आईएनएस तरकश पोर्ट लुई पहुंचा, 192वें अप्रवासी दिवस पर भारत-मॉरीशस समुद्री साझेदारी को नई गति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस तरकश 30 अक्टूबर 2026 को दक्षिणी हिंद महासागर में अपनी परिचालन तैनाती के क्रम में मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई पहुंचा। यह पोत 2 नवंबर को आयोजित होने वाले 192वें अप्रवासी दिवस समारोह से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेगा, जो भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग की बढ़ती गहराई को रेखांकित करती है।
यात्रा की पृष्ठभूमि और राजनयिक संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त 2026 में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने मॉरीशस का दौरा किया था और वहाँ के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई थी। आईएनएस तरकश की यह तैनाती उसी कूटनीतिक पहल की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
भारतीय नौसेना के अनुसार, एडमिरल स्वामीनाथन की मॉरीशस यात्रा के दौरान हुई वार्ता में समुद्री सुरक्षा सहयोग, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, सूचना साझाकरण तंत्र, क्षमता निर्माण और भारतीय नौसेना तथा मॉरीशस नेशनल कोस्ट गार्ड के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया था। इसके अतिरिक्त, संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी को और प्रभावी बनाने पर भी सहमति बनी थी।
एडमिरल स्वामीनाथन ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया था कि भारतीय नौसेना, मॉरीशस पुलिस बल और नेशनल कोस्ट गार्ड की क्षमता वृद्धि तथा कौशल विकास के प्रयासों में हरसंभव सहयोग देती रहेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट
नौसेना प्रमुख की मॉरीशस यात्रा के दौरान मॉरीशस पुलिस बल के आयुक्त रामपरसाद सूरूजेबली और गृह एवं रक्षा मामलों के सचिव कान ओए फोंग वेंग-पूरुन से भी भेंट हुई थी। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसरों की तलाश की गई और दोनों देशों के समुद्री बलों के बीच परिचालन संबंधों के विस्तार पर विचार-विमर्श किया गया।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति
भारतीय नौसेना ने कहा है कि भारत और मॉरीशस के बीच समुद्री साझेदारी आपसी विश्वास और एक सुरक्षित एवं स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र के साझा संकल्प पर आधारित है, जो 'महासागर विजन' के अनुरूप है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न शक्तियों की सक्रियता को लेकर रणनीतिक चर्चाएँ तेज हैं।
आईएनएस तरकश की यह तैनाती भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। भविष्य में दोनों देशों के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के और विस्तार की उम्मीद है।