हौतियों का दावा: नज़रान एयरपोर्ट और सऊदी अरामको तेल केंद्र पर ड्रोन हमला
सारांश
मुख्य बातें
यमन के हौती विद्रोही समूह ने गुरुवार, 20 अगस्त को दावा किया कि उसने सऊदी अरब के दक्षिणी नज़रान क्षेत्र में स्थित नज़रान एयरपोर्ट और सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की एक तेल सुविधा को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। हौती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने यह दावा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में किया, हालाँकि सऊदी सरकार या अरामको की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हमलों का विवरण
याह्या सरी के अनुसार, समूह ने दो अलग-अलग ड्रोन हमले किए — पहले ड्रोन ने नज़रान एयरपोर्ट पर एक 'संवेदनशील लक्ष्य' को निशाना बनाया, जबकि दूसरे ने अरामको की तेल सुविधा पर हमला किया। सरी ने दावा किया कि दोनों हमले अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल करने में सफल रहे। हालाँकि, उन्होंने किसी भी प्रकार के नुकसान या हताहतों की संख्या का कोई विवरण नहीं दिया।
हमलों की वजह: हौतियों का पक्ष
हौती समूह के अनुसार, ये हमले सऊदी अरब की ओर से यमन के उत्तरी सादा प्रांत के हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ के जवाब में किए गए। सादा प्रांत हौतियों का प्रमुख गढ़ है और इसकी सीमा सीधे सऊदी अरब से लगती है। गौरतलब है कि 20 जुलाई को हौती समूह ने सऊदी जहाजों पर समुद्री प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, आरोप लगाते हुए कि सऊदी अरब ने हौती-नियंत्रित इलाकों की नाकेबंदी कर रखी है।
यमन सरकारी सेना के दावे
इसी दिन, यमन की सरकारी सेना ने भी दावा किया कि उसने पिछले 24 घंटों में हौती ठिकानों के खिलाफ 81 सैन्य अभियान चलाए। सरकारी सेना के प्रवक्ता माजिद अल-नुजैली के अनुसार, इन अभियानों में कई मोर्चों पर हौती लड़ाकों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें कथित तौर पर कई लड़ाके और फील्ड कमांडर हताहत हुए। हौती समूह ने इन दावों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
व्यापक संदर्भ: बढ़ता तनाव
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब हौतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। 20 जुलाई के बाद से हौती समूह सऊदी टैंकरों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और एयरपोर्ट पर कई हमलों का दावा कर चुका है। साथ ही यमन में सरकार-नियंत्रित क्षेत्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी तेज हो गए हैं।
यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत से जारी है, जब हौतियों ने राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था। एक दशक से अधिक समय बाद भी यह संघर्ष जारी है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।