भारत का ऐतिहासिक फैसला: मालदीव को 30 अरब INR की मुद्रा विनिमय सुविधा मंजूर

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भारत का ऐतिहासिक फैसला: मालदीव को 30 अरब INR की मुद्रा विनिमय सुविधा मंजूर

सारांश

भारत ने मालदीव को सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत 30 अरब INR की पहली निकासी मंजूर की। 2012 से अब तक RBI मालदीव को 1.1 अरब डॉलर का विनिमय सहयोग दे चुका है। यह कदम 'पड़ोसी पहले' नीति और 'विजन महासागर' के तहत भारत-मालदीव संबंधों को नई ऊंचाई देता है।

Key Takeaways

  • भारत ने 23 अप्रैल 2025 को मालदीव को 30 अरब INR की मुद्रा विनिमय सुविधा की पहली निकासी मंजूर की।
  • यह सुविधा सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत दी गई है, जिसका समझौता अक्टूबर 2024 में RBI और मालदीव सरकार के बीच हुआ था।
  • 2012 से अब तक भारतीय रिजर्व बैंक मालदीव को कुल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर का विनिमय सहयोग दे चुका है।
  • इससे पहले अक्टूबर 2024 में 400 मिलियन USD की सुविधा दी गई थी, जिसकी अवधि 23 अप्रैल 2026 को समाप्त हुई।
  • भारत ने 2026-27 के लिए मालदीव को अंडे, चावल, प्याज, दालें सहित नौ आवश्यक वस्तुओं के निर्यात की भी अनुमति दी है।
  • मालदीव भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'विजन महासागर' के तहत एक प्रमुख रणनीतिक भागीदार देश है।

भारत-मालदीव आर्थिक सहयोग में नया अध्याय

नई दिल्ली, 23 अप्रैल — भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' नीति को एक बार फिर मजबूती से लागू करते हुए मालदीव को 30 अरब भारतीय रुपये (INR) की मुद्रा विनिमय सुविधा की पहली निकासी को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह सहायता 'सार्क देशों के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था' के ढांचे के तहत प्रदान की गई है। इस कदम से मालदीव की डगमगाती वित्तीय स्थिति को ठोस आधार मिलने की उम्मीद है।

क्या है यह मुद्रा विनिमय व्यवस्था?

मालदीव में भारतीय उच्चायोग ने पुष्टि की है कि यह सुविधा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव सरकार के बीच अक्टूबर 2024 में हस्ताक्षरित समझौते के अंतर्गत दी जा रही है। उस समझौते पर मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू की भारत यात्रा के दौरान दस्तखत हुए थे। इस व्यवस्था के तहत मालदीव भारत से रुपये उधार लेकर अपनी घरेलू आर्थिक जरूरतें पूरी कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले अक्टूबर 2024 में इसी ढांचे के तहत मालदीव को 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सुविधा दी गई थी, जिसकी समयसीमा 23 अप्रैल 2026 को समाप्त हुई। अब नई निकासी उसी की अगली कड़ी के रूप में आई है।

रियायती शर्तें और दीर्घकालिक रूपरेखा

2024-2027 की व्यवस्था के तहत वर्तमान INR विनिमय सुविधा में ब्याज दरों और अन्य शर्तों में विशेष रियायतें शामिल हैं, जो मालदीव के लिए इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ता विकल्प बनाती हैं। यह व्यवस्था मालदीव को विदेशी मुद्रा भंडार के संकट से उबरने में मदद करती है।

2012 में सार्क विनिमय ढांचे की स्थापना के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक मालदीव को कुल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर का मुद्रा विनिमय सहयोग प्रदान कर चुका है। यह आंकड़ा भारत की लगातार और भरोसेमंद आर्थिक साझेदारी का प्रमाण है।

आपातकालीन सहायता और ट्रेजरी बिल रोल-ओवर

पिछले वर्ष भारत ने मालदीव सरकार के विशेष अनुरोध पर 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के ट्रेजरी बिलों को आगे बढ़ाया (रोल-ओवर किया) था। यह आपातकालीन वित्तीय सहायता उस समय दी गई जब मालदीव गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा था।

विश्लेषकों का मानना है कि मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर अत्यधिक निर्भर होने के कारण बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में भारत की यह मुद्रा विनिमय सुविधा एक स्थिर वित्तीय जीवनरेखा का काम करती है।

आवश्यक वस्तुओं का निर्यात और व्यापक सहयोग

इसी माह भारत ने मालदीव के अनुरोध पर वर्ष 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को भी मंजूरी दी है। इनमें अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत शामिल हैं। यह निर्यात एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत अनुमत किया गया है।

मालदीव भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'विजन महासागर' के तहत एक प्रमुख रणनीतिक भागीदार है। हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति इसे भारत के लिए सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

आने वाले महीनों में भारत और मालदीव के बीच और अधिक द्विपक्षीय समझौतों और सहयोग परियोजनाओं की संभावना है, जो दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेंगे।

Point of View

वही आज भारत से 30 अरब रुपये की मुद्रा सहायता ले रहे हैं। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति केवल कूटनीतिक शब्दावली नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निवेश है — जो हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का सबसे प्रभावी औजार साबित हो रही है। 2012 से 1.1 अरब डॉलर का विनिमय सहयोग यह स्पष्ट करता है कि भारत ने मालदीव को कभी छोड़ा नहीं, चाहे माले की सरकार कोई भी रही हो।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने मालदीव को 30 अरब INR की मुद्रा विनिमय सुविधा क्यों दी?
भारत ने मालदीव की वित्तीय स्थिरता को सहारा देने के लिए 'सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था' के तहत यह सुविधा दी है। यह भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति का हिस्सा है और दोनों देशों के बीच अक्टूबर 2024 में हुए समझौते पर आधारित है।
सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था क्या है और यह कब शुरू हुई?
सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था की शुरुआत 2012 में हुई थी, जिसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक सार्क सदस्य देशों को मुद्रा विनिमय सहायता प्रदान करता है। इस व्यवस्था के तहत मालदीव अब तक कुल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर का सहयोग प्राप्त कर चुका है।
क्या भारत ने मालदीव को पहले भी इस तरह की वित्तीय सहायता दी है?
हां, अक्टूबर 2024 में इसी व्यवस्था के तहत मालदीव को 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सुविधा दी गई थी, जिसकी अवधि 23 अप्रैल 2026 को समाप्त हुई। इसके अलावा भारत ने 100 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिलों को भी रोल-ओवर किया था।
मालदीव को भारत से कौन-कौन सी आवश्यक वस्तुएं निर्यात होती हैं?
भारत सरकार ने 2026-27 के लिए मालदीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत के निर्यात की अनुमति दी है। यह एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत दी गई है।
भारत-मालदीव मुद्रा विनिमय समझौते पर कब हस्ताक्षर हुए?
यह समझौता अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू की भारत यात्रा के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव सरकार के बीच हस्ताक्षरित हुआ था। यह 2024 से 2027 तक की अवधि के लिए वैध है।
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