6 अक्टूबर 2026
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इंडिया ब्लॉक के सीईसी-विरोधी मार्च पर BJP-शिवसेना का पलटवार, 'संवैधानिक संस्था पर दबाव' का आरोप

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इंडिया ब्लॉक के सीईसी-विरोधी मार्च पर BJP-शिवसेना का पलटवार, 'संवैधानिक संस्था पर दबाव' का आरोप

सारांश

इंडिया गठबंधन का चुनाव आयोग-विरोधी मार्च सत्तारूढ़ खेमे को एकजुट कर गया। BJP के राम कदम व अजय चंद्राकर और शिवसेना की शायना एनसी ने इसे 'संवैधानिक दबाव' और 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया — और गठबंधन की आंतरिक बिखराहट को भी उजागर किया।

मुख्य बातें

इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद से चुनाव आयोग तक विरोध मार्च निकाला।
BJP विधायक राम कदम ने विपक्ष से प्रमाण सामने रखने की माँग की और SIR प्रक्रिया को संवैधानिक दायित्व बताया।
BJP विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि इंडिया गठबंधन 'सिर्फ कागजों पर' है, नेतृत्व की कोई स्पष्ट पहचान नहीं।
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सड़क पर विरोध करना 'दोगलापन' है।
गठबंधन के कई दल मार्च से अलग रहे, जिससे विपक्ष की आंतरिक एकजुटता पर सवाल उठे।

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन के सांसदों द्वारा संसद भवन से चुनाव आयोग तक निकाले गए विरोध मार्च पर सत्तारूढ़ गठबंधन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम, अजय चंद्राकर और शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने विपक्ष के इस कदम को संवैधानिक संस्था पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास और राजनीतिक ड्रामा करार दिया है।

मार्च का संदर्भ और पृष्ठभूमि

इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई सांसद इस मार्च में शामिल हुए। गौरतलब है कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन बताया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा और कथित बोगस मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच तनाव बना हुआ है।

BJP का पक्ष: 'प्रमाण सामने रखें'

मुंबई से प्रतिक्रिया देते हुए BJP विधायक राम कदम ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उस पर इस प्रकार आरोप-प्रत्यारोप करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा, 'यदि आपके पास कोई प्रमाण है, कोई सबूत या उदाहरण है तो उसे सामने रखिए। बिना किसी प्रमाण के संविधान के तहत बनी एक संवैधानिक संस्था पर इस तरह दबाव बनाना कितना उचित है?'

कदम ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए तर्क दिया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में दो-दो या पाँच-पाँच बार दर्ज हैं, जो मृत हैं या जो अपना निवास स्थान छोड़ चुके हैं, उनके नाम हटाना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष ऐसे बोगस मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने का आग्रह क्यों कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन के कई दल स्वयं इस मोर्चे से अलग रहे, जो गठबंधन के भीतर की असहमति को उजागर करता है।

रायपुर से अजय चंद्राकर का हमला

रायपुर में BJP विधायक अजय चंद्राकर ने इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनके अनुसार, 'इंडी गठबंधन सिर्फ कागजों पर मौजूद है — कभी कोई दल आता है, कभी कोई नहीं।' उन्होंने कहा कि न गठबंधन के संयोजक की स्पष्ट पहचान है, न ही नेता की, और इस स्थिति में राहुल गांधी भी यह दावा नहीं कर सकते कि वे इस गठबंधन के निर्विवाद नेता हैं।

शिवसेना की प्रतिक्रिया: 'दोगलापन साफ दिखता है'

शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने मार्च में शामिल सांसदों, विशेषकर राहुल गांधी, को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक रूप से अफवाहें फैलाने से बचना चाहिए और बयान देने से पहले विचार करना चाहिए। शायना एनसी ने तर्क दिया, 'जब सर्वोच्च न्यायालय में उनके मामले की सुनवाई चल रही है, तब वे सड़कों पर भी विरोध कर रहे हैं — यहाँ उनका दोगलापन साफ दिखाई दे रहा है।'

उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों को आत्म-मंथन करना चाहिए कि वे लोकतंत्र और मतदाताओं की बदौलत जीते हैं या EVM को लेकर उठाए जा रहे तथाकथित सवालों के बल पर।

आगे क्या

सर्वोच्च न्यायालय में SIR प्रक्रिया से जुड़ी सुनवाई जारी रहने के बीच यह सियासी टकराव और गहरा हो सकता है। विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की कोशिश और सत्तारूढ़ दलों की जवाबी घेरेबंदी — दोनों मिलकर चुनावी राजनीति के अगले अध्याय की पटकथा लिख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विपक्ष की विश्वसनीयता के लिए उल्टा पड़ सकता है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दलों की SIR-बचाव की दलीलें तब तक अधूरी हैं जब तक मतदाता-विलोपन का डेटा पारदर्शी रूप से सार्वजनिक नहीं होता। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग इस राजनीतिक घेराबंदी में अपनी स्वायत्त छवि बचाए रख सकता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च क्यों निकाला?
इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद से चुनाव आयोग तक विरोध मार्च निकाला। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।
BJP ने इस मार्च पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP विधायक राम कदम ने मार्च को 'संवैधानिक संस्था पर दबाव बनाने का दुस्साहस' कहा और विपक्ष से ठोस प्रमाण सामने रखने की माँग की। उन्होंने SIR प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने का संवैधानिक दायित्व बताया।
शायना एनसी ने मार्च को 'दोगलापन' क्यों कहा?
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि एक ओर विपक्ष का यही मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और दूसरी ओर वही दल सड़कों पर विरोध भी कर रहे हैं — यह दोहरा रवैया है। उन्होंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा जताई।
क्या इंडिया गठबंधन के सभी दल इस मार्च में शामिल थे?
नहीं, BJP विधायक राम कदम के अनुसार गठबंधन के कई दल इस मोर्चे से अलग रहे। इससे विपक्षी एकता पर सवाल उठे हैं और BJP ने इसे गठबंधन की आंतरिक दरार का प्रमाण बताया।
SIR प्रक्रिया क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की समीक्षा करता है और दोहरे, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाता है। विपक्ष का आरोप है कि इसमें बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे आवश्यक सफाई अभियान बताते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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