अमृतसर ASI हरजीत सिंह हत्याकांड: मुख्य आरोपी दीपक सिंह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, पाकिस्तानी हैंडलर का नेटवर्क बेनकाब
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब पुलिस ने 20 सितंबर 2026 की देर रात अमृतसर के ASI हरजीत सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी दीपक सिंह को तरनतारन के थांदा रोड नाके पर हुई मुठभेड़ में मार गिराया। आरोपी को गोली लगने के बाद अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई में उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिसकी तलाश में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है।
मुठभेड़ का घटनाक्रम
पुलिस कमिश्नर हरमनवीर सिंह गिल ने मीडिया को बताया कि 18 सितंबर को ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद से ही शहर और आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर सघन नाकाबंदी की गई थी। पुलिस को विश्वसनीय इनपुट मिले थे कि संदिग्ध इलाके में घूम रहे हैं और किसी अन्य टारगेट की तलाश में हैं।
जब पुलिस ने थांदा रोड नाके पर स्कूटी पर सवार दो संदिग्धों को रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने रुकने के बजाय पुलिस पार्टी पर सीधे फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस टीम के पीछा करने पर आरोपियों ने एक स्थान पर स्कूटी खड़ी करके फिर से गोलियाँ चलाईं।
हमलावरों की ओर से चलाई गई चार गोलियों में से दो पुलिस की गाड़ी पर लगीं, जबकि एक गोली CIA के एक जवान की छाती पर लगी। सौभाग्य से जवान ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उसकी जान बची। पुलिस ने आत्मरक्षा में 6 राउंड जवाबी फायर किए, जिसमें आरोपी दीपक सिंह घायल हो गया और बाद में उसने दम तोड़ दिया।
आरोपी की पहचान
मारे गए आरोपी की पहचान अमृतसर के मुले चक निवासी दीपक सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक आधार कार्ड और जाँच के अनुसार उसकी उम्र लगभग 25 से 28 वर्ष आंकी गई है। फरार दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए व्यापक कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है।
पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े साजिश के तार
पुलिस कमिश्नर ने प्रेस वार्ता में खुलासा किया कि इस पूरी साजिश की डोर सीमा पार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़ी है। कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर ने पंजाब के युवाओं को पैसों और नशे (चिट्टे) के व्यापार में हिस्सेदारी का झाँसा देकर अपने जाल में फँसाया था।
कमिश्नर के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे आकाओं द्वारा युवाओं से अपने 'वफादार' होने का प्रमाण माँगा जाता है, इसी के चलते वे अकेले पुलिसकर्मियों को टारगेट करवाते हैं। जाँच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने ASI हरजीत सिंह को गोली मारने के बाद मौके पर लौटकर 30-40 सेकंड का एक वीडियो बनाया था, ताकि सीमा पार अपने आकाओं को काम पूरा होने का सबूत भेज सकें। यह हरकत CCTV फुटेज में भी कैद हुई है। पुलिस अब मोबाइल की फॉरेंसिक जाँच करा रही है ताकि पूरे विदेशी नेटवर्क को बेनकाब किया जा सके।
शहीद ASI का परिवार और राज्यपाल की प्रतिक्रिया
कमिश्नर ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के ही युवा पाकिस्तानी तस्करों के बहकावे में आकर अपनों पर गोलियाँ चला रहे हैं। शहीद ASI हरजीत सिंह सिपाही से तरक्की पाकर ASI बने थे। उनके पीछे उनकी दो बेटियाँ और 15 साल बाद जन्मा एक छोटा बेटा है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस हत्या के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'इसमें कोई दो राय नहीं कि ये बहुत दुखद है। पंजाब की विभिन्न घटनाएँ वास्तव में हमारे कानून-व्यवस्था की कमजोरियों को दिखाती हैं।' राज्यपाल ने स्वीकार किया कि अब तक के प्रयास जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस का फॉरेंसिक दल मारे गए आरोपी का मोबाइल खँगाल रहा है ताकि पाकिस्तानी हैंडलर नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने आ सके। कमिश्नर ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों पर नज़र रखें और उन्हें सोशल मीडिया के ज़रिए असामाजिक तत्वों व नशे के दलदल में फँसने से बचाएँ। फरार दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी इस मामले में अगला निर्णायक कदम होगी।