20 सितंबर 2026
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हूती विद्रोहियों का रियाद और यानबू पर बड़ा हमला, सऊदी एयर डिफेंस ने मिसाइल मार गिराई

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हूती विद्रोहियों का रियाद और यानबू पर बड़ा हमला, सऊदी एयर डिफेंस ने मिसाइल मार गिराई

सारांश

हूती विद्रोहियों ने रियाद और अरामको सुविधा यानबू पर बड़े पैमाने पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा किया। सऊदी एयर डिफेंस ने एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में नष्ट करने की पुष्टि की। जुलाई 2026 से शुरू यह ताज़ा टकराव यमन-सऊदी संघर्ष को खतरनाक नए स्तर पर ले जा रहा है।

मुख्य बातें

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारिया ने 20 सितंबर 2026 को रियाद और यानबू पर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया।
यानबू में अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाने का दावा; रियाद में विस्फोट की आवाज़ें सुनाई दीं और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास धुआं उठता देखा गया।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रियाद की ओर आई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में मार गिराने की पुष्टि की; बैश, ताइफ, फरसान और यानबू के हमले भी नाकाम बताए।
हूती ने कहा कि जब तक सऊदी हवाई हमले नहीं रुकते और यमन की पाबंदियाँ नहीं हटतीं, जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
ताज़ा तनाव जुलाई 2026 से शुरू हुआ; हूती ने 20 जुलाई को बाब अल-मंदब स्ट्रेट से सऊदी जहाजों पर रोक का ऐलान किया था।
यमन संघर्ष 2014 से जारी है; सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में हस्तक्षेप किया था।

यमन के हूती समूह ने 20 सितंबर 2026 को दावा किया कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और लाल सागर तट पर स्थित प्रमुख औद्योगिक व ऊर्जा केंद्र यानबू पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इस घटनाक्रम से दोनों पक्षों के बीच पहले से जारी टकराव के और गहरा होने की आशंका बढ़ गई है।

हमलों का ब्यौरा

हूती के नियंत्रण वाले अल-मसीरा टीवी पर जारी बयान में हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारिया ने कहा कि इन हमलों में 'बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन' का इस्तेमाल किया गया। सारिया के मुताबिक, पहले अभियान में रियाद के उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिन्हें उन्होंने 'संवेदनशील ठिकाने' बताया। दूसरे अभियान में यानबू स्थित सऊदी तेल कंपनी अरामको की एक सुविधा पर हमला किया गया।

सारिया ने दावा किया कि दोनों अभियान सफल रहे और निशाना बने ठिकानों पर 'भीषण आग' लग गई। यह बयान शनिवार को रियाद में दो बार धमाकों की आवाज़ सुनाई देने के बाद आया। दूसरी घटना के बाद किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के समीप धुआं उठता देखा गया और कुछ उड़ानों में देरी भी हुई।

सऊदी एयर डिफेंस की प्रतिक्रिया

सऊदी अधिकारियों ने पहले रियाद के लिए हवाई हमले का अलर्ट जारी किया, जिसे बाद में वापस लेते हुए बताया गया कि खतरा टल गया है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के हफ्तों में बढ़ते तनाव के बाद यह राजधानी के लिए इस तरह का पहला अलर्ट था।

बाद में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पुष्टि की कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया। गठबंधन ने यह भी कहा कि बैश, ताइफ, फरसान और यानबू पर हमलों को भी नाकाम कर दिया गया।

आरोप-प्रत्यारोप

गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने आरोप लगाया कि इन हमलों में 'आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों' को निशाना बनाया गया और आगे ऐसे हमलों को रोकने के लिए 'उचित कदम' उठाने की चेतावनी दी। हूती प्रवक्ता सारिया ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि रियाद पर हमले यमन में हूती-नियंत्रित इलाकों पर सऊदी हवाई हमलों के तेज होने का सीधा जवाब हैं।

