माले में चीन-मालदीव निवेश सहयोग मंच: हरित ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था पर द्विपक्षीय सहयोग को नई गति
सारांश
मुख्य बातें
मालदीव की राजधानी माले में आयोजित चीन-मालदीव निवेश सहयोग मंच ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दी। 29 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस मंच में दोनों देशों की सरकारों और उद्यमों के प्रतिनिधियों ने समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा, कम ऊँचाई वाली अर्थव्यवस्था और डिजिटल भुगतान जैसे उभरते क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया। यह आयोजन मालदीव स्थित चीनी दूतावास और मालदीव के आर्थिक विकास, परिवहन एवं व्यापार मंत्रालय ने संयुक्त रूप से आयोजित किया।
मंच का उद्देश्य और विषय
इस मंच की केंद्रीय थीम थी — 'नई उत्पादकता के साथ हरित, नीली और डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं के समन्वित विकास को सशक्त बनाना'। इसका प्रमुख लक्ष्य दोनों देशों के उद्यमों के बीच औद्योगिक समन्वय को प्रोत्साहित करना, उभरते क्षेत्रों में निवेश सहयोग का दायरा बढ़ाना और चीन-मालदीव आर्थिक संबंधों को नई गतिशीलता प्रदान करना था। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के मंच अक्सर घोषणाओं तक सीमित रहते हैं, लेकिन प्रतिनिधियों ने ठोस क्षेत्रों पर केंद्रित चर्चा का दावा किया।
राष्ट्रपति मुइज्जू का संबोधन
मंच के उद्घाटन सत्र में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि मालदीव राष्ट्रीय विकास के एक महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहा है और उसे आर्थिक विविधीकरण तथा तीव्र नवाचार के माध्यम से अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि चीन-मालदीव सहयोग पहले से ही बुनियादी ढाँचे, विकास वित्तपोषण, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुका है।
मुइज्जू ने यह भी रेखांकित किया कि चीन मालदीव के विकास के अगले चरण में एक 'महत्वपूर्ण भागीदार' की भूमिका निभाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब मालदीव पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था की अति-निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है।
चीनी राजदूत की प्राथमिकताएँ
मालदीव में चीन के राजदूत खोंग श्यानहुआ ने कहा कि दोनों देश प्रौद्योगिकी, निवेश और स्थानीय संसाधनों में सहयोग को मज़बूत कर सकते हैं ताकि हरित और नीले संसाधनों को औद्योगिक लाभों में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने पूर्णतः विद्युतीकृत परिवहन, पर्यटन, मत्स्य पालन और सार्वजनिक सेवाओं में डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनुप्रयोग को प्रमुख फोकस क्षेत्र बताया।
भारत के लिए निहितार्थ
गौरतलब है कि मालदीव भारत के पड़ोस में स्थित एक द्वीपीय राष्ट्र है और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। चीन का मालदीव में बढ़ता निवेश-सहयोग इस क्षेत्र की भू-राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। भारत पारंपरिक रूप से मालदीव का सबसे करीबी विकास भागीदार रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में माले ने बीजिंग के साथ संबंध गहरे किए हैं।
आगे की दिशा
इस मंच के ज़रिए दोनों देशों के उद्यमों के बीच औद्योगिक साझेदारी की नींव रखी गई है। आने वाले महीनों में स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और मत्स्य पालन क्षेत्र में ठोस निवेश समझौतों की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन क्षेत्रों में सहयोग मालदीव की आर्थिक विविधीकरण की ज़रूरतों के अनुरूप है।