जयराम रमेश का BJP पर हमला: संसद का अपमान और CEC नियुक्ति पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 30 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी 2014 से लगातार संसदीय संस्था को कमज़ोर करती आ रही है। यह बयान BJP से जुड़े संगठन द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक 'मॉक पार्लियामेंट' कार्यक्रम के संदर्भ में आया, जिसकी रमेश ने कड़ी निंदा की।
मॉक पार्लियामेंट और कांग्रेस की आपत्ति
BJP से संबद्ध संगठन 'सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी' ने 30 अक्टूबर को नई दिल्ली के NDMC कन्वेंशन सेंटर में 'लोकतंत्र बनाम अराजकता' विषय पर एक नकली संसद सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश भर के युवा प्रतिभागियों ने सत्तापक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका निभाई। रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में इस आयोजन को 'बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं' बताया।
संसदीय लोकतंत्र पर रमेश के आरोप
रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, सरकार ने विधेयकों को जबरदस्ती पारित कराया, जनहित के मुद्दों पर बहस से इनकार किया, संसदीय संस्थाओं को बदनाम किया और दोनों सदनों को आत्म-प्रशंसा के मंच में तब्दील कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में संसदीय नियमों का बारंबार उल्लंघन हुआ है और महत्त्वपूर्ण कानूनों को पर्याप्त चर्चा के बिना ही पारित किया गया है। गौरतलब है कि यह वही व्यापक विपक्षी आख्यान है जो 2014 के बाद से विपक्षी खेमे का मुख्य राजनीतिक औज़ार बना हुआ है।
CEC नियुक्ति विवाद
रमेश ने विशेष रूप से दिसंबर 2023 की उस घटना का उल्लेख किया जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को अभूतपूर्व 'आजीवन प्रतिरक्षा' प्रदान करने वाला विधेयक तब पारित किया गया जब 145 विपक्षी सांसद निलंबित थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त विधेयक पारित होते ही ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर नियुक्त किया गया, और यह नियुक्ति करोड़ों भारतीयों को उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित करने के उद्देश्य से की गई।
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहा है और केंद्रीय चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग कर रहा है। विपक्ष ने 'वोट चोरी' के आरोपों को उजागर करने के लिए कई कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं।
BJP का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि संसदीय कार्यवाही नियमों के अनुसार संचालित होती है और चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। BJP ने विपक्ष के इस अभियान को चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास करार दिया है।
आगे क्या होगा
इंडिया ब्लॉक का यह अभियान आगामी चुनावी मौसम में और तेज़ होने की संभावना है, जबकि BJP अपनी संसदीय उपलब्धियों को जनता के सामने रखने में जुटी है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और CEC नियुक्ति प्रक्रिया का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहने की उम्मीद है।