सारिया ने स्पष्ट किया कि जब तक सऊदी हवाई हमले बंद नहीं होते और यमन पर लगी पाबंदियाँ नहीं हटाई जाती, तब तक हूती की जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी — जिसे उन्होंने 'जैसे को तैसा' की रणनीति बताया।

मौजूदा टकराव की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ताज़ा तनाव की शुरुआत जुलाई 2026 के मध्य में हुई थी, जब यमनी सशस्त्र बलों ने हूती-नियंत्रित सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया। इसका उद्देश्य ईरान का एक ऐसा यात्री विमान रोकना था जिसमें हूती का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल सवार था — यह दल खामनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होकर लौट रहा था। हूती ने उस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया और बैलिस्टिक मिसाइलों व ड्रोन से जवाबी हमले शुरू किए।

20 जुलाई 2026 को हूती ने बाब अल-मंदब स्ट्रेट से सऊदी जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी का ऐलान किया। तब से समूह ने सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब स्थित तेल सुविधाओं पर कई हमलों का दावा किया है।

यमन संघर्ष का व्यापक संदर्भ

यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत से जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा किया था। इसके बाद मार्च 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था। एक दशक से अधिक समय बाद यह संघर्ष नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँचता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वैश्विक तेल बाज़ार के लिए सीधी चेतावनी है। जुलाई 2026 से शुरू हुई इस ताज़ा बढ़ोतरी में बाब अल-मंदब नाकेबंदी, तेल टैंकरों पर हमले और अब राजधानी को निशाना बनाना — यह तीन-स्तरीय दबाव की रणनीति है जो पहले कभी इतनी समन्वित नहीं दिखी। सऊदी एयर डिफेंस की मिसाइल-रोक क्षमता आश्वस्त करती है, लेकिन किंग खालिद एयरपोर्ट के पास धुएं और उड़ान देरी की तस्वीरें बताती हैं कि 'खतरा टला' की सरकारी घोषणा और ज़मीनी हकीकत में फर्क है। एक दशक पुराने इस संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मध्यस्थता की कोशिशें बार-बार विफल हुई हैं — बिना किसी राजनयिक ढाँचे के, यह वृद्धि चक्र टूटने का कोई संकेत नहीं दिखाता।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले क्यों किए?
हूती प्रवक्ता याह्या सारिया के अनुसार, ये हमले यमन में हूती-नियंत्रित इलाकों पर सऊदी हवाई हमलों के तेज होने का जवाब हैं। सारिया ने कहा कि जब तक सऊदी बमबारी और यमन पर लगी पाबंदियाँ जारी रहेंगी, जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी।
रियाद और यानबू पर किस तरह के हथियारों से हमला किया गया?
हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि हमलों में 'बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन' का इस्तेमाल किया गया। यानबू में अरामको की एक सुविधा को विशेष रूप से निशाना बताया गया।
सऊदी एयर डिफेंस ने हमले को कितनी सफलता से रोका?
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पुष्टि की कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में नष्ट कर दिया। गठबंधन ने बैश, ताइफ, फरसान और यानबू पर हमलों को भी नाकाम करने का दावा किया, हालाँकि रियाद में विस्फोट की आवाज़ें सुनी गईं और एयरपोर्ट के पास धुआं उठता देखा गया।
ताज़ा हूती-सऊदी टकराव की शुरुआत कब और कैसे हुई?
मौजूदा तनाव जुलाई 2026 के मध्य में तब शुरू हुआ जब यमनी सशस्त्र बलों ने सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया — ताकि ईरान से लौट रहे हूती प्रतिनिधिमंडल के विमान को रोका जा सके। हूती ने इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया और 20 जुलाई को बाब अल-मंदब स्ट्रेट से सऊदी जहाजों पर रोक लगाने की घोषणा की।
यमन संघर्ष कब से चल रहा है और इसकी मूल वजह क्या है?
यमन संघर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार को बहाल करने के लिए मार्च 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया, जो एक दशक से अधिक समय बाद भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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