भारत का ऐतिहासिक कदम: मालदीव को 30 अरब INR की मुद्रा विनिमय सुविधा मंजूर

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भारत का ऐतिहासिक कदम: मालदीव को 30 अरब INR की मुद्रा विनिमय सुविधा मंजूर

सारांश

भारत ने SAARC मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत मालदीव को 30 अरब INR की पहली निकासी मंजूर की। 2012 से अब तक RBI मालदीव को 1.1 अरब डॉलर की सहायता दे चुका है। 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत भारत हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत कर रहा है।

Key Takeaways

  • भारत सरकार ने SAARC मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत मालदीव को 30 अरब INR की पहली निकासी को मंजूरी दी।
  • 2024-2027 की व्यवस्था पर राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू की अक्टूबर 2024 की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए थे।
  • 2012 से अब तक भारतीय रिजर्व बैंक मालदीव को कुल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की विनिमय सहायता दे चुका है।
  • पिछले वर्ष भारत ने मालदीव के 100 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिलों को आपातकालीन सहायता के रूप में रोल-ओवर किया था।
  • भारत ने 2026-27 के लिए मालदीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, गिट्टी और रेत के निर्यात की भी अनुमति दी है।
  • यह सहायता भारत की 'पड़ोसी पहले' और 'विजन महासागर' नीति का हिस्सा है, जो हिंद महासागर में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अहम है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025 (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' नीति को एक बार फिर अमल में लाते हुए मालदीव को बड़ी आर्थिक राहत दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव सरकार के बीच हुई सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था के अंतर्गत 30 अरब भारतीय रुपये (INR) की पहली निकासी को केंद्र सरकार ने औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मालदीव की बिगड़ती विदेशी मुद्रा स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाएगा।

क्या है यह मुद्रा विनिमय व्यवस्था?

सार्क देशों के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था एक ऐसा तंत्र है जिसके तहत सदस्य देश भारतीय रिजर्व बैंक से रुपये या विदेशी मुद्रा उधार लेकर अपनी अल्पकालिक आर्थिक जरूरतें पूरी कर सकते हैं। इस व्यवस्था की शुरुआत 2012 में हुई थी और तब से अब तक RBI मालदीव को कुल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर का विनिमय सहयोग प्रदान कर चुका है।

वर्तमान 2024-2027 की व्यवस्था पर राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू की अक्टूबर 2024 में भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। इस नई व्यवस्था में ब्याज दरों और अन्य शर्तों में विशेष रियायतें शामिल की गई हैं, जो मालदीव के लिए पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हैं।

पिछली सहायता और वर्तमान संदर्भ

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 में इसी व्यवस्था के तहत मालदीव ने 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की निकासी की थी, जिसकी अवधि 23 अप्रैल 2026 को समाप्त होनी है। इसके अलावा पिछले वर्ष भारत ने मालदीव सरकार के अनुरोध पर आपातकालीन वित्तीय सहायता के रूप में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के ट्रेजरी बिलों को रोल-ओवर भी किया था।

यह सहायता ऐसे समय में आई है जब मालदीव अपने विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ते राजकोषीय दबाव से जूझ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी मालदीव की आर्थिक स्थिति पर चिंता जता चुका है।

आवश्यक वस्तुओं का निर्यात भी जारी

इसी माह भारत सरकार ने मालदीव के अनुरोध पर एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत वर्ष 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात की अनुमति भी दी है। इनमें अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत शामिल हैं।

मालदीव में भारतीय उच्चायोग ने पुष्टि की है कि यह सहायता भारत की निरंतर आर्थिक और वित्तीय प्रतिबद्धता का हिस्सा है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करती है।

भारत-मालदीव संबंधों का व्यापक परिप्रेक्ष्य

मालदीव भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'विजन महासागर' के अंतर्गत एक प्रमुख रणनीतिक भागीदार है। हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति भारत के समुद्री सुरक्षा हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुइज़ू के शुरुआती कार्यकाल में भारत-मालदीव संबंधों में कुछ तनाव देखा गया था, जब उन्होंने भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने की मांग की थी। लेकिन इसके बावजूद आर्थिक और मानवीय सहायता के मोर्चे पर भारत ने अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी — जो इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ दीर्घकालिक संबंधों को राजनीतिक उठापटक से ऊपर रखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए भारत की यह वित्तीय कूटनीति हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। 2012 से अब तक 1.1 अरब डॉलर से अधिक की विनिमय सहायता इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

आने वाले महीनों में भारत और मालदीव के बीच और अधिक द्विपक्षीय समझौतों और विकास परियोजनाओं की घोषणा संभव है, जो इस साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जा सकती है।

Point of View

बल्कि हिंद महासागर में रणनीतिक प्रभाव बनाए रखने की सुविचारित कूटनीति है। विरोधाभास यह है कि राष्ट्रपति मुइज़ू ने सत्ता में आते ही 'इंडिया आउट' का नारा दिया था, फिर भी भारत ने आर्थिक मोर्चे पर उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा — यही भारत की परिपक्व पड़ोस नीति की असली ताकत है। चीन जहां कर्ज के जाल में फंसाता है, वहीं भारत रियायती शर्तों पर सहायता देकर विश्वास अर्जित करता है। 2012 से 1.1 अरब डॉलर की विनिमय सहायता यह बताती है कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति केवल नारा नहीं, एक जीवंत रणनीतिक प्रतिबद्धता है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने मालदीव को 30 अरब INR की सहायता क्यों दी?
भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत SAARC मुद्रा विनिमय व्यवस्था के अंतर्गत मालदीव को 30 अरब INR की पहली निकासी मंजूर की है। इसका उद्देश्य मालदीव की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाना है।
SAARC मुद्रा विनिमय व्यवस्था क्या है?
SAARC मुद्रा विनिमय व्यवस्था 2012 में शुरू हुई एक ऐसी प्रणाली है जिसके तहत सार्क सदस्य देश भारतीय रिजर्व बैंक से रुपये या विदेशी मुद्रा उधार लेकर अपनी अल्पकालिक आर्थिक जरूरतें पूरी कर सकते हैं। अब तक इस व्यवस्था के तहत मालदीव को 1.1 अरब डॉलर से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।
क्या भारत ने पहले भी मालदीव को इस तरह की सहायता दी है?
हां, अक्टूबर 2024 में भी इसी व्यवस्था के तहत मालदीव ने 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर लिए थे। इसके अलावा भारत ने 100 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिलों को रोल-ओवर भी किया था।
इस सहायता का मालदीव की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
यह सहायता मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने और राजकोषीय दबाव कम करने में मदद करेगी। रियायती ब्याज दरों और अनुकूल शर्तों के कारण यह मालदीव के लिए चीन जैसे वैकल्पिक स्रोतों की तुलना में कहीं बेहतर विकल्प है।
भारत मालदीव को आवश्यक वस्तुएं भी निर्यात कर रहा है?
हां, भारत सरकार ने 2026-27 के लिए मालदीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत के निर्यात की अनुमति दी है। यह एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत दी गई है।
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