशेष स्थान है।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति मुइज्जू की अगुआई वाली सरकार ने सत्ता में आने के शुरुआती दौर में भारत से दूरी बनाने के संकेत दिए थे। इसके बावजूद दोनों देशों के आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंध सामान्य बने रहे।
व्यापक साझेदारी की दिशा में
भारत अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज्जू की यात्रा के दौरान अपनाई गई 'व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टिकोण' को ज़मीन पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। इस ताज़े निर्णय को उसी व्यापक ढाँचे की अगली कड़ी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह कदम यह संकेत देता है कि नई दिल्ली अपने निकटतम समुद्री पड़ोसी के साथ दीर्घकालिक वित्तीय जुड़ाव को कूटनीतिक उतार-चढ़ाव से ऊपर रखती है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की दिशा और गहराई और स्पष्ट होगी